अरब प्रवासियों ने कैसे बदली उत्तरी अमेरिका की तस्वीर? जानें 150 साल का इतिहास
वॉशिंगटन/ओटावा। अमेरिका और कनाडा में अरब समुदायों की मौजूदगी का इतिहास करीब डेढ़ शताब्दी पुराना है। बेहतर रोजगार, आर्थिक अवसरों, राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और धार्मिक-सामाजिक परिस्थितियों के कारण अरब देशों से बड़ी संख्या में लोगों ने उत्तरी अमेरिका का रुख किया। शुरुआत में लेबनान, सीरिया, फिलिस्तीन और जॉर्डन जैसे क्षेत्रों से पहुंचे प्रवासियों ने छोटे व्यापार और मजदूरी के जरिए अपनी पहचान बनाई। समय के साथ यह प्रवासन शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, व्यवसाय और अन्य पेशेवर क्षेत्रों तक फैल गया। आज अरब मूल के लोग अमेरिका और कनाडा के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।अरब-अमेरिकी समुदाय में उन लोगों और उनके वंशजों को शामिल किया जाता है, जिनकी पारिवारिक जड़ें मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के अरबी भाषी देशों से जुड़ी हैं। इसमें लेबनान, मिस्र, इराक, सीरिया, फिलिस्तीन, जॉर्डन, यमन, मोरक्को और अन्य देशों से आए लोग शामिल हैं। यह समुदाय धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई दृष्टि से भी काफी विविध है।
1880 के दशक में शुरू हुआ अमेरिका की ओर बड़ा प्रवासन
अमेरिका में अरब प्रवासन की पहली बड़ी लहर 1880 के दशक में शुरू हुई। उस समय लेबनान, सीरिया, फिलिस्तीन और जॉर्डन का बड़ा हिस्सा ऑटोमन साम्राज्य के अंतर्गत आता था। इन क्षेत्रों से लोग बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में अमेरिका पहुंचने लगे।लेबनान के माउंट लेबनान क्षेत्र में रेशम उद्योग के कमजोर होने, आर्थिक परेशानियों और राजनीतिक परिस्थितियों ने लोगों को दूसरे देशों में रोजगार तलाशने के लिए प्रेरित किया। कई परिवार गरीबी और खाद्य संकट से बचने के लिए भी अपना देश छोड़कर गए।अमेरिका में शुरुआती अरब प्रवासियों ने कारखानों में काम किया और छोटे व्यापारी के रूप में भी अपनी जगह बनाई। कई लोग घर-घर जाकर सामान बेचते थे। इस व्यवसाय के कारण उनकी पहुंच अमेरिका के अलग-अलग राज्यों तक हुई और छोटे-छोटे अरब समुदाय विकसित होने लगे।अरब अमेरिकन नेशनल म्यूजियम के अनुसार, 1880 से 1924 के बीच ग्रेटर सीरिया क्षेत्र से लगभग 95 हजार अरब अमेरिका पहुंचे थे। 1924 तक अमेरिका में अरब मूल के लोगों की संख्या लगभग दो लाख बताई गई थी।
1924 के कानून ने प्रवासन की रफ्तार धीमी की
अमेरिका में अरब प्रवासन को 1924 के जॉनसन-रीड इमिग्रेशन एक्ट से बड़ा झटका लगा। इस कानून के तहत राष्ट्रीय मूल के आधार पर प्रवासन कोटा निर्धारित किया गया और उत्तरी तथा पश्चिमी यूरोप के देशों को प्राथमिकता दी गई।इसके परिणामस्वरूप अरब देशों से अमेरिका आने वाले लोगों की संख्या में भारी गिरावट आई। इस अवधि में नए प्रवासियों का आना सीमित रहा, लेकिन पहले से बसे परिवारों ने अपनी सामाजिक और व्यावसायिक संस्थाओं को मजबूत करना जारी रखा।द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कुछ पेशेवरों और शरणार्थियों के लिए अमेरिका आने के रास्ते खुले। फिलिस्तीन के 1948 के विस्थापन, मिस्र और इराक की राजनीतिक परिस्थितियों ने भी प्रवासन को प्रभावित किया।
1965 के बाद अमेरिका में बढ़ी अरब आबादी
अमेरिका में अरब प्रवासन के इतिहास में वर्ष 1965 महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल हार्ट-सेलर इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट पारित हुआ, जिसने पुराने राष्ट्रीय मूल आधारित कोटा सिस्टम को समाप्त कर दिया।इसके बाद अरब देशों से अमेरिका आने वाले लोगों की संख्या बढ़ने लगी। इस नई लहर में डॉक्टर, इंजीनियर, विद्यार्थी, शोधकर्ता, व्यापारी और विभिन्न पेशों से जुड़े लोग शामिल थे। इसके अलावा लेबनान के गृहयुद्ध और दूसरे क्षेत्रीय संघर्षों से प्रभावित लोग भी अमेरिका पहुंचे।अरब अमेरिकन नेशनल म्यूजियम के अनुसार, 1966 से 1990 के बीच लगभग चार लाख अरब मूल के लोग अमेरिका आए। इस दौरान अरब समुदायों में व्यापक अरब पहचान और सांस्कृतिक संगठनों का विकास भी हुआ।
कनाडा में 1882 में पहुंचा पहला दर्ज अरब प्रवासी
कनाडा में अरब समुदाय का इतिहास भी 1880 के दशक से शुरू होता है। कनाडा की आधिकारिक सांख्यिकी एजेंसी के ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, इस क्षेत्र से आने वाले पहले दर्ज प्रवासी अब्राहम बौनाडेरे थे, जो 1882 में मॉन्ट्रियल पहुंचे थे। उनका मूल क्षेत्र वर्तमान लेबनान में था।शुरुआती अरब प्रवासी मुख्य रूप से ईसाई समुदाय से संबंधित थे और आर्थिक अवसरों की तलाश में कनाडा आए थे। इनमें बड़ी संख्या युवाओं और अविवाहित पुरुषों की थी। कई लोग छोटे व्यापारी और दुकानदार बने।1908 के कंटीन्यूअस जर्नी रेगुलेशन और 1910 के अन्य आव्रजन प्रतिबंधों के कारण कनाडा में अरब प्रवासन की गति धीमी पड़ गई। ग्रेट डिप्रेशन और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी प्रवासन सीमित रहा।
लेबनान और उत्तरी अफ्रीका से भी पहुंचे प्रवासी
कनाडा में 1960 के दशक के दौरान आव्रजन नीतियों में बदलाव और शिक्षा तथा कौशल आधारित चयन व्यवस्था लागू होने के बाद अरब प्रवासन को बढ़ावा मिला। मिस्र और लेबनान इस दौर के प्रमुख मूल देश रहे1975 से 1990 के बीच लेबनान में गृहयुद्ध के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने कनाडा का रुख किया। 1990 के दशक के बाद अल्जीरिया, मोरक्को और ट्यूनीशिया जैसे उत्तरी अफ्रीकी देशों से भी प्रवासन बढ़ा। इनमें से कई लोग फ्रेंच भाषा और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण क्यूबेक में बसे।वर्ष 2016 से 2019 के बीच सीरिया के संघर्ष से प्रभावित शरणार्थियों का कनाडा पहुंचना अरब प्रवासन के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा।
कनाडा में 7.95 लाख से अधिक अरब मूल के लोग
स्टैटिस्टिक्स कनाडा की 30 अक्टूबर 2025 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2021 की जनगणना में कनाडा में अरब मूल की आबादी 7,95,665 दर्ज की गई थी। यह देश की कुल आबादी का लगभग 2.2 प्रतिशत थी। वर्ष 2001 में यह संख्या लगभग 2.33 लाख थी। यानी दो दशकों में आबादी तीन गुने से अधिक हो गई।रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में कनाडा के लगभग 30.3 प्रतिशत अरब मूल के लोग वहीं पैदा हुए थे। शेष आबादी में लेबनान, सीरिया, इराक, मोरक्को, मिस्र और अल्जीरिया जैसे देशों से आए लोग शामिल थे।धार्मिक विविधता भी इस समुदाय की प्रमुख विशेषता है। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में 70.1 प्रतिशत अरब मूल के लोगों ने मुस्लिम और 21.2 प्रतिशत ने ईसाई धर्म बताया था।
नई पीढ़ी ने बनाई अलग पहचान
अमेरिका और कनाडा में अरब मूल के लोगों की नई पीढ़ी ने शिक्षा, चिकित्सा, कारोबार, पत्रकारिता, कला और राजनीति सहित कई क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।प्रारंभिक प्रवासियों ने जहां छोटे व्यापार और मजदूरी से शुरुआत की थी, वहीं आज उनके परिवारों की अगली पीढ़ियां विश्वविद्यालयों, पेशेवर संस्थानों और सरकारी व्यवस्थाओं में भी सक्रिय हैं।हालांकि, इस समुदाय के सामने रोजगार में भेदभाव, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक पूर्वाग्रह जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। स्टैटिस्टिक्स कनाडा की रिपोर्ट में शिक्षा के अच्छे स्तर के बावजूद रोजगार संबंधी बाधाओं और भेदभाव के अनुभवों का उल्लेख किया गया है।
प्रवासन से बहुसांस्कृतिक समाज तक का सफर
अमेरिका और कनाडा में अरब समुदायों का इतिहास केवल रोजगार की तलाश में विदेश जाने की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, पुनर्वास और नई पहचान बनाने की भी कहानी है। शुरुआती प्रवासियों ने कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन शुरू किया और धीरे-धीरे सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक केंद्रों, व्यापारिक संगठनों तथा सांस्कृतिक समुदायों का निर्माण किया।आज अरब मूल के परिवार अपनी भाषा, खानपान, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह करीब 150 वर्षों का प्रवासन इतिहास अमेरिका और कनाडा के बहुसांस्कृतिक समाज के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।