नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का गाइडेड-मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट 'त्रिशूल' अपनी विदेशी तैनाती के तहत स्पेन के वालेंसिया पहुंच गया है। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि युद्धपोत की यह यात्रा भूमध्य सागर, अटलांटिक महासागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नौसेना की तैनाती का हिस्सा है। इस दौरान भारतीय नौसेना और स्पेनिश नौसेना के बीच कई पेशेवर और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय नौसेना का फ्रिगेट त्रिशूल 30 सितंबर को स्पेन के वालेंसिया पहुंचा। यहां जहाज के चालक दल और स्पेनिश नौसेना के अधिकारियों के बीच पेशेवर बातचीत होगी। इसके अलावा क्रॉस-डेक विजिट, खेल गतिविधियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के जरिए दोनों देशों के नौसैनिकों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और समुद्री अनुभवों को समझने का अवसर मिलेगा।
मंत्रालय ने बताया कि इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य ऑपरेशन से जुड़े अनुभवों और जानकारी का आदान-प्रदान करना है। समुद्री क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की चुनौतियों से निपटने के लिए मित्र देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समझ और समन्वय महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी उद्देश्य से भारतीय नौसेना अलग-अलग देशों के साथ लगातार संपर्क और संयुक्त गतिविधियों में हिस्सा लेती रही है।
आईएनएस त्रिशूल भारतीय नौसेना का गाइडेड-मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट है। आधुनिक युद्धपोतों में स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल जहाज की पहचान को मुश्किल बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। गाइडेड मिसाइल और दूसरे नौसैनिक हथियारों से लैस इस श्रेणी के जहाज भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लंबी दूरी की तैनाती के दौरान ऐसे युद्धपोत भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और विदेशी नौसेनाओं के साथ सहयोग को भी प्रदर्शित करते हैं।
वालेंसिया में त्रिशूल की मौजूदगी के दौरान होने वाली पेशेवर बातचीत को दोनों नौसेनाओं के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय और स्पेनिश नौसैनिक अधिकारी समुद्री अभियानों से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे। अलग-अलग समुद्री परिस्थितियों में काम करने के अनुभव और परिचालन प्रक्रियाओं को समझने से दोनों पक्षों को एक-दूसरे की क्षमताओं तथा कार्यशैली के बारे में जानकारी मिलेगी।
क्रॉस-डेक विजिट भी इस यात्रा का प्रमुख हिस्सा होगी। इसके तहत दोनों नौसेनाओं के अधिकारी और नौसैनिक एक-दूसरे के जहाजों का दौरा कर सकते हैं और वहां इस्तेमाल होने वाली प्रणालियों, प्रक्रियाओं तथा संचालन के तरीकों को समझ सकते हैं। इस प्रकार की गतिविधियां नौसेनाओं के बीच पेशेवर संबंध विकसित करने और आपसी विश्वास बढ़ाने में मदद करती हैं।
इसके साथ ही खेल-कूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है। सैन्य कूटनीति में पेशेवर बातचीत के साथ ऐसे कार्यक्रमों का भी महत्व होता है, क्योंकि इनके माध्यम से अलग-अलग देशों के सैन्यकर्मियों के बीच व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क बढ़ता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दोनों देशों के नौसैनिकों को एक-दूसरे की संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझने का मौका मिलता है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, त्रिशूल की स्पेन यात्रा भारतीय नौसेना के मित्र देशों और सहयोगी नौसेनाओं के साथ जारी समुद्री जुड़ाव का हिस्सा है। भारतीय नौसेना नियमित रूप से विदेशी बंदरगाहों का दौरा करती है और विभिन्न देशों के साथ पेशेवर आदान-प्रदान, संयुक्त अभ्यास तथा अन्य समुद्री गतिविधियों में भाग लेती है। इन यात्राओं का उद्देश्य समुद्री सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ आपसी संबंधों को मजबूत करना है।
भूमध्य सागर और अटलांटिक जैसे समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नौसेना की मौजूदगी भारत की विस्तारित समुद्री पहुंच को भी दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए ये क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अलग-अलग देशों की नौसेनाओं के बीच संवाद और सहयोग समुद्री सुरक्षा के लिहाज से अहम भूमिका निभाता है।
समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध गतिविधियों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे विषयों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बनी रहती है। इसके अलावा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के दौरान भी अलग-अलग देशों की नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल उपयोगी साबित होता है। इसी कारण नौसैनिक यात्राओं और पेशेवर आदान-प्रदान को समुद्री कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
भारत और स्पेन के बीच रक्षा सहयोग भी व्यापक द्विपक्षीय संबंधों का एक हिस्सा है। नौसेनाओं के बीच इस तरह के संपर्क दोनों देशों को समुद्री क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर तलाशने का मौका देते हैं। वालेंसिया में आयोजित गतिविधियों के दौरान दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच परिचालन अनुभव साझा होने से आपसी समझ और मजबूत होने की उम्मीद है।
आईएनएस त्रिशूल की यह तैनाती केवल एक बंदरगाह यात्रा तक सीमित नहीं है। युद्धपोत भूमध्य सागर, अटलांटिक और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में अपनी तैनाती के तहत विभिन्न गतिविधियों में शामिल है। लंबी दूरी की ऐसी तैनातियां भारतीय नौसेना के जहाजों और चालक दल की परिचालन तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं।
कुल मिलाकर स्पेन के वालेंसिया में त्रिशूल का पहुंचना भारत और स्पेन के बीच नौसैनिक संपर्क को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है। पेशेवर बातचीत, क्रॉस-डेक विजिट, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों नौसेनाओं के बीच संवाद बढ़ेगा। भारतीय नौसेना की यह यात्रा मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी और सहयोग को मजबूत करने की उसकी लगातार जारी कोशिशों का हिस्सा है।