पेरिस: फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों, आगजनी और तोड़फोड़ से होने वाले नुकसान की भरपाई को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। फ्रांसीसी सीनेट ने ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत हिंसक समूहों में शामिल लोगों की आर्थिक जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। कुछ परिस्थितियों में मुआवजे की वसूली पारिवारिक भत्तों और आवास सहायता से भी संभव होगी। हालांकि, सीनेट की मंजूरी के बाद इसे तत्काल लागू कानून मानना सही नहीं होगा। विधेयक को अभी नेशनल असेंबली की प्रक्रिया से गुजरना है। 
सीनेट में 27 और 28 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात हुए मतदान में विधेयक के समर्थन में 229 और विरोध में 105 वोट पड़े। मतदान में कुल 342 सदस्यों ने भाग लिया, जिनमें आठ ने मतदान से परहेज किया। सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के लिए मुआवजा वसूलने से संबंधित इस प्रस्ताव को आम तौर पर ‘कासर-पेयर’ यानी ‘तोड़फोड़ करने वाला भुगतान करे’ विधेयक कहा जा रहा है। 
सरकार का तर्क है कि दुकानों, वाहनों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचने के बाद उसका आर्थिक बोझ पीड़ितों और करदाताओं पर पड़ता है। हिंसक घटनाओं में शामिल व्यक्तियों की पहचान होने पर भी यह साबित करना कठिन हो सकता है कि किस व्यक्ति ने कौन-सी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। संसदीय बहस में गृह मंत्री लॉरां नूनेज ने कहा कि अशांति के दौरान सुरक्षाबलों की प्राथमिकता व्यवस्था संभालना होती है, जिससे नुकसान की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित करने में कठिनाइयां आती हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था में हिंसक समूह में शामिल लोगों को सामूहिक रूप से हुए नुकसान के लिए संयुक्त नागरिक दायित्व के दायरे में लाया जा सकेगा। निर्धारित परिस्थितियों में यह जिम्मेदारी तब भी तय हो सकती है, जब संबंधित व्यक्ति ने स्वयं तोड़फोड़ नहीं की हो। नए प्रावधान के तहत प्रति व्यक्ति जवाबदेही की सीमा 10 हजार यूरो रखी गई है। इसका संबंध नुकसान की भरपाई से है और इसे हर प्रदर्शनकारी पर अपने आप लगने वाला निश्चित जुर्माना समझना गलत होगा।
सीनेट के विवरण के मुताबिक, व्यवस्था उन परिस्थितियों को भी संबोधित करती है, जिनमें लोग सुरक्षाबलों की चेतावनी के बावजूद भीड़ में बने रहते हैं और वे इस बात से अनजान नहीं हो सकते कि वहां हिंसा या तोड़फोड़ हो रही है। इसलिए किसी प्रदर्शन में केवल उपस्थित होने और हिंसक जमावड़े में जानबूझकर बने रहने के बीच का अंतर जिम्मेदारी तय करने में महत्वपूर्ण होगा। प्रस्ताव का उद्देश्य हिंसक गतिविधियों से जुड़े समूहों के कारण हुए नुकसान की भरपाई को अधिक प्रभावी बनाना है। 
विधेयक का सबसे चर्चित हिस्सा सरकारी सामाजिक सहायता से वसूली का प्रावधान है। सीनेट से पारित संस्करण में पारिवारिक भत्तों और व्यक्तिगत आवास सहायता के एक हिस्से से मुआवजा वसूलने की व्यवस्था शामिल है। सीनेटरों ने इसका दायरा न्यूनतम आय सहायता ‘आरएसए’ तक बढ़ाया है। इस प्रावधान के समर्थकों का कहना है कि भुगतान करने में असमर्थ जिम्मेदार व्यक्तियों से भी वसूली का रास्ता होना चाहिए। संसदीय चर्चा में जरूरी जीवनयापन के लिए राशि छोड़ने का उल्लेख भी किया गया। 
परिवारों की जिम्मेदारी का सवाल विशेष रूप से नाबालिगों से जुड़े मामलों में उठ रहा है। फ्रांस में नाबालिग बच्चों से हुए नुकसान के लिए अभिभावकों की नागरिक जिम्मेदारी का सिद्धांत पहले से मौजूद है। नया प्रस्ताव मुआवजे की वसूली के लिए कुछ सामाजिक सहायता भुगतानों तक पहुंच बढ़ाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी वयस्क आरोपी के सभी रिश्तेदार स्वतः भुगतान के लिए जिम्मेदार हो जाएंगे। परिवार से वसूली संबंधित कानूनी दायित्व और लागू शर्तों पर निर्भर करेगी।
दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि आवास सहायता, पारिवारिक भत्तों या न्यूनतम आय सहायता से कटौती कमजोर परिवारों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने की क्षमता प्रभावित कर सकती है। उसने चेतावनी दी है कि इससे पहले से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे परिवार और गरीबी में जा सकते हैं। संगठन ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार तथा व्यक्तिगत जिम्मेदारी के निर्धारण पर भी चिंता व्यक्त की है। 
फ्रांस की सर्वोच्च प्रशासनिक सलाहकारी संस्था कौंसेय देता ने अपने परामर्श में विधेयक के प्रभाव संबंधी अध्ययन की कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। संस्था ने कहा कि उपलब्ध अध्ययन में वित्तीय आंकड़ों और संभावित परिणामों पर पर्याप्त जानकारी नहीं है। उसने सामाजिक सहायता पाने वालों पर असर समझने के लिए अधिक आंकड़ों तथा व्यवस्था की प्रभावशीलता का समय के साथ मूल्यांकन करने की आवश्यकता बताई। इससे स्पष्ट है कि प्रस्ताव पर बहस केवल सख्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके वास्तविक आर्थिक परिणाम भी महत्वपूर्ण हैं।
अब विधेयक का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव नेशनल असेंबली है, जहां इसके प्रावधानों पर चर्चा और मतदान होना है। वहां की प्रक्रिया तथा आगे के विधायी निर्णयों के बाद अंतिम स्वरूप स्पष्ट होगा। फिलहाल सीनेट की मंजूरी ने नुकसान की भरपाई, हिंसक समूहों की जिम्मेदारी और परिवारों की सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है। समर्थक इसे पीड़ितों को मुआवजा दिलाने का उपाय बता रहे हैं, जबकि आलोचक कमजोर परिवारों और विरोध के अधिकार पर संभावित असर को लेकर सवाल उठा रहे हैं। 
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