Pakistan के विलय वाले जिलों में लड़कियों की शिक्षा पर संकट, खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी बनी बड़ी बाधा

Update: 2026-07-28 11:18 GMT

Peshawar : 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' (TET) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के 'मर्ज्ड डिस्ट्रिक्ट्स' (मिलाए गए ज़िलों) में रहने वाली लड़कियों को खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी, सीमित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक-सांस्कृतिक पाबंदियों के कारण शिक्षा में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे भरोसेमंद इंटरनेट न होने से डिजिटल अंतर (digital divide) बढ़ गया है, खासकर खैबर-पख्तूनख्वा के दूर-दराज इलाकों में पढ़ाई करने वाली छात्राओं के लिए।

TET की रिपोर्ट के मुताबिक, कुर्रम ज़िले की 16 साल की खदीजा बीबी गर्मियों की छुट्टियों में हर सुबह मोबाइल नेटवर्क सिग्नल की तलाश में पास की पहाड़ी पर चढ़ती हैं। फोन ऊपर उठाकर पथरीली ढलान पर खड़े रहना उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है, जिससे उन्हें कमज़ोर इंटरनेट कनेक्शन मिलने पर भी लेक्चर नोट्स डाउनलोड करने, असाइनमेंट जमा करने और ऑनलाइन क्लास में शामिल होने में मदद मिलती है।

खदीजा ने TET को बताया, "हम ऐसे इलाके में रहते हैं जहाँ अभी भी भरोसेमंद इंटरनेट सिग्नल नहीं है।" "हम अक्सर ऑनलाइन क्लास नहीं ले पाते और समय पर असाइनमेंट जमा नहीं कर पाते।" बेनज़ीर विमेन यूनिवर्सिटी पेशावर में BS कंप्यूटर साइंस की छात्रा खदीजा ने कहा कि खराब इंटरनेट उनकी पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बन गया है।

उन्होंने कहा, "दुनिया 5G टेक्नोलॉजी की बात कर रही है, लेकिन हम अभी भी बुनियादी इंटरनेट सेवाओं से भी वंचित हैं। इससे हमारी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है और हमारे भविष्य के मौके सीमित हो रहे हैं।"

TET के अनुसार, खदीजा का अनुभव खैबर-पख्तूनख्वा के मर्ज्ड डिस्ट्रिक्ट्स में हज़ारों लड़कियों की स्थिति को दर्शाता है, जहाँ गरीबी, असुरक्षा और अपर्याप्त शैक्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी भी शिक्षा के लिए एक और बाधा बनकर उभरी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय लोगों और शिक्षा के लिए काम करने वालों का कहना है कि मर्ज्ड डिस्ट्रिक्ट्स के कई स्कूलों में या तो कंप्यूटर लैब काम नहीं कर रही हैं या फिर कंप्यूटर लैब तो हैं, लेकिन उनमें कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा नहीं है।

इस क्षेत्र में पाकिस्तान के सबसे कमज़ोर शैक्षिक आंकड़े भी दर्ज किए जा रहे हैं। बेनज़ीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम (BISP) के आंकड़ों का हवाला देते हुए, TET ने बताया कि स्कूल न जाने वाले बच्चों का अनुपात उत्तरी वज़ीरिस्तान में 66 प्रतिशत, बाजोर में 63 प्रतिशत, दक्षिणी वज़ीरिस्तान में 61 प्रतिशत, मोहमंद और खैबर में 51-51 प्रतिशत और कुर्रम और ओरकज़ई में 47-47 प्रतिशत है। रिपोर्ट में 'खैबर-पख्तूनख्वा महिला सशक्तिकरण नीति 2026-2030' का भी ज़िक्र किया गया है, जिसके अनुसार इन इलाकों में सिर्फ़ 11 प्रतिशत महिलाओं की इंटरनेट तक पहुँच है, जबकि यहाँ महिला साक्षरता दर सिर्फ़ 17 प्रतिशत है।

TET के अनुसार, 'ब्लू वेन्स' के प्रोग्राम मैनेजर और पाकिस्तान के लिए 'मलाला फंड एजुकेशन चैंपियन' कमर नसीम ने कहा कि भले ही पाकिस्तान ने डिजिटल जेंडर गैप (डिजिटल क्षेत्र में महिला-पुरुष के बीच अंतर) को कम करने में प्रगति की है, लेकिन दूर-दराज के इलाकों में महिलाएँ और लड़कियाँ अभी भी डिजिटल अवसरों से वंचित हैं।

नसीम ने बताया कि इन इलाकों में लड़कियों को खराब टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर, भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी और स्मार्टफोन तक सीमित पहुँच के कारण डिजिटल सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। जिन इलाकों में नेटवर्क कवरेज उपलब्ध है, वहाँ भी कई लड़कियों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, वे इंटरनेट पैकेज का खर्च नहीं उठा सकतीं और अक्सर ऑनलाइन शैक्षिक संसाधनों तक पहुँचने के लिए दूसरों के डिवाइस पर निर्भर रहती हैं।

उन्होंने TET को यह भी बताया कि खैबर-पख्तूनख्वा के कई हिस्सों, खासकर इन इलाकों में, लड़कियों द्वारा मोबाइल फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल को अक्सर शक की नज़र से देखा जाता है। उनके अनुसार, परिवार अक्सर ऑनलाइन सुरक्षा, सामाजिक दबाव और मौजूदा सांस्कृतिक रीति-रिवाजों को लेकर चिंताओं के कारण उन पर पाबंदियाँ लगाते हैं।

रिपोर्ट में नसीम के हवाले से यह भी कहा गया है कि मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली 35 प्रतिशत महिलाएँ इंटरनेट-सक्षम फोन के लिए दूसरों पर निर्भर रहती हैं, जबकि पुरुषों के मामले में यह आँकड़ा सिर्फ़ 6 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह अंतर महिलाओं की ऑनलाइन शिक्षा में भाग लेने और डिजिटल कौशल हासिल करने की क्षमता को काफी सीमित करता है, जबकि सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएँ इस खाई को और गहरा करती हैं।

TET के अनुसार, वर्ल्ड बैंक की डिजिटल समावेशन सलाहकार करिश्मा ज़कीउल्लाह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं की आवाजाही (मोबिलिटी) में भी सुधार होना चाहिए। उन्होंने शैक्षिक संस्थानों, प्रशिक्षण केंद्रों और रोज़गार के अवसरों तक पहुँच बेहतर बनाने के लिए इन इलाकों में 'बस रैपिड ट्रांजिट' (BRT) सेवाओं का विस्तार करने का सुझाव दिया।

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