नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। भारतीय नौसेना और ब्रिटेन की रॉयल नेवी के बीच 17वीं 'एग्जीक्यूटिव स्टीयरिंग ग्रुप' बैठक 14 और 15 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस दो दिवसीय बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने परिचालन सहयोग, संयुक्त गतिविधियों और भविष्य की रक्षा क्षमताओं को विकसित करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में उभरती प्रौद्योगिकियों और आधुनिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।भारतीय नौसेना ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को इस बैठक की जानकारी साझा की। नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
दो देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने की बैठक
नई दिल्ली में आयोजित 17वीं भारतीय नौसेना-रॉयल नेवी एग्जीक्यूटिव स्टीयरिंग ग्रुप बैठक की संयुक्त अध्यक्षता भारतीय नौसेना के रियर एडमिरल सचिन सिकेरा और ब्रिटेन की रॉयल नेवी के मेजर जनरल पॉल मेनार्ड ने की।रियर एडमिरल सचिन सिकेरा भारतीय नौसेना में सहायक नौसेना प्रमुख (विदेशी सहयोग एवं खुफिया) के पद पर कार्यरत हैं। वहीं, मेजर जनरल पॉल मेनार्ड रॉयल नेवी में रणनीति एवं नीति निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।बैठक का प्रमुख उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन और व्यावहारिक सहयोग को अधिक प्रभावी बनाना था।
आधुनिक तकनीक और भविष्य की क्षमताओं पर चर्चा
भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि दोनों देशों ने उभरती प्रौद्योगिकियों, भविष्य की अवधारणाओं और नई क्षमताओं के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के रास्ते तलाशे हैं।बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि आधुनिक तकनीक का विकास समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक अभियानों की प्रकृति को लगातार बदल रहा है।ऐसी परिस्थितियों में नौसेनाओं के बीच तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान और परिचालन अनुभव साझा करना महत्वपूर्ण हो जाता है।दोनों देशों ने भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
परिचालन सहयोग को गहरा करने पर जोर
भारतीय नौसेना के अनुसार, इस बैठक का मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच परिचालन और पेशेवर सहयोग को मजबूत करना था।भारत और ब्रिटेन की नौसेनाएं लंबे समय से विभिन्न समुद्री गतिविधियों और संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से एक-दूसरे के साथ सहयोग करती रही हैं।इस प्रकार की बैठकों से दोनों पक्षों को अपनी प्राथमिकताओं, भविष्य की योजनाओं और सहयोग की संभावनाओं पर सीधी बातचीत करने का अवसर मिलता है।बैठक के दौरान नई तकनीकों के इस्तेमाल और बदलते समुद्री सुरक्षा वातावरण में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
आपसी सम्मान और पुराने संबंधों को बताया महत्वपूर्ण
भारतीय नौसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से स्थापित संबंध आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित हैं।नौसेना के प्रवक्ता के अनुसार, भारत और ब्रिटेन की नौसेनाएं इस मजबूत आधार पर भविष्य की तकनीक, नई अवधारणाओं और सैन्य क्षमताओं में सहयोग के अवसर तलाश रही हैं।दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच संवाद और सहयोग बनाए रखना आवश्यक है।
संयुक्त नौसैनिक अभ्यास से मजबूत हो रहे संबंध
भारत और ब्रिटेन के बीच समुद्री रक्षा सहयोग में संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।दोनों देशों की नौसेनाएं 'कोंकण' अभ्यास के माध्यम से अपनी परिचालन क्षमताओं और आपसी तालमेल को मजबूत करने का प्रयास करती रही हैं।इस वर्ष भी कोंकण-2026 अभ्यास के तहत भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल ब्रिटेन के प्लायमाउथ पहुंचा है।ऐसे अभ्यास दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने और समुद्री अभियानों में समन्वय बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।
समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए महत्वपूर्ण पहल
भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दोनों देशों के लिए समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।नई दिल्ली में आयोजित बैठक इस सहयोग को आगे बढ़ाने का एक और अवसर बनी है।हालांकि, बैठक के बाद किसी नए रक्षा समझौते या संयुक्त परियोजना की औपचारिक घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है।
भविष्य में बढ़ सकता है तकनीकी सहयोग
17वीं एग्जीक्यूटिव स्टीयरिंग ग्रुप बैठक में आधुनिक तकनीक और भविष्य की नौसैनिक क्षमताओं पर हुई चर्चा को दोनों देशों के रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष पुराने संबंधों और आपसी सम्मान के आधार पर सहयोग के नए अवसर तलाशते रहेंगे।इस बैठक से आने वाले समय में भारत और ब्रिटेन के बीच समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण, परिचालन समन्वय और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।