इस्लामाबाद। भारत और चीन के संबंधों में हाल के दिनों में सुधार के संकेतों के बीच पाकिस्तान अपनी रणनीति में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों और सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान के संवैधानिक ढांचे में बड़े बदलाव पर विचार किया जा रहा है।

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार इन दोनों क्षेत्रों को अंतरिम प्रांत जैसा दर्जा देने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 1 (खंड 2) में संशोधन या फिर 28वें संवैधानिक संशोधन के जरिए नया कानून लाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, पाकिस्तान सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन इस मुद्दे को लेकर वहां राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के दर्जे में बदलाव की तैयारी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान लंबे समय से संवैधानिक स्थिति को लेकर विवाद का विषय रहे हैं। पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों में अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाएं बनाई हैं, लेकिन इन्हें देश के पूर्ण प्रांतों के समान अधिकार प्राप्त नहीं हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, अब पाकिस्तान सरकार इन क्षेत्रों को एक अंतरिम प्रांत जैसी व्यवस्था देने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे को स्पष्ट करना और वहां के लोगों को अधिक संवैधानिक अधिकार देने का दावा किया जा रहा है।

यदि यह बदलाव होता है तो पाकिस्तान के संवैधानिक ढांचे में महत्वपूर्ण संशोधन की जरूरत पड़ेगी।

भारत-चीन संबंधों पर पाकिस्तान की नजर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की संभावनाओं ने पाकिस्तान की चिंताओं को बढ़ाया है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सहित कई मुद्दे रहे हैं, लेकिन हाल के समय में दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ने के संकेत मिले हैं।

पाकिस्तान लंबे समय से चीन को अपना करीबी सहयोगी मानता रहा है। ऐसे में भारत-चीन संबंधों में किसी भी सकारात्मक बदलाव को इस्लामाबाद अपने रणनीतिक हितों के नजरिए से देखता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान से जुड़े फैसलों को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाना चाहता है।

संवैधानिक संशोधन की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार इस बदलाव के लिए संविधान के अनुच्छेद 1 (खंड 2) में संशोधन पर विचार कर सकती है। यह अनुच्छेद पाकिस्तान के प्रशासनिक क्षेत्रों से संबंधित है।

इसके अलावा 28वें संवैधानिक संशोधन के जरिए भी नया प्रावधान लाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, किसी भी संवैधानिक बदलाव के लिए संसद में राजनीतिक सहमति की जरूरत होगी।

पाकिस्तान में संवैधानिक संशोधन हमेशा राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय रहे हैं। इसलिए सरकार को विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों के रुख का भी सामना करना पड़ सकता है।

स्थानीय स्तर पर भी उठते रहे हैं सवाल

PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग लंबे समय से राजनीतिक अधिकारों, विकास और संवैधानिक स्थिति को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। वहां के कई समूह अधिक अधिकार और बेहतर प्रशासन की मांग करते रहे हैं।

पाकिस्तान सरकार का तर्क रहा है कि इन क्षेत्रों के विकास और प्रशासन को मजबूत करने के लिए बदलाव जरूरी हैं। वहीं, आलोचक इसे पाकिस्तान की रणनीतिक जरूरतों से जोड़कर देखते हैं।

भारत का रुख पहले से स्पष्ट

भारत का रुख पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर स्पष्ट रहा है। भारत इन क्षेत्रों को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और पाकिस्तान के किसी भी प्रशासनिक बदलाव को मान्यता नहीं देता।

भारतीय पक्ष लगातार कहता रहा है कि पाकिस्तान को इन क्षेत्रों पर अवैध कब्जा छोड़ना चाहिए। ऐसे में यदि पाकिस्तान संवैधानिक बदलाव करता है तो इस पर भारत की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ सकता है असर

PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर किसी भी बड़े फैसले का असर दक्षिण एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है। यह क्षेत्र भारत, पाकिस्तान और चीन के रणनीतिक हितों से जुड़ा हुआ है।

गिलगित-बाल्टिस्तान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिहाज से भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में वहां की संवैधानिक स्थिति में बदलाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जाएगा।

फिलहाल पाकिस्तान सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। लेकिन भारत-चीन संबंधों में बदलते समीकरणों के बीच PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर पाकिस्तान की संभावित योजना ने क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।

Tags: