ईरान का दावा- अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन-मिसाइल हमला

Update: 2026-07-17 10:53 GMT

तेहरान: ईरान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैन्य विमानों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया है। ईरान के अनुसार, यह कार्रवाई उसके क्षेत्र में हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई, जिनमें कई लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने एक बयान जारी कर कहा कि उसके सैन्य अभियानों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। IRGC के मुताबिक, हमले में अमेरिका के कई रीफ्यूलिंग विमान और लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

IRGC ने अपने बयान में कहा कि उसने अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाते हुए कार्रवाई की। संगठन का दावा है कि हमले में कई विमानों को नष्ट किया गया और कुछ अन्य को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि, अमेरिका या जॉर्डन की ओर से इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई उसके खिलाफ किए गए अमेरिकी हमलों की प्रतिक्रिया थी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका की ओर से किए गए हमलों में ईरान के कई स्थान प्रभावित हुए और इसमें कम से कम आठ लोगों की मौत हुई। तेहरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों के बीच इस तरह की सैन्य कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनती रही हैं।

IRGC ने अपने बयान में जॉर्डन के लोगों को भी संबोधित किया और अमेरिका के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उसने कहा कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इस बयान पर जॉर्डन सरकार की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जॉर्डन अमेरिका का प्रमुख सहयोगी देश है और वहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी लंबे समय से रही है। क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों के लिए अमेरिका जॉर्डन में सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल करता है।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कई मुद्दों को लेकर बना हुआ है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सैन्य गतिविधियां प्रमुख हैं। दोनों देशों के बीच समय-समय पर अप्रत्यक्ष संघर्ष और हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान के दावे सही साबित होते हैं तो यह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और गंभीर स्तर तक ले जा सकता है। हालांकि, किसी भी सैन्य दावे की पुष्टि के लिए स्वतंत्र स्रोतों से जानकारी मिलना जरूरी है।

अमेरिका की ओर से इस कथित हमले को लेकर विस्तृत बयान का इंतजार है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस घटनाक्रम पर बनी हुई है। कई देश पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की अपील कर चुके हैं।

इस बीच, क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा रही है। पश्चिम एशिया के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ईरान का यह दावा ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र पहले से ही कई संघर्षों और राजनीतिक तनावों का सामना कर रहा है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया से स्थिति की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

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