तेहरान। होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर ईरान ने अमेरिका के सामने सख्त शर्तें रख दी हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार को कहा कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को तभी फिर से खोला जाएगा, जब अमेरिका ईरान की शर्तों को पूरी तरह स्वीकार करेगा। वहीं, दूसरी ओर तेहरान और ओमान के बीच जलडमरूमध्य से जुड़े एक नए शिपिंग प्रोटोकॉल को लेकर बातचीत जारी है और दोनों देश समझौते के करीब पहुंचने का दावा कर रहे हैं।
IRGC के प्रवक्ता सरदार मोहेबी के अनुसार, होर्मुज को फिर से खोलने का फैसला ओमान के साथ चल रही बातचीत से अलग है। उन्होंने कहा कि जलमार्ग खोलने के लिए कुछ खास तरीकों और शर्तों को पूरा करना होगा। इनमें सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि अमेरिका ईरान की मांगों को पूरी तरह स्वीकार करे और क्षेत्रीय बातचीत में हस्तक्षेप बंद करे।
ओमान के साथ अलग बातचीत
ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर अलग से बातचीत चल रही है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित नए प्रोटोकॉल का उद्देश्य जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नियम तय करना है।
हाल के दिनों में ईरान और ओमान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक नए मार्ग और उससे जुड़े नियमों पर सहमति की दिशा में प्रगति की है। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शिपिंग रूट के भौगोलिक निर्देशांकों को लेकर समझ बनी है और संयुक्त घोषणा की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इस व्यवस्था से अपने आप जलमार्ग की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित होने की गारंटी नहीं मानी जा रही है।
इससे संकेत मिलता है कि ओमान के साथ होने वाला समझौता मुख्य रूप से समुद्री यातायात और संचालन से जुड़ा है, जबकि अमेरिका से जुड़ी शर्तें व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों से संबंधित हैं।
अमेरिका से ईरान की क्या अपेक्षा?
IRGC की ओर से सामने आए बयान में स्पष्ट किया गया है कि होर्मुज को खोलने का फैसला अमेरिकी रुख से भी जुड़ा हुआ है। ईरान चाहता है कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों को सीमित करे तथा क्षेत्रीय वार्ताओं में हस्तक्षेप न करे।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की अन्य मांगों में अमेरिकी सैन्य दबाव समाप्त करना, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती कम करना, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
हालांकि, अमेरिका की ओर से भी अपनी शर्तें रखी गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों के लिए निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन करे। इस कारण दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस के अंतरराष्ट्रीय परिवहन के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।
इस जलमार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है। तेल टैंकरों और अन्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए स्थिति स्पष्ट न होने पर परिवहन लागत और बीमा खर्च बढ़ सकते हैं। इससे कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
यही कारण है कि ईरान, अमेरिका और ओमान के बीच होर्मुज को लेकर होने वाली हर बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार और समुद्री परिवहन क्षेत्र की नजर बनी हुई है।
नया शिपिंग प्रोटोकॉल क्यों अहम?
ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित नया शिपिंग प्रोटोकॉल जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के संचालन को व्यवस्थित करने की कोशिश है। ईरान पहले ही समुद्री यातायात के लिए कुछ सुरक्षा प्रक्रियाओं और मार्गों की बात करता रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच औपचारिक व्यवस्था बनने से जहाजों को मार्ग, संपर्क और सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर अधिक स्पष्टता मिल सकती है।
हालांकि, यह सवाल अभी बना हुआ है कि नए प्रोटोकॉल को व्यापक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग समुदाय किस हद तक स्वीकार करता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जहाजों को सुरक्षित और पूर्वानुमानित तरीके से गुजरने की अनुमति मिले।
तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ते की कोशिश
होर्मुज को लेकर ईरान का ताजा रुख ऐसे समय सामने आया है, जब क्षेत्र में सैन्य और राजनीतिक तनाव बना हुआ है। एक ओर IRGC अमेरिका के साथ जुड़ी शर्तों को जलमार्ग खोलने के लिए महत्वपूर्ण बता रहा है, वहीं दूसरी ओर तेहरान और मस्कट बातचीत के जरिए समुद्री यातायात के लिए नई व्यवस्था तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने की बात कही है, जिससे संकेत मिलता है कि कूटनीतिक बातचीत के लिए कुछ गुंजाइश बनी हुई है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शर्तों को लेकर क्या सहमति बनती है। ओमान के साथ समझौता हो जाने के बावजूद यदि अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद कायम रहते हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है।
दुनिया की नजर बातचीत पर
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी घटनाक्रम का असर केवल ईरान, ओमान और अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत समेत एशिया और यूरोप के कई देशों के लिए यह समुद्री मार्ग ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार की दृष्टि से बेहद अहम है।
इसलिए आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका बातचीत और ईरान-ओमान शिपिंग प्रोटोकॉल पर होने वाली प्रगति महत्वपूर्ण होगी। यदि दोनों मोर्चों पर सहमति बनती है तो समुद्री यातायात को स्थिरता मिल सकती है। लेकिन यदि राजनीतिक शर्तों पर गतिरोध जारी रहता है, तो जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिम और अनिश्चितता बनी रह सकती है।
फिलहाल ईरान का संदेश स्पष्ट है कि होर्मुज को खोलने का फैसला केवल ओमान के साथ होने वाले समुद्री समझौते पर निर्भर नहीं करेगा। IRGC के मुताबिक, अमेरिका को ईरान की शर्तें पूरी तरह स्वीकार करनी होंगी। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत ही यह तय करेगी कि दुनिया के इस अहम समुद्री मार्ग की स्थिति किस दिशा में जाती है।