FARA दस्तावेज़ों से खुला पाकिस्तान का US में लॉबिंग अभियान, ऑपरेशन सिंदूर के बाद एफएटीएफ व्हाइटलिस्ट हासिल

Update: 2026-01-07 15:35 GMT
America अमेरिका: दाखिल एफएआरए (Foreign Agents Registration Act) दस्तावेज़ों से यह खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिकी अधिकारियों और सांसदों के सामने सक्रिय लॉबिंग की, ताकि भारत के खिलाफ अपनी सुरक्षा और आर्थिक हित सुनिश्चित किए जा सकें। ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ था। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई, जिसमें आतंकियों ने 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या की थी। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और एयरबेस पर सटीक हमले कर 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया।
एफएआरए दस्तावेज़ों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर रही लॉबिंग फर्म Square Patton Boggs ने अमेरिका को स्पष्ट किया कि भारत ने केवल सैन्य कार्रवाई को स्थगित किया है, और कभी भी इसे फिर से शुरू कर सकता है। पाकिस्तान ने इस आशंका के चलते अमेरिकी सांसदों, प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया से 50 से अधिक उच्चस्तरीय बैठकें कीं। दस्तावेज़ों से यह भी पता चलता है कि पाकिस्तान ने अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने और एफएटीएफ की व्हाइटलिस्ट हासिल करने के लिए अमेरिका में दबाव बनाया। लॉबिंग के दौरान पाकिस्तान ने यह दावा किया कि भारत युद्धविराम के लिए दबाव डाल रहा है, जबकि वास्तविकता यह थी कि भारत ने किसी भी बातचीत में मध्यस्थता नहीं मांगी। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे की पोल भी खुलती है, जिसमें उन्होंने युद्धविराम की मध्यस्थता का श्रेय अपने ऊपर लिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि एफएआरए दस्तावेज़ पाकिस्तान की दुष्प्रचार रणनीति और अमेरिकी लॉबिंग नेटवर्क को उजागर करते हैं। यह भी स्पष्ट है कि पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद अमेरिकी सहायता मांगने की कोशिश की, ताकि उसे ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव को कम करने का मौका मिले। भारत ने अपने सैन्य और कूटनीतिक कदमों के माध्यम से वैश्विक समुदाय को आश्वस्त किया कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई थी और यह सिर्फ़ आतंकवादियों और उनके ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था।
एफएआरए दस्तावेज़ इस बात का प्रमाण हैं कि पाकिस्तान ने अपनी राजनीतिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका में सक्रिय लॉबिंग अभियान चलाया। वहीं, भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं मानी। विशेषज्ञों के अनुसार यह खुलासा दिखाता है कि पाकिस्तान का विदेशी लॉबिंग नेटवर्क, एफएटीएफ और वैश्विक आर्थिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के लिए कितना प्रभावशाली था, लेकिन भारत की कार्रवाई ने इसे नाकाम कर दिया।
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