रूस-यूक्रेन युद्ध में नया मोड़, तेल और सैन्य ठिकानों पर हमले तेज

Update: 2026-07-24 15:14 GMT

नई दिल्ली  :  रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को दावा किया कि यूक्रेनी रक्षा बलों ने रूस के महत्वपूर्ण सैन्य उद्यम और तेल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि इन हमलों से रूस की सैन्य आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ा है और रूसी सेना की युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से इन हमलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को यूक्रेन की रक्षा सेनाओं ने रूस के किरोव क्षेत्र में स्थित एक अहम सैन्य उद्यम को निशाना बनाया। जेलेंस्की के अनुसार, यह कंपनी रूसी सेना के विमानों और मिसाइल प्रणालियों के लिए आवश्यक पुर्जों का निर्माण करती है। इन उपकरणों का इस्तेमाल यूक्रेन के शहरों और बस्तियों पर किए जाने वाले सैन्य अभियानों में किया जाता है।

जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन का उद्देश्य रूस की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, ताकि वह यूक्रेन के खिलाफ हमलों को जारी रखने में सक्षम न रह सके। उन्होंने दावा किया कि रूसी सैन्य उद्योग और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि रूस के तेल से जुड़े ठिकानों को भी हमलों में निशाना बनाया गया है। हालांकि उन्होंने इन ठिकानों की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। जेलेंस्की के मुताबिक, ऊर्जा क्षेत्र रूस की सैन्य गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे प्रभावित करने से रूसी युद्ध मशीन पर असर पड़ सकता है।

रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी युद्ध में दोनों पक्ष समय-समय पर एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, हथियार भंडार और रणनीतिक क्षेत्रों को निशाना बनाते रहे हैं। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के अंदर मौजूद सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले तेज किए हैं। यूक्रेन का कहना है कि ये कार्रवाई रूस की आक्रामक क्षमता को सीमित करने के लिए की जा रही है।

दूसरी ओर, रूस लगातार यूक्रेन के हमलों का जवाब देता रहा है और कई बार यूक्रेनी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा कर चुका है। रूस की ओर से यूक्रेन पर ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चिंता बनी हुई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है, लेकिन अभी तक संघर्ष को समाप्त करने को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। युद्ध के कारण दोनों देशों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा स्थिति पर भी प्रभाव पड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य उद्योग और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले युद्ध की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे हमलों का उद्देश्य विरोधी देश की सैन्य तैयारियों और संसाधनों को प्रभावित करना होता है। हालांकि इससे संघर्ष और लंबा खिंचने की आशंका भी बढ़ सकती है।

फिलहाल रूस और यूक्रेन दोनों की ओर से सैन्य गतिविधियां जारी हैं। जेलेंस्की के दावों पर रूस की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इन हमलों के प्रभाव और दोनों देशों की रणनीति पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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