धर्मशाला। सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने गुरुवार को कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली शिखर बैठक के औपचारिक एजेंडे में तिब्बत का मुद्दा स्पष्ट रूप से शामिल होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि व्यापक अमेरिका-चीन संबंधों के संदर्भ में तिब्बत अभी भी एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।धर्मशाला में ANI से बातचीत के दौरान पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि शिखर बैठक से पहले दोनों पक्षों के बीच व्यापक स्तर पर तैयारियां और बातचीत चल रही हैं। उन्होंने कहा कि विश्लेषक और संबंधित पक्ष बैठक के संभावित एजेंडे तथा उसके परिणामों पर नजर बनाए हुए हैं। उनके मुताबिक, बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैठक के दौरान किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है।पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें ऐसा नहीं लगता कि तिब्बत का मुद्दा बैठक में सीधे तौर पर सामने आएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन के व्यापक संबंधों में तिब्बत का विषय अप्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहेगा।उन्होंने कहा, “अभी, तेजी से बदलती वैश्विक स्थिति में, ऐसा नहीं लगता कि तिब्बत का मुद्दा वहां सामने आएगा, लेकिन यह अंदरूनी तौर पर जरूर मौजूद है।” उन्होंने यह भी कहा कि तिब्बती प्रशासन बैठक से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और शिखर सम्मेलन के बाद सामने आने वाली आधिकारिक जानकारी से ही स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
शिखर सम्मेलन के नतीजों पर नजर
पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक के बाद दोनों देशों के नेता संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे या कोई संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब शिखर सम्मेलन के बाद ही मिल सकेगा।उन्होंने कहा, “हम इससे जुड़ी बातों पर नजर रख रहे हैं, और असली शिखर सम्मेलन होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी या नहीं, संयुक्त बयान जारी होगा या नहीं, यह तो आगे होने वाली घटनाओं से ही पता चलेगा।”उनके बयान से संकेत मिलता है कि तिब्बती प्रशासन फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय अमेरिका और चीन के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत तथा उसके बाद जारी होने वाले आधिकारिक बयानों का इंतजार कर रहा है।
अमेरिका-चीन संबंधों पर व्यापक बातचीत
शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में व्यापार समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक विषयों पर लगातार बातचीत होती रही है।पेनपा त्सेरिंग ने भी इस संदर्भ में कहा कि वाशिंगटन और बीजिंग के बीच लगातार बातचीत जारी रहना जरूरी है। उन्होंने अगले साल 10 जनवरी तक अमेरिका-चीन व्यापार युद्धविराम यानी ट्रेड ट्रूस को बढ़ाए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत केवल एक शिखर बैठक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बदलती परिस्थितियों में निरंतर संवाद जरूरी है ताकि दोनों पक्ष अपने मतभेदों पर चर्चा कर सकें और संबंधों को लेकर आगे की दिशा तय कर सकें।
व्यापार युद्धविराम का मुद्दा
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार संबंध लंबे समय से दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। टैरिफ, व्यापार असंतुलन और बाजार पहुंच जैसे विषयों को लेकर दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है।ट्रेड ट्रूस को आगे बढ़ाने की संभावनाओं के बीच दोनों देशों के बीच संवाद की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। पेनपा त्सेरिंग ने इसी संदर्भ में लगातार बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया।उनके मुताबिक, अमेरिका और चीन के बीच संवाद का जारी रहना केवल व्यापारिक मामलों के लिए ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के व्यापक संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आगामी शिखर बैठक में व्यापार युद्धविराम को लेकर कोई विशेष समझौता होने की उम्मीद है या नहीं।
तिब्बत पर तिब्बती प्रशासन की नजर
पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती प्रशासन अमेरिका-चीन शिखर बैठक के दौरान और उसके बाद सामने आने वाले घटनाक्रम पर करीब से नजर रखेगा। उन्होंने संकेत दिया कि तिब्बत का मुद्दा बैठक के सार्वजनिक एजेंडे में भले ही प्रमुखता से दिखाई न दे, लेकिन अमेरिका-चीन संबंधों में यह विषय मौजूद है।तिब्बती प्रशासन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिब्बत से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है। ऐसे में अमेरिका और चीन के शीर्ष नेताओं की बैठक को लेकर तिब्बती पक्ष की भी दिलचस्पी बनी हुई है।पेनपा त्सेरिंग ने हालांकि यह दावा नहीं किया कि बैठक में तिब्बत पर कोई विशेष चर्चा होगी। उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि इस मुद्दे के सीधे तौर पर सामने आने की संभावना फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
बदलती वैश्विक स्थिति का असर
पेनपा त्सेरिंग ने तेजी से बदलती वैश्विक स्थिति का भी उल्लेख किया। मौजूदा दौर में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, वैश्विक सुरक्षा और अन्य अंतरराष्ट्रीय विषयों को लेकर लगातार बातचीत और मतभेद दोनों बने हुए हैं।ऐसे में शी जिनपिंग और ट्रंप की बैठक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। शिखर सम्मेलन में किन मुद्दों पर चर्चा होती है और बैठक के बाद दोनों पक्ष किस तरह की आधिकारिक जानकारी साझा करते हैं, इससे आगे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं।पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि अभी कई बातें स्पष्ट नहीं हैं और बैठक के वास्तविक एजेंडे तथा परिणामों का आकलन शिखर सम्मेलन के बाद ही किया जा सकता है।
संयुक्त बयान पर भी निगाह
तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि क्या बैठक के बाद अमेरिका और चीन की ओर से संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। इसके अलावा दोनों नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने की संभावना पर भी उन्होंने कहा कि अभी कुछ निश्चित नहीं है।उनके अनुसार, ऐसे आधिकारिक दस्तावेज और बयान ही यह समझने में मदद करेंगे कि दोनों देशों के बीच बातचीत में किन मुद्दों को प्रमुखता मिली और किन विषयों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति या मतभेद सामने आए।इस बीच पेनपा त्सेरिंग ने दोहराया कि तिब्बती प्रशासन अमेरिका-चीन संबंधों से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। उनके बयान में तिब्बत के मुद्दे को लेकर तत्काल किसी बड़े नतीजे का दावा नहीं किया गया, बल्कि शिखर बैठक और उसके बाद सामने आने वाले आधिकारिक घटनाक्रम के इंतजार की बात कही गई।कुल मिलाकर, शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित बैठक के बीच तिब्बत का मुद्दा चर्चा में बना हुआ है। पेनपा त्सेरिंग के मुताबिक, यह विषय संभवतः बैठक के सार्वजनिक एजेंडे में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देगा, लेकिन अमेरिका-चीन संबंधों के व्यापक संदर्भ में इसकी मौजूदगी बनी हुई है। वहीं, व्यापार युद्धविराम और दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत की आवश्यकता भी आगामी वार्ता के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि शिखर बैठक के बाद दोनों देश किस तरह का आधिकारिक संदेश जारी करते हैं और उसमें किन मुद्दों का उल्लेख होता है।
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