ईरान पूरी तरह से आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा युद्ध में है: राष्ट्रपति पेजेश्कियन
Tehran तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि उनका देश इस समय आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा समेत कई मोर्चों पर दबाव और संघर्ष का सामना कर रहा है। उन्होंने अमेरिका पर दबाव बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद उनकी सरकार जनता की समस्याओं के समाधान और देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए काम कर रही है।
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए की ओर से प्रसारित एक टेलीविजन संबोधन में पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका के दबाव के बावजूद ईरान पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई कम करने और लोगों के सामने मौजूद आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए पूरी क्षमता के साथ प्रयास कर रही है।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी अमेरिका की नीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास ईरानी लोगों के साथ सम्मानपूर्वक बातचीत करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित ईरान विरोधी आर्थिक अभियान को पुरानी अमेरिकी नीति का दोहराव बताया। अराघची ने कहा कि ईरान पहले भी इस तरह के दबाव का सामना कर चुका है और उसे पता है कि ऐसी परिस्थितियों से कैसे निपटना है। उनका यह बयान ट्रंप की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें ईरान को आर्थिक मदद या सहयोग देने वाले देशों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात कही गई थी।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को ‘जीवन रेखा’ उपलब्ध कराने वाले देशों के खिलाफ कठोर आर्थिक अभियान की घोषणा की थी। उन्होंने इसे बड़े पैमाने पर आर्थिक युद्ध और अलगाव की नीति बताया था। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दोनों देशों के बीच सुलह की कोशिशों को भी झटका लगा है। दोनों पक्षों ने 18 जून को क्षेत्रीय तनाव कम करने को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन हाल के तनाव ने इस प्रक्रिया को अनिश्चित बना दिया है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने भी पड़ोसी और अन्य देशों को अमेरिकी आर्थिक दबाव अभियान में शामिल नहीं होने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान पहले संबंधित देशों से बातचीत करेगा और उनसे अमेरिकी अभियान का हिस्सा नहीं बनने का आग्रह करेगा। तेहरान के इन बयानों से साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक एवं कूटनीतिक तनाव फिलहाल कम होता नजर नहीं आ रहा है।