नेपाल में भूस्खलन से बनी नई मुसीबत भारत के सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट
भूस्खलन नदी का रास्ता रुका भारत भी सतर्क
काठमांडू/पिथौरागढ़: हाल की विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहे नेपाल में एक बार फिर अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो गया। पश्चिमी नेपाल के दरचुला जिले में भारी भूस्खलन के कारण चमेलिया यानी चौलानी नदी का बहाव शुक्रवार को आंशिक रूप से बाधित हो गया। पहाड़ से बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा नदी में गिरने के बाद पानी का रास्ता संकरा हो गया। इससे नदी के पूरी तरह अवरुद्ध होने और बाद में प्राकृतिक बांध अचानक टूटने की आशंका पैदा हो गई थी। खतरे को देखते हुए नेपाल प्रशासन ने नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। भारत के सीमावर्ती पिथौरागढ़ में भी सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों को अलर्ट किया गया।
भूस्खलन दरचुला जिले की अपिहिमाल ग्रामीण नगरपालिका-1 के भट्टार इलाके में हुआ। शुक्रवार सुबह से पहाड़ी से लगातार मलबा गिर रहा था। दोपहर के दौरान भूस्खलन तेज हुआ और मलबे का बड़ा हिस्सा चौलानी नदी में जा गिरा। इसके बाद नदी का एक हिस्सा अवरुद्ध हो गया और पानी जमा होने लगा। प्रशासन को आशंका थी कि अगर और मलबा गिरा तो नदी पूरी तरह बंद हो सकती है।
अचानक टूट सकता था प्राकृतिक बांध
नदी में भूस्खलन का मलबा जमा होने से सबसे बड़ी चिंता प्राकृतिक बांध बनने की थी। पहाड़ी क्षेत्रों में जब भूस्खलन का मलबा नदी का रास्ता रोक देता है तो उसके पीछे बड़ी मात्रा में पानी जमा हो सकता है। यदि मलबे से बना अवरोध अचानक टूट जाए तो जमा पानी एक साथ नीचे की ओर बढ़ सकता है, जिससे फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। दरचुला जिला प्रशासन ने इसी खतरे को देखते हुए चौलानी नदी के किनारे रहने वाले लोगों और संबंधित सरकारी एजेंसियों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए। सुरक्षा बलों को भी किसी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया। सुदूरपश्चिम प्रांत के मुख्यमंत्री खगराज भट्ट ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने तथा संभावित खतरे से निपटने की तैयारी रखने के निर्देश दिए।
नदी किनारे बसे परिवारों को हटाया गया
भट्टार क्षेत्र में खतरे को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई भी की गई। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक करीब 15 परिवारों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित किया गया। क्षेत्र में बारिश और लगातार भूस्खलन के कारण प्रशासन किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता था। सुरक्षा कर्मियों को नदी के आसपास के क्षेत्रों में लोगों को सतर्क करने के लिए लगाया गया। नेपाल के चमेलिया हाइड्रोपावर सिक्योरिटी बेस बलांच से सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को भी तैनात किया गया। अधिकारियों के अनुसार तत्काल स्थिति में नदी का प्रवाह सामान्य स्तर के आसपास था, लेकिन भूस्खलन जारी रहने के कारण खतरे को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।
भारत तक क्यों पहुंच सकता था खतरा?
चमेलिया या चौलानी नदी आगे चलकर महाकाली यानी काली नदी में मिलती है। महाकाली नदी नेपाल और भारत के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा के एक हिस्से का निर्माण करती है। यही कारण है कि चमेलिया में अचानक बड़ी मात्रा में पानी आने की स्थिति में इसका असर केवल नेपाल तक सीमित रहने की आशंका नहीं थी। चमेलिया का पानी काली नदी में मिलने के बाद भारतीय सीमा के झूलाघाट, पंचेश्वर और आगे टनकपुर की दिशा में बढ़ता है। इसलिए नदी में बने संभावित प्राकृतिक अवरोध के अचानक टूटने की स्थिति में भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी जलस्तर बढ़ने का खतरा जताया गया था। नेपाल में पैदा हुई स्थिति की सूचना मिलने के बाद उत्तराखंड के पिथौरागढ़ प्रशासन ने भी एहतियाती कदम उठाए। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस, एसएसबी और संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया गया तथा नदी किनारे रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने को कहा गया।
महाकाली नदी पर भी बढ़ी सतर्कता
नेपाल के कंचनपुर जिला प्रशासन ने भी महाकाली नदी के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की। शुक्रवार शाम महाकाली नदी में पानी का बहाव करीब 1.377 लाख क्यूसेक दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। नदी का बहाव बढ़ने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। प्रशासन ने लोगों से नदी के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क करने को कहा। दरचुला प्रशासन ने भी बाढ़ एवं आपदा सहायता के लिए आपात संपर्क व्यवस्था जारी की।
शाम तक कम हुआ बड़ा खतरा
हालांकि शुक्रवार शाम राहत की खबर सामने आई। दरचुला के सहायक मुख्य जिला अधिकारी मोहन सिंह धामी के अनुसार नदी ने धीरे-धीरे भूस्खलन से जमा मलबा और तलछट बहा दिया। शाम करीब चार से पांच बजे स्थिति की जांच किए जाने तक नदी का रास्ता फिर खुल चुका था और पानी स्वतंत्र रूप से बह रहा था। इससे अचानक बड़े पैमाने पर बाढ़ आने का तत्काल खतरा काफी कम हो गया। इसके बावजूद प्रशासन ने निगरानी खत्म नहीं की है। प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल संपर्क बाधित होने के कारण सूर्यास्त के बाद वास्तविक समय की जानकारी हासिल करने में भी मुश्किल आ रही थी। इसके अलावा पहाड़ी से दोबारा मलबा गिरने की आशंका बनी हुई है।
हाल की आपदा के बाद बढ़ी चिंता
दरचुला की घटना ऐसे समय सामने आई है जब नेपाल पहले ही हाल की भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड से हुए भारी नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है। इस वजह से किसी नदी का भूस्खलन के कारण अचानक बाधित होना प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया।
हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण नदियों का अस्थायी रूप से अवरुद्ध होना विशेष रूप से खतरनाक माना जाता है। मलबे के पीछे पानी जमा होने से प्राकृतिक झील बन सकती है और उसके अचानक टूटने पर बहुत कम समय में निचले इलाकों तक भारी मात्रा में पानी पहुंच सकता है। यही वजह है कि प्रशासन ने खतरा कम होने के बावजूद नदी के आसपास निगरानी बनाए रखने का फैसला किया है। फिलहाल चमेलिया नदी का प्रवाह दोबारा खुलने से नेपाल और भारत दोनों के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत है। इसके बावजूद दरचुला के भट्टार क्षेत्र में भूस्खलन की संभावना और मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है ताकि दोबारा मलबा गिरने या नदी का प्रवाह बाधित होने की स्थिति में समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा जा सके।