कीव : रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर संबंधी दावे ने नया कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि यह जानकारी उनके लिए नई है और उन्हें अमेरिकी पक्ष से समझौते की विस्तृत जानकारी का इंतजार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन ऊर्जा क्षेत्र में संघर्ष विराम का समर्थन कर सकता है, बशर्ते रूस भी इसका पालन करे।
ट्रंप ने क्या किया था सीजफायर का दावा?
डोनाल्ड ट्रंप ने 11 अक्टूबर 2026 को रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा क्षेत्र को लेकर संघर्ष विराम की घोषणा की। उनके अनुसार, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमति जताई थी। हालांकि, इस घोषणा के बाद समझौते की शर्तों, उसके लागू होने के समय और दोनों देशों की औपचारिक सहमति को लेकर सवाल उठे। रूस की ओर से भी इस प्रस्ताव की स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई थी। ऊर्जा क्षेत्र को लेकर यह संभावित संघर्ष विराम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में बिजली उत्पादन केंद्रों, ऊर्जा संयंत्रों और तेल-गैस से जुड़े ठिकानों पर हमले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे हमलों से बिजली आपूर्ति और दूसरी जरूरी सेवाएं प्रभावित होने का खतरा रहता है।
जेलेंस्की बोले- हमें समझौते की जानकारी दी जाए
ट्रंप की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए जेलेंस्की ने कहा कि सीजफायर की खबर उनके लिए नई है। उन्होंने कहा कि यदि ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस संबंध में कोई समझौता किया है, तो यूक्रेन को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। जेलेंस्की ने समझौते के लागू होने के समय और उसकी शर्तों के बारे में स्पष्ट जानकारी मांगी। जेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के प्रस्ताव का समर्थन करने को तैयार है, लेकिन इसके लिए रूस की ओर से भी समान कदम उठाना जरूरी होगा। यूक्रेन का रुख यह है कि संघर्ष विराम केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर उसका पालन भी होना चाहिए।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा के बाद भी समझौते की वास्तविक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं थी। यूक्रेन को औपचारिक जानकारी और रूस की ओर से स्पष्ट प्रतिबद्धता का इंतजार था।
कुछ ही घंटों बाद भी जारी रहे रूसी हमले
सीजफायर की घोषणा के बावजूद यूक्रेन में रूसी हवाई हमलों की खबरें सामने आती रहीं। जेलेंस्की ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों और खार्किव में बिजली एवं हीटिंग से जुड़े एक संयुक्त संयंत्र पर हमले का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, पिछले सप्ताह यूक्रेन के ऊर्जा उत्पादन केंद्रों पर 200 से अधिक हमले हुए थे और तेल तथा गैस से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया था।
इन घटनाओं ने संघर्ष विराम की घोषणा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी। किसी प्रस्ताव की घोषणा और उसके प्रभावी रूप से लागू होने के बीच अंतर होता है। जब तक दोनों पक्ष शर्तों पर स्पष्ट सहमति न जताएं और उसका पालन न करें, तब तक हमले पूरी तरह रुकने की पुष्टि करना मुश्किल होता है। यूक्रेन ने अपनी ओर से यह संकेत दिया कि अगर रूस अपने ऊर्जा ठिकानों पर जवाबी हमलों को रोकने के बदले यूक्रेनी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले बंद करता है, तो वह भी उसी दिशा में कदम उठाने को तैयार है।
अमेरिका की पहल पर टिकी निगाहें
इस मामले में अब अमेरिकी प्रशासन की ओर से समझौते की विस्तृत जानकारी और रूस की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। ट्रंप की घोषणा के बाद जेलेंस्की ने अमेरिका से स्पष्ट शर्तें साझा करने की अपेक्षा जताई है। वहीं, रूस की ओर से औपचारिक पुष्टि नहीं होने के कारण इस प्रस्ताव की स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है।
ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की व्यवस्था लागू होती है तो इससे बिजली उत्पादन, ऊर्जा आपूर्ति और आम नागरिकों की जरूरी सेवाओं को सुरक्षा मिल सकती है। हालांकि, केवल ऊर्जा क्षेत्र में संघर्ष विराम होने से युद्ध के दूसरे मोर्चों पर लड़ाई रुकना जरूरी नहीं है। फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि क्या रूस और यूक्रेन इस प्रस्ताव पर औपचारिक रूप से सहमत होते हैं और क्या दोनों पक्ष इसे लागू करने के लिए ठोस कदम उठाते हैं। ट्रंप के दावे के बाद जेलेंस्की की प्रतिक्रिया ने इस बात को सामने रखा है कि संघर्ष विराम के लिए स्पष्ट जानकारी, आपसी सहमति और प्रभावी पालन जरूरी है।