Discord पर चलाता था शोषण का नेटवर्क, भारतीय को 20 साल की सजा
नाबालिग लड़कियों के शोषण का मामला
लंदन : पेरिस की अदालत ने भारतीय नागरिक रोहन राणे को नाबालिग लड़कियों के ऑनलाइन यौन शोषण और उन्हें अश्लील व हिंसक वीडियो बनाने के लिए मजबूर करने वाले नेटवर्क का नेतृत्व करने के मामले में 20 साल की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला 9 अक्टूबर 2026 को आया। रिपोर्टों के अनुसार, यह नेटवर्क Discord प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था और अमेरिका, ब्रिटेन तथा कनाडा की कमजोर परिस्थितियों वाली किशोरियों को निशाना बनाता था।
पेरिस की अदालत का बड़ा फैसला, भारतीय रोहन राणे को 20 साल की जेल
फ्रांस की राजधानी पेरिस की अदालत ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण के गंभीर मामले में भारतीय नागरिक रोहन राणे को 20 साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने उसे ऐसे ऑनलाइन नेटवर्क का नेतृत्व करने का दोषी पाया, जिसके माध्यम से नाबालिग लड़कियों को यौन गतिविधियों और अश्लील वीडियो बनाने के लिए मजबूर किया जाता था। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क में पीड़ितों पर दबाव डालने, उन्हें धमकाने और उनसे हिंसक गतिविधियां करवाने जैसी घटनाएं भी शामिल थीं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 29 वर्षीय राणे फ्रांस में पढ़ाई करने आया था। वह ऑनलाइन समूह के संचालन से जुड़ा था और उसके नेतृत्व में नेटवर्क ने अलग-अलग देशों में किशोरियों को निशाना बनाया। मामले की सुनवाई पेरिस की विशेष आपराधिक अदालत में हुई। मुकदमे की अधिकांश कार्यवाही बंद कमरे में आयोजित की गई, ताकि पीड़ितों की पहचान और उनकी निजता की रक्षा की जा सके।
Discord पर चलाया जा रहा था ऑनलाइन नेटवर्क
जांच के केंद्र में ‘CVLT’ नाम का एक ऑनलाइन समूह था, जो Discord प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था। रिपोर्टों के मुताबिक, इस समूह से जुड़े लोग इंटरनेट पर कमजोर परिस्थितियों से गुजर रही किशोरियों की पहचान करते थे। शुरुआत में उनसे ऑनलाइन संपर्क किया जाता था और विश्वास कायम होने के बाद उन्हें निजी तस्वीरें साझा करने के लिए उकसाया जाता था।
इसके बाद कुछ पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता था कि वे यौन गतिविधियों और हिंसक कृत्यों से जुड़े वीडियो तैयार करें। आरोपों के मुताबिक, इनकार करने पर उन्हें धमकाया जाता था और मानसिक दबाव के जरिए उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करवाने की कोशिश की जाती थी।
यह मामला केवल अश्लील सामग्री तैयार करने तक सीमित नहीं था। जांच में पीड़ितों को स्वयं को नुकसान पहुंचाने और यातनापूर्ण गतिविधियां करने के लिए मजबूर करने की घटनाएं भी सामने आईं। अदालत में पेश किए गए मामले में ऑनलाइन उत्पीड़न, जबरन यौन गतिविधियों और नाबालिगों के शोषण से जुड़े गंभीर आरोप शामिल थे।
अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा तक फैला था नेटवर्क
रिपोर्टों के अनुसार, इस नेटवर्क की गतिविधियां एक देश तक सीमित नहीं थीं। अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में रहने वाली किशोरियां इसके निशाने पर थीं। इंटरनेट के माध्यम से अलग-अलग देशों के लोगों तक पहुंच बनाना इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली का हिस्सा था।
मामले ने यह सवाल भी उठाया कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन चैट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किस तरह बच्चों के शोषण के लिए किया जा सकता है। डिजिटल माध्यमों पर संपर्क करने वाले लोग अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर पीड़ितों से संवाद कर सकते हैं। बाद में निजी तस्वीरों या वीडियो का इस्तेमाल धमकी देने और दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई, क्योंकि पीड़ितों में कई कम उम्र की लड़कियां थीं। ऑनलाइन उत्पीड़न का प्रभाव केवल घटना के समय तक सीमित नहीं रहता। इससे पीड़ितों की निजता, मानसिक स्वास्थ्य और सामान्य जीवन पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। अदालत में पीड़ितों की ओर से भी मामले को गंभीरता से उठाया गया।
जांच के बाद फ्रांस में शुरू हुई कानूनी कार्रवाई
रिपोर्टों के मुताबिक, राणे को वर्ष 2021 में दक्षिणी फ्रांस के एंटिब शहर में गिरफ्तार किया गया था। अमेरिकी अधिकारियों से मिले अलर्ट के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी। जांच एजेंसियों ने ऑनलाइन समूह की गतिविधियों और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने राणे के खिलाफ गंभीर आरोप पेश किए। इनमें संगठित तरीके से जबरन वसूली, नाबालिगों के साथ यौन शोषण और यातना से संबंधित अपराध शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने अदालत से 30 साल की सजा की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने उसे 20 साल की जेल की सजा सुनाई।
यह मामला फ्रांस में डिजिटल माध्यम से किए गए अत्यंत हिंसक और यौन शोषण से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसने ऑनलाइन मंचों पर बच्चों की सुरक्षा, शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के बीच सहयोग की आवश्यकता को उजागर किया है।
ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
रोहन राणे से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। विशेषज्ञों और बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न के तरीकों के बारे में जागरूक करना, शिकायत दर्ज कराने के सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराना और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करना आवश्यक है।
माता-पिता और अभिभावकों के लिए भी जरूरी है कि वे बच्चों से इंटरनेट इस्तेमाल करने के दौरान सामने आने वाले जोखिमों पर खुलकर बात करें। बच्चों को यह समझाना महत्वपूर्ण है कि किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में निजी तस्वीरें या वीडियो साझा करना जरूरी नहीं है और धमकी मिलने पर किसी भरोसेमंद वयस्क से सहायता लेनी चाहिए। पेरिस की अदालत का फैसला इस मामले में दोषसिद्धि और सजा से जुड़ा है। साथ ही, यह घटना बताती है कि डिजिटल दुनिया में होने वाला शोषण वास्तविक जीवन में गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, पीड़ितों की निजता और ऐसे अपराधों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई इस मामले से जुड़े प्रमुख मुद्दे हैं।