नेपाल : 26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बाद सरकार ने अपने शुरुआती फैसले में बदलाव किया है। नेपाल ने अब विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को पूरी तरह रोकने के बजाय भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया से सीमित और विशेष सहायता लेने की अनुमति दे दी है।

इससे पहले नेपाल सरकार का कहना था कि देश की अपनी सुरक्षा एजेंसियां, जिनमें नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और अन्य राहत दल शामिल हैं, बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं। इसी वजह से शुरुआत में विदेशी बचाव टीमों को बुलाने से इनकार किया गया था।

हिमालयी क्षेत्र में बाढ़ से भारी नुकसान

26 अगस्त को नेपाल के हिमालयी इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया। तेज बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में पानी के बढ़ते दबाव के कारण कई स्थानों पर जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ, लोग फंस गए और राहत एवं बचाव कार्यों में मुश्किलें सामने आईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने राहत अभियान को और मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता पर विचार किया।

पहले विदेशी टीमों को बुलाने से किया था इनकार

नेपाल सरकार ने शुरुआत में कहा था कि देश की सुरक्षा एजेंसियां आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त सक्षम हैं। नेपाली सेना और पुलिस के जवान पहले से ही राहत और बचाव अभियान में जुटे हुए थे।

सरकार ने 2015 में आए विनाशकारी भूकंप का उदाहरण देते हुए कहा था कि उस समय बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमों के पहुंचने से समन्वय और लॉजिस्टिक्स को लेकर कई चुनौतियां पैदा हुई थीं।

इसी अनुभव को देखते हुए नेपाल ने शुरुआत में सीमित स्तर पर ही बाहरी सहायता लेने का फैसला किया था।

अब चार देशों से मिलेगी विशेष मदद

बाढ़ की स्थिति और बचाव अभियान की जरूरतों को देखते हुए नेपाल ने अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया से विशेष सहायता लेने की अनुमति दी है।

यह सहायता सीमित क्षेत्रों और विशेष जरूरतों के आधार पर ली जाएगी। इसका उद्देश्य राहत कार्यों को तेज करना और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाना है।

भारत से सहयोग की उम्मीद

नेपाल और भारत के बीच मजबूत पड़ोसी संबंध हैं। आपदा के समय दोनों देशों के बीच सहयोग का लंबा इतिहास रहा है।

भारत पहले भी नेपाल में आए भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में मदद कर चुका है। इस बार भी भारत की विशेषज्ञ टीमों और संसाधनों से नेपाल के राहत अभियान को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बचाव अभियान में बढ़ रही चुनौतियां

नेपाल के पहाड़ी इलाकों में राहत और बचाव कार्य आसान नहीं है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति, खराब मौसम और प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाई के कारण बचाव दलों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे में विशेष तकनीक और अनुभव रखने वाली अंतरराष्ट्रीय टीमें अभियान को तेज करने में मददगार साबित हो सकती हैं।

समन्वय के साथ चलेगा राहत अभियान

नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशी सहायता को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य राहत कार्यों में तेजी लाना है, लेकिन साथ ही स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

सरकार चाहती है कि बाहरी सहायता और घरेलू संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाई जाए।

आपदा प्रबंधन को लेकर बढ़ी चर्चा

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते जोखिम को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन जैसी घटनाएं भविष्य में और चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

ऐसी परिस्थितियों में बेहतर आपदा तैयारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी हो जाता है।

प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाना प्राथमिकता

फिलहाल नेपाल सरकार का मुख्य लक्ष्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, राहत सामग्री पहुंचाना और सामान्य स्थिति बहाल करना है।

विदेशी विशेषज्ञ टीमों की सीमित मदद मिलने से बचाव अभियान को गति मिलने की उम्मीद है। नेपाल का बदला हुआ फैसला यह दिखाता है कि गंभीर आपदा की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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