Sanaa सना : यमन के हूथी ग्रुप ने कहा है कि उसने अदन की खाड़ी में एक सऊदी ऑयल टैंकर को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया है। इससे कुछ घंटे पहले ही उन्होंने उत्तरी लाल सागर में एक और सऊदी टैंकर पर मिसाइल हमले का दावा किया था।
बुधवार (स्थानीय समय) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जारी एक बयान में, हूथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने कहा कि "डेज़ी" नाम के टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया और उसे "वापस लौटने पर मजबूर" किया गया।
सारेया ने कहा कि यह हमला सऊदी अरब के खिलाफ ग्रुप की घोषित समुद्री नाकेबंदी का हिस्सा था, जो "नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी" की नीति के तहत की गई थी।
उन्होंने कहा कि हूथी सेना सऊदी ऑयल टैंकरों पर कड़ी नज़र रख रही है और दक्षिणी व उत्तरी लाल सागर से उनके गुजरने पर रोक लगाएगी। वे ऐसा तब तक करेंगे जब तक यमन के हूथी-नियंत्रित इलाकों पर लगी नाकेबंदी (जैसा कि वे कहते हैं) हटा नहीं ली जाती। यह जानकारी शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने दी है।
इस बीच, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने कहा कि बुधवार को यमन के दक्षिणी तट के पास अदन की खाड़ी में यात्रा करते समय एक टैंकर ने पास में ज़ोरदार धमाके की आवाज़ सुनी। साथ ही यह भी बताया गया कि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं।
इससे पहले दिन में, हूथियों ने कहा था कि उन्होंने उत्तरी लाल सागर में सऊदी बंदरगाह शहर यानबू के पास सऊदी ऑयल टैंकर "वफ़ा" को कई बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया था। सारेया ने इस हमले को "सटीक" बताया, लेकिन कोई और जानकारी नहीं दी।
दोनों दावों पर सऊदी अधिकारियों की ओर से कोई तुरंत टिप्पणी नहीं आई है और इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
ये ताज़ा दावे हूथियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आए हैं। 20 जुलाई को, हूथियों ने लाल सागर में सऊदी-लिंक्ड जहाजों पर समुद्री प्रतिबंध की घोषणा की थी। उन्होंने इसके लिए हूथी-नियंत्रित इलाकों पर सऊदी की कथित नाकेबंदी का हवाला दिया था।
ग्रुप ने सऊदी-लिंक्ड जहाजों, ऊर्जा ठिकानों और हवाई अड्डों पर कई हमलों का दावा भी किया है, जबकि सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में हूथी सैन्य ठिकानों पर सीमित हवाई हमले फिर से शुरू कर दिए हैं।
यमन 2014 के आखिर से ही संघर्ष में फंसा हुआ है। तब हूथियों ने राजधानी सना समेत उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था, जिसके बाद 2015 में सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया था।