ईरान के हमले से कुवैत में आपात स्थिति, ऊर्जा संयंत्रों पर असर

Update: 2026-07-18 08:36 GMT

कुवैत। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब खाड़ी क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। ईरान की ओर से कुवैत पर किए गए मिसाइल हमलों के बाद पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हमले के बाद कुवैत ने अपनी सभी हवाई सेवाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया। इसके अलावा देश के महत्वपूर्ण बिजली ग्रिड और पानी को खारेपन से मुक्त करने वाले डिसेलिनेशन प्लांट को भी नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार तड़के कुवैत के कई इलाकों में हवाई हमले के सायरन लगातार बजते रहे। ईरान से दागी गई मिसाइलों के कुवैत के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और बिना जरूरत घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की गई।

हमले के बाद कुवैत सरकार ने राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया। इसके चलते कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सभी उड़ान संचालन रोक दिए गए। कुवैत एयरवेज ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षा कारणों से आने और जाने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को फिलहाल निलंबित किया गया है। यात्रियों को अपनी उड़ानों से जुड़ी जानकारी के लिए एयरलाइन से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

ईरान की इस कार्रवाई को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ बढ़ते तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने "ऑपरेशन नसर-2" के तहत कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। आईआरजीसी के मुताबिक, कुवैत के आरिफजान ग्राउंड फोर्सेज सपोर्ट सेंटर पर हमला किया गया, जहां बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी थी।

ईरानी सेना ने यह भी दावा किया कि कुवैत स्थित अली अल सलेम एयर बेस के रडार सिस्टम को ड्रोन हमले के जरिए नुकसान पहुंचाया गया। इसके अलावा ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि उसकी नौसेना ने कुवैत के अल अहमदी पोर्ट पर मौजूद अमेरिकी नौसैनिक ईंधन आपूर्ति केंद्र को निशाना बनाया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

हमले के बाद कुवैत के जरूरी बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ा है। कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जानकारी दी कि मिसाइल हमलों के बाद कुछ बिजली संयंत्रों और डिसेलिनेशन प्लांट के हिस्सों में आग लग गई। डिसेलिनेशन प्लांट कुवैत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि देश में पीने के पानी की बड़ी जरूरत इन्हीं संयंत्रों के जरिए पूरी होती है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है और आपातकालीन टीमें स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हैं। बिजली और पानी की आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

कुवैत खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी देश है और यहां कई अमेरिकी सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में ईरान द्वारा कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के दावे ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को गंभीरता से देखा जा रहा है। खाड़ी देशों में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर तेल आपूर्ति, वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल कुवैत प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हवाई सेवाओं को बहाल करने और प्रभावित बिजली-पानी सुविधाओं को ठीक करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। वहीं, दुनिया की निगाहें ईरान और अमेरिका के बीच आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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