जिनेवा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान जिनेवा में आयोजित एक साइड इवेंट में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए गए। कार्यक्रम में बाल विवाह, जबरन शादी और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने विशेष रूप से कमजोर समुदायों की महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर चिंता जताई।यह साइड इवेंट “Child and Forced Marriage as Gender-Based Violence” यानी “जेंडर-बेस्ड वायलेंस के तौर पर बाल विवाह और जबरन शादी” विषय पर आयोजित किया गया। ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस (GHRD) की कोऑर्डिनेटर एलेजांद्रा मार्टिनेज ओटेरो ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करना और पाकिस्तान में समुदायों से जुड़े मामलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने लाना था।
मार्टिनेज ओटेरो के मुताबिक, कार्यक्रम में बाल विवाह और जबरन शादी को केवल सामाजिक समस्या के रूप में नहीं, बल्कि लैंगिक हिंसा और मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर विषय के रूप में देखा गया। इसमें महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा, उनकी सहमति, शिक्षा और अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने के अधिकार पर चर्चा की गई।उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में बच्चों की बिक्री, यौन शोषण और यौन दुर्व्यवहार से जुड़े मामलों पर काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक से जुड़े प्रतिनिधित्व के साथ महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भेदभाव से जुड़े संयुक्त राष्ट्र तंत्र के प्रतिनिधि तथा सिंधी समुदाय के सदस्य वक्ताओं के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में अलग-अलग दृष्टिकोण से बाल विवाह और जबरन विवाह के प्रभावों पर चर्चा की गई।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का 63वां नियमित सत्र जिनेवा में 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहा है। इस दौरान दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मानवाधिकार मुद्दों पर चर्चा के साथ कई साइड इवेंट भी आयोजित किए जा रहे हैं।मार्टिनेज ओटेरो ने कहा कि सिंध में महिलाओं और लड़कियों से जुड़े मामलों को सामने लाना कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के कारण लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। जब किसी विवाह में स्वतंत्र और पूर्ण सहमति नहीं होती, तो इससे महिलाओं और लड़कियों के कई बुनियादी अधिकार प्रभावित होते हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र भी बाल और जबरन विवाह को मानवाधिकारों से जुड़ी समस्या के रूप में देखता है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार, बाल और जबरन विवाह लड़कियों और महिलाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य तथा हिंसा से मुक्त जीवन जैसे अधिकारों पर गंभीर असर डाल सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों में विवाह के लिए स्वतंत्र और पूर्ण सहमति को महत्वपूर्ण माना गया है।कार्यक्रम में सिंधी समुदाय के प्रतिनिधियों की भागीदारी के जरिए जमीनी स्तर से जुड़े अनुभवों और चिंताओं को सामने रखने की कोशिश की गई। वक्ताओं ने महिलाओं और लड़कियों के सामने आने वाली परिस्थितियों तथा उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।
साइड इवेंट में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामलों में पीड़ितों की सुरक्षा, न्याय तक पहुंच और पुनर्वास की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। साथ ही ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए समुदायों में जागरूकता और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।बाल विवाह का मुद्दा केवल विवाह की उम्र तक सीमित नहीं है। इससे लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूटने, कम उम्र में गर्भावस्था और आर्थिक निर्भरता जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। UNICEF के अनुसार, बाल विवाह लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ घरेलू हिंसा के जोखिम से भी जुड़ा है।
जबरन विवाह के मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू संबंधित व्यक्ति की सहमति है। किसी लड़की या महिला पर दबाव डालकर, धमकी देकर या उसकी इच्छा के खिलाफ विवाह कराने की स्थिति मानवाधिकारों के गंभीर सवाल खड़े करती है। इसी कारण जिनेवा में आयोजित कार्यक्रम में बाल विवाह के साथ जबरन विवाह को भी लैंगिक हिंसा के संदर्भ में रखा गया।कार्यक्रम में पाकिस्तान के समुदायों से जुड़े मामलों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने प्रभावित महिलाओं और बच्चों की आवाज अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तक पहुंचाने की जरूरत बताई। हालांकि किसी विशेष मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब किसी भी निष्कर्ष के लिए महत्वपूर्ण होता है।
मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों के लिए बाल विवाह रोकने में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ शिक्षा और सामाजिक जागरूकता भी महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। ग्रामीण या आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों में लड़कियों की शिक्षा जारी रखना और परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना ऐसी प्रथाओं को रोकने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जाता है।मार्टिनेज ओटेरो ने बताया कि साइड इवेंट का उद्देश्य विभिन्न विशेषज्ञों और समुदाय के सदस्यों को एक मंच पर लाकर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर बातचीत को आगे बढ़ाना था। इसमें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के साथ स्थानीय परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्रों के दौरान आयोजित होने वाले ऐसे साइड इवेंट सदस्य देशों की औपचारिक कार्यवाही से अलग होते हैं, लेकिन मानवाधिकार संगठनों, विशेषज्ञों और प्रभावित समुदायों को अपने मुद्दे सामने रखने का मंच देते हैं। इनमें उठाए गए विचार जरूरी नहीं कि UNHRC के आधिकारिक निष्कर्ष या संयुक्त राष्ट्र की औपचारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व करें।जिनेवा में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए सिंध में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति, बाल विवाह और जबरन शादी जैसे विषय एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आए। कार्यक्रम में शामिल वक्ताओं ने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, स्वतंत्र सहमति और लैंगिक हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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