वेनेजुएला पहुंचीं नोबेल विजेता मचाडो, लोकतांत्रिक बदलाव पर टिकी निगाहें
वेनेजुएला की राजनीति में बढ़ी हलचल
कराकस: वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो करीब सालभर विदेश में रहने के बाद रविवार, 25 अक्टूबर को स्वदेश लौट आईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी की जानकारी देते हुए समर्थकों को संदेश दिया कि वह उनके साथ हैं। दिसंबर 2025 में देश छोड़ने के बाद यह उनकी पहली वापसी है। ऐसे समय में उनका लौटना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वेनेजुएला में राजनीतिक परिवर्तन और राष्ट्रपति चुनावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
मचाडो की वापसी की पुष्टि उनके सहयोगी और विपक्ष के पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज ने भी की। स्पेन में रह रहे गोंजालेज ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए संकेत दिया कि वह भी जल्द उनके साथ होंगे। मचाडो की देश में मौजूदगी से विपक्ष को अपने समर्थकों के बीच सीधे सक्रिय होने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, उनकी वापसी के साथ किसी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं हुई है। देश के राजनीतिक भविष्य से जुड़े प्रमुख सवाल अभी बने हुए हैं।
स्वदेश लौटने के बाद मचाडो बारकिसीमेतो के सांता रोजा चर्च पहुंचीं। उनकी मौजूदगी की तस्वीरें सामने आई हैं। उनकी पार्टी वेंते वेनेजुएला से जुड़े सूत्रों के अनुसार, देश लौटने के उनके कम से कम सात प्रयास पहले सफल नहीं हो पाए थे। इस पृष्ठभूमि में उनका वेनेजुएला पहुंचना समर्थकों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब उनकी राजनीतिक गतिविधियों और अंतरिम प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। मचाडो को पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासनकाल में लंबे समय तक छिपकर रहना पड़ा था। देश छोड़ने से पहले उन्होंने एक वर्ष से अधिक समय मुख्य रूप से भूमिगत रहकर बिताया। मादुरो सरकार ने उनके विदेश जाने पर भी प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद वह वर्ष 2025 के आखिर में गुप्त तरीके से देश से बाहर निकलने में सफल हुईं। उनकी विदेश यात्रा नोबेल शांति पुरस्कार से जुड़े कार्यक्रम के लिए हुई थी, जिसके बाद वह कई महीनों तक वापस नहीं लौट सकीं।
उनकी राजनीतिक भूमिका वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले और अधिक महत्वपूर्ण हुई थी। अक्टूबर 2023 में उन्होंने विपक्ष के प्राइमरी चुनाव में जीत हासिल की थी। वह मादुरो को चुनौती देना चाहती थीं, लेकिन उन्हें राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। इसके बाद विपक्ष ने एडमंडो गोंजालेज का समर्थन किया। चुनाव परिणाम को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गंभीर विवाद पैदा हुआ। निर्वाचन प्राधिकरण ने मादुरो को विजेता घोषित किया, जबकि विपक्ष ने परिणाम को चुनौती दी और अपने उम्मीदवार की जीत का दावा किया।
मचाडो अब जिस वेनेजुएला में लौटी हैं, वहां सत्ता की स्थिति उनके देश छोड़ने के समय से बदल चुकी है। जनवरी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान मादुरो को सत्ता से हटा दिया गया था। इसके बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाली। मादुरो की सत्ता समाप्त होने के बावजूद राष्ट्रपति चुनाव की तारीख तय नहीं हुई है। अंतरिम व्यवस्था की अवधि और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की दिशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मचाडो की वापसी इन्हीं सवालों को दोबारा राजनीतिक बहस के केंद्र में ला सकती है।
उनके लौटने में आई बाधाओं को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। विपक्षी कार्यकर्ताओं ने वेनेजुएला के अधिकारियों पर वापसी रोकने का आरोप लगाया, जिसे अधिकारियों ने खारिज किया। अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों ने भी मचाडो को रोकने से इनकार किया है। हालांकि, उन्होंने माना कि कुछ अवसरों पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण उन्हें वापस नहीं लौटने की सलाह दी गई थी। इन बयानों से स्पष्ट है कि उनकी वापसी का विषय सुरक्षा और कूटनीतिक बातचीत से भी जुड़ा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रविवार को मचाडो की वापसी के बारे में सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है और उम्मीद जताई कि वह सुरक्षित होंगी। दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उनकी सुरक्षित वापसी को राजनीतिक सुलह के लिए चल रही बातचीत से जोड़ा। अमेरिका समर्थित वार्ता में अंतरिम सरकार और विपक्ष के एक हिस्से की भागीदारी रही है, जबकि मचाडो का आंदोलन इससे बाहर रहा है। मचाडो पहले भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के जरिए लोकतांत्रिक परिवर्तन की बात कह चुकी हैं। मई में उन्होंने वर्ष समाप्त होने से पहले देश लौटने और फिर राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। उनके अनुसार, विश्वसनीय चुनाव के लिए निष्पक्ष चुनाव प्राधिकरण, अद्यतन मतदाता सूची और विपक्षी उम्मीदवारों की स्वतंत्र भागीदारी जैसी तैयारियां आवश्यक हैं। उनकी स्वदेश वापसी से इन मुद्दों को देश के भीतर उठाने की उनकी क्षमता बढ़ सकती है।
आगे की राजनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि मचाडो को सार्वजनिक गतिविधियों की कितनी स्वतंत्रता मिलती है और चुनाव की मांग पर अंतरिम सरकार क्या रुख अपनाती है। उनकी वापसी विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, लेकिन इसे तत्काल सत्ता परिवर्तन या चुनाव की निश्चित घोषणा नहीं माना जा सकता। फिलहाल समर्थकों से उनका सीधा संपर्क, विपक्षी नेतृत्व की एकजुटता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्पष्ट कार्यक्रम वेनेजुएला के राजनीतिक घटनाक्रम के प्रमुख विषय बने हुए हैं।