नई दिल्ली : भारत में बिकने वाली कथित पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंता सामने आई है। त्वचा को गोरा और चमकदार बनाने का दावा करने वाले ऐसे कॉस्मेटिक उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर उपभोक्ताओं को सावधान रहने की जरूरत बताई जा रही है। संबंधित क्रीम में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक तत्व पाए जाने के दावे के बाद नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। मामला सामने आने के बाद एक बार फिर बिना जांच-पड़ताल के ऑनलाइन या बाजार से खरीदे जाने वाले फेयरनेस और स्किन लाइटनिंग उत्पादों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
फेयरनेस क्रीम का बाजार भारत में काफी बड़ा है। दुकानों के अलावा सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी कई विदेशी कॉस्मेटिक उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचते हैं। इनमें से कुछ उत्पाद आकर्षक पैकेजिंग और तेजी से त्वचा का रंग हल्का करने जैसे दावों के साथ बेचे जाते हैं। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब किसी उत्पाद की सामग्री, निर्माता, आयातक, लाइसेंस या सुरक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी ग्राहक को नहीं मिलती।
स्वास्थ्य के लिए क्यों खतरनाक हो सकती हैं ऐसी क्रीम?
त्वचा विशेषज्ञ लंबे समय से बिना चिकित्सकीय सलाह के तेज असर का दावा करने वाली स्किन लाइटनिंग क्रीम के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं। कुछ अनियंत्रित या अवैध स्किन लाइटनिंग उत्पादों में पारा यानी मरकरी, शक्तिशाली स्टेरॉयड या अन्य ऐसे तत्व पाए जा सकते हैं जिनका गलत या लंबे समय तक इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मरकरी युक्त स्किन लाइटनिंग उत्पादों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर जानकारी जारी कर चुका है। ऐसे में किसी क्रीम के इस्तेमाल से पहले उसके लेबल और सामग्री की जांच बेहद जरूरी है।
हालांकि किसी खास उत्पाद को केवल उसके देश, नाम या फेयरनेस के दावे के आधार पर खतरनाक नहीं कहा जा सकता। इसके लिए अधिकृत लैब जांच और नियामक संस्था की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है।
त्वचा को हो सकता है नुकसान
बिना जानकारी के किसी स्किन क्रीम का लंबे समय तक इस्तेमाल त्वचा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। जलन, खुजली, लालिमा, मुंहासे, त्वचा का पतला होना या रंग में असमान बदलाव जैसी समस्याएं कुछ उत्पादों के गलत इस्तेमाल से हो सकती हैं।
अगर किसी क्रीम को लगाने के बाद लगातार जलन, सूजन, चकत्ते या दूसरी असामान्य समस्या दिखाई देती है तो उसका इस्तेमाल रोककर त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। केवल विज्ञापन या सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले पहले और बाद के फोटो देखकर उत्पाद खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।
पैकेजिंग और लेबल जरूर जांचें
कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदते समय ग्राहक को पैकेजिंग पर उपलब्ध जानकारी ध्यान से पढ़नी चाहिए। निर्माता और आयातक का नाम, उत्पाद की सामग्री, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी से संबंधित जानकारी जैसी चीजें देखना जरूरी है।
विदेशी उत्पाद होने की स्थिति में यह देखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि वह भारतीय बाजार में नियमों के अनुसार बेचा जा रहा है या नहीं। केवल इसलिए कि कोई क्रीम किसी लोकप्रिय ऑनलाइन विक्रेता या सोशल मीडिया पेज पर उपलब्ध है, उसे स्वतः सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए।
अगर पैकेजिंग पर जरूरी जानकारी गायब है, लेबल संदिग्ध दिखाई देता है या उत्पाद असामान्य रूप से तेज परिणाम देने का दावा करता है तो ग्राहक को सतर्क रहना चाहिए।
तुरंत गोरा करने वाले दावों से रहें सावधान
कॉस्मेटिक बाजार में ऐसे कई उत्पाद देखने को मिलते हैं जो बहुत कम समय में त्वचा को गोरा करने या रंग बदलने का दावा करते हैं। ऐसे दावों से प्रभावित होकर लोग कई बार उत्पाद की सामग्री पर ध्यान नहीं देते।
त्वचा का प्राकृतिक रंग आनुवंशिकी सहित कई कारकों से निर्धारित होता है। किसी व्यक्ति की त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने और उसके प्राकृतिक रंग को जबरन बदलने के दावे दो अलग बातें हैं। त्वचा की देखभाल के लिए सनस्क्रीन, साफ-सफाई, पर्याप्त पोषण और जरूरत के अनुसार त्वचा विशेषज्ञ की सलाह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
ऑनलाइन बिक्री ने बढ़ाई चुनौती
सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ विदेशी ब्यूटी प्रोडक्ट खरीदना आसान हुआ है। कई विक्रेता इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य डिजिटल माध्यमों से कॉस्मेटिक उत्पाद बेचते हैं। ग्राहक अक्सर किसी इन्फ्लुएंसर की वीडियो या वायरल पोस्ट देखकर उत्पाद खरीद लेते हैं।
इस तरह की खरीदारी में नकली और असली उत्पाद के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। अनधिकृत विक्रेता से खरीदे गए उत्पाद की गुणवत्ता, भंडारण और वास्तविक सामग्री को लेकर भी अनिश्चितता हो सकती है।
इसीलिए ऑनलाइन कॉस्मेटिक खरीदते समय विश्वसनीय विक्रेता चुनना और उत्पाद के बारे में उपलब्ध आधिकारिक जानकारी जांचना जरूरी है।
नोटिस जारी होने के बाद क्या होता है?
किसी उत्पाद को लेकर नियामक स्तर पर सवाल उठने या नोटिस जारी होने की स्थिति में संबंधित कंपनी, आयातक या विक्रेता से जवाब मांगा जा सकता है। जांच में उत्पाद के नमूने, सामग्री और उसके दावों की पड़ताल की जा सकती है। आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनों और जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करती है।
इस मामले में भी नोटिस की वास्तविक प्रति और संबंधित प्राधिकरण की आधिकारिक जानकारी यह स्पष्ट करने के लिए जरूरी होगी कि कार्रवाई किस उत्पाद के खिलाफ हुई, किस वजह से हुई और जांच में कौन-सा तत्व पाया गया।
ग्राहक क्या सावधानी बरतें?
फेयरनेस या स्किन लाइटनिंग क्रीम खरीदने से पहले उत्पाद का पूरा लेबल पढ़ें। निर्माता और आयातक की जानकारी देखें तथा संदिग्ध या बिना लेबल वाले कॉस्मेटिक से दूरी बनाएं। अगर किसी उत्पाद के बारे में स्वास्थ्य चेतावनी या आधिकारिक नोटिस सामने आया है तो संबंधित सरकारी विभाग की सूचना जांचने के बाद ही उसका इस्तेमाल करें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि त्वचा को गोरा करने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के शक्तिशाली क्रीम या दवाओं का इस्तेमाल न किया जाए। त्वचा संबंधी समस्या होने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
कथित पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम से जुड़ा मामला उपभोक्ताओं के लिए भी चेतावनी है कि आकर्षक विज्ञापन और तेजी से परिणाम देने वाले दावों के बजाय उत्पाद की सुरक्षा और प्रामाणिकता को प्राथमिकता दी जाए। किसी खास क्रीम को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक घोषित करने से पहले आधिकारिक लैब रिपोर्ट और नियामक आदेश की पुष्टि भी उतनी ही जरूरी है।
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