लाहौर। पाकिस्तान में विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रस्तावित विरोध मार्च से पहले पार्टी के कार्यकर्ताओं, सांसदों और नेताओं की गिरफ्तारी तथा एहतियातन हिरासत को लेकर मानवाधिकार आयोग पाकिस्तान (HRCP) ने चिंता जताई है। मानवाधिकार संस्था ने इन कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए सरकार से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के नागरिकों के अधिकार की रक्षा करने की अपील की है।HRCP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने बयान में कहा कि PTI के प्रस्तावित विरोध मार्च से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं, सांसदों और नेताओं की गिरफ्तारियों तथा एहतियातन हिरासत के मामले बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। संस्था ने इन कार्रवाइयों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण सभा का अधिकार सभी नागरिकों के लिए सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, सामने आई रिपोर्टों में महिलाओं समेत PTI के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। HRCP ने यह भी कहा कि कुछ परिवारों ने दावा किया है कि उन्हें हिरासत में लिए गए अपने रिश्तेदारों के ठिकाने के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। आयोग ने इन परिस्थितियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।HRCP ने कहा कि राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों के शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार को बनाए रखे। संस्था ने पहले से बड़े स्तर पर लोगों को हिरासत में लेने और आवाजाही की स्वतंत्रता पर व्यापक प्रतिबंध लगाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आयोग का कहना है कि ऐसी कार्रवाई को आवश्यक और आनुपातिक बताने के लिए पर्याप्त आधार होना चाहिए।यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब PTI अपने विरोध मार्च की तैयारियों को लेकर चर्चा में है। पार्टी का मार्च पहले 27 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन PTI ने इसे स्थगित करते हुए अब 4 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के मुताबिक, पार्टी की राजनीतिक समिति ने तारीख बदलने का फैसला किया और मार्च पेशावर से शुरू किया जाएगा।
विरोध मार्च से पहले PTI नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की कई खबरें सामने आई हैं। रावलपिंडी डिवीजन में पुलिस की कार्रवाई के दौरान करीब 150 लोगों को मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (MPO) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिए जाने की खबर है। इसके अलावा नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर नजर रखने तथा उनके घरों और कार्यालयों पर तलाशी की कार्रवाई की भी जानकारी सामने आई है।इससे पहले PTI की ओर से भी बड़ी संख्या में समर्थकों को हिरासत में लिए जाने के दावे किए गए थे। पार्टी नेतृत्व ने इन कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए विरोध प्रदर्शन को अपना लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार बताया है। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और कार्रवाई के आधार को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए हैं।
इस मामले में कानूनी स्तर पर भी घटनाक्रम सामने आया है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने 16 सितंबर को PTI के कुछ नेताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं को परेशान करने या गिरफ्तार करने से रोका था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दावा किया गया था कि प्रस्तावित मार्च से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के घरों पर छापेमारी और गिरफ्तारियां की जा रही हैं।HRCP ने अपने बयान में बार-बार लगाए जाने वाले व्यापक प्रतिबंधों पर भी आपत्ति जताई है। संस्था ने सरकार से राजनीतिक तनाव कम करने के लिए विपक्ष के साथ सार्थक बातचीत दोबारा शुरू करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने की मांग की है। यह HRCP का पक्ष है और हिरासत के प्रत्येक मामले की कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
मानवाधिकार संस्था ने साफ किया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नागरिक स्वतंत्रताओं और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। आयोग के अनुसार, विरोध प्रदर्शन से पहले सामूहिक हिरासत और आवाजाही पर व्यापक पाबंदियों जैसे कदम नागरिक अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल पैदा करते हैं। HRCP ने अधिकारियों से ऐसी स्थिति में कानून और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की अपील की है।फिलहाल PTI का मार्च 4 अक्टूबर के लिए तय किया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव तथा सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनी रहेगी। HRCP ने सरकार से तनाव कम करने, बातचीत का रास्ता अपनाने और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों के अधिकार को सुनिश्चित करने की अपील की है।