नेपाल : आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। अचानक आए सैलाब ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
सबसे ज्यादा असर नेपाल के **रसुवा जिले और तिब्बत सीमा से लगे इलाकों** में देखने को मिला है। यहां अचानक आई बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई क्षेत्रों का संपर्क टूट गया है और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
अचानक कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कई जगहों पर सामान्य बारिश की स्थिति थी तो अचानक इतना बड़ा जलप्रलय कैसे आ गया?
जानकारी के अनुसार, यह सामान्य बारिश से आने वाली बाढ़ नहीं थी, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र में अचानक पानी का तेज बहाव बढ़ने से फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बनी। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे ग्लेशियर टूटना, बर्फीले हिस्सों का खिसकना, भूस्खलन और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जमा पानी का अचानक नीचे आना जैसे कारण हो सकते हैं।
हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं बेहद खतरनाक होती हैं क्योंकि ऊंचाई से आने वाला पानी कम समय में कई किलोमीटर तक तबाही मचा सकता है।
तिब्बत से क्या है बाढ़ का कनेक्शन?
नेपाल की इस बाढ़ का संबंध तिब्बत क्षेत्र से जोड़ा जा रहा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित इलाकों में अचानक पानी का बहाव बढ़ा, जिसका असर नेपाल के निचले हिस्सों में दिखाई दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिब्बत की ओर से आने वाले जलप्रवाह और हिमालयी क्षेत्र में हुए प्राकृतिक बदलावों ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया। कुछ विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि बर्फीले हिस्से के टूटने या ग्लेशियर से जुड़े घटनाक्रम के कारण नदी में अचानक पानी बढ़ा हो सकता है।
नेपाल की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उसकी कई प्रमुख नदियां हिमालय और तिब्बत क्षेत्र से निकलती हैं। इसलिए वहां होने वाले प्राकृतिक बदलावों का सीधा असर नेपाल पर पड़ता है।
105 भारतीय नागरिक भी लापता
इस त्रासदी में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक शामिल हैं। कई भारतीय पर्यटक और तीर्थयात्री नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा की ओर जा रहे थे।
भारतीय एजेंसियां नेपाल प्रशासन के संपर्क में हैं और लापता नागरिकों की जानकारी जुटाई जा रही है। भारत सरकार ने नेपाल को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
कई गांव और प्रोजेक्ट हुए तबाह
बाढ़ की तेज धारा ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। सड़कों और पुलों के बह जाने से राहत कार्यों में भी परेशानी आ रही है।
कई जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की खबर है। नेपाल के लिए जलविद्युत क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इन परियोजनाओं को नुकसान आर्थिक रूप से भी बड़ा झटका माना जा रहा है।
बचाव अभियान में जुटी सेना
नेपाल सरकार ने सेना, पुलिस और आपदा राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया है। खराब मौसम और पहाड़ी रास्तों की वजह से बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
हेलीकॉप्टर और राहत दलों की मदद से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि कई इलाकों में मलबा और टूटी सड़कों के कारण राहत पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं।
क्या भारत के सीमावर्ती राज्यों पर भी असर पड़ेगा?
नेपाल से निकलने वाली कई नदियां भारत में प्रवेश करती हैं। इसलिए नेपाल में अचानक बाढ़ की स्थिति पर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी निगरानी बढ़ाई गई है।
खासकर उन इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है जहां नेपाल से आने वाली नदियों का प्रभाव ज्यादा रहता है।
हिमालयी क्षेत्र क्यों बन रहे हैं आपदा का केंद्र?
पिछले कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों में अचानक बाढ़, ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में तापमान बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। इसके कारण अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है।
नेपाल के लिए बड़ी चुनौती
यह आपदा नेपाल के सामने कई चुनौतियां लेकर आई है। एक तरफ जहां लोगों की जान बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है, वहीं दूसरी तरफ क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को फिर से खड़ा करना भी बड़ी चुनौती होगी।
भारत समेत कई पड़ोसी देश नेपाल की मदद के लिए आगे आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।