ब्रासीलिया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) परियोजनाओं को बिजली उपलब्ध कराने के लिए अमेरिका और पराग्वे के बीच हुए समझौते पर ब्राजील ने समीक्षा शुरू कर दी है। ब्राजील सरकार असुनसियोन स्थित अपने दूतावास से इस समझौते से जुड़े दस्तावेजों का आकलन करा रही है। इसके बाद ही सरकार इस मामले पर आधिकारिक रुख तय करेगी। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इताइपु जलविद्युत संयंत्र ब्राजील और पराग्वे की साझा परियोजना है और दोनों देशों के ऊर्जा हित इससे जुड़े हैं।रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की कंपनी क्रूसो (Crusoe) और पराग्वे की कंपनी अराइको (Araico) ने AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए रणनीतिक साझेदारी की है। इस परियोजना में इताइपु बांध से मिलने वाली जलविद्युत ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाना है। अमेरिका के विदेश विभाग ने 21 अक्टूबर 2026 को इस साझेदारी की घोषणा की थी। इसके बाद ब्राजील में साझा ऊर्जा संसाधनों के इस्तेमाल और दोनों देशों के हितों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है अमेरिका और पराग्वे की साझेदारी?
इस परियोजना का उद्देश्य पराग्वे में उच्च क्षमता वाला AI कंप्यूटिंग केंद्र स्थापित करना है। इसके लिए अमेरिकी कंपनी क्रूसो और पराग्वे की अराइको मिलकर काम करेंगी। इस केंद्र में AI मॉडल को प्रशिक्षित करने, डेटा संसाधित करने और क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।क्रूसो के मुताबिक, परियोजना का शुरुआती चरण 2027 के मध्य तक शुरू करने की योजना है। भविष्य में इसकी IT क्षमता 106 मेगावाट तक पहुंचाने और लंबे समय में लगभग 280 मेगावाट तक विस्तार करने का विकल्प रखा गया है। यह केंद्र अमेरिकी क्लाउड ग्राहकों के साथ लैटिन अमेरिका की बढ़ती मांग को भी पूरा करेगा।परियोजना को इताइपु जलविद्युत संयंत्र के पास विकसित करने की योजना है, ताकि उसे बड़े पैमाने पर बिजली उपलब्ध कराई जा सके। हालांकि, अमेरिकी घोषणा में बिजली की अंतिम कीमत, कुल निवेश राशि और आपूर्ति अनुबंध की पूरी शर्तों का खुलासा नहीं किया गया था। इसलिए साझेदारी की घोषणा और बिजली की वास्तविक आपूर्ति के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
ब्राजील को क्यों है चिंता?
इताइपु दुनिया के प्रमुख जलविद्युत संयंत्रों में शामिल है। यह ब्राजील और पराग्वे के बीच साझा परियोजना है, जिसका संचालन दोनों देश मिलकर करते हैं। 1973 की द्विपक्षीय संधि के तहत संयंत्र से उत्पादित बिजली में दोनों देशों का 50-50 प्रतिशत अधिकार है। इसी वजह से इताइपु से जुड़ी ऊर्जा के इस्तेमाल और वितरण का सवाल दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।ब्राजील की चिंता इस बात को लेकर है कि पराग्वे की ओर उपलब्ध बिजली का इस्तेमाल बड़े AI डेटा केंद्रों में किए जाने से क्षेत्रीय ऊर्जा व्यवस्था और भविष्य में बिजली की उपलब्धता पर क्या असर पड़ेगा। AI केंद्रों को लगातार और बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। ऐसे में बिजली की कीमत, आपूर्ति की शर्तें और घरेलू जरूरतों के साथ उसका संतुलन महत्वपूर्ण मुद्दे बन जाते हैं।हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी यह नहीं बताती कि इस साझेदारी से ब्राजील के हिस्से की बिजली में कोई कटौती की गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका-पराग्वे समझौते से ब्राजील की बिजली सीधे छीन ली गई है।
पराग्वे के लिए निवेश और तकनीक का अवसर
पराग्वे के लिए यह परियोजना विदेशी निवेश आकर्षित करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का अवसर है। देश की जलविद्युत क्षमता को AI और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों से जोड़कर नई कारोबारी गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं।अमेरिकी अधिकारियों ने इस साझेदारी को पराग्वे में बड़े निजी निवेश की संभावनाओं से जोड़ा है। वहीं, परियोजना को लेकर बिजली की दरों, सरकारी ऊर्जा कंपनी एएनडीई (ANDE) के साथ अनुबंध और दीर्घकालीन आपूर्ति की शर्तों पर भी सवाल उठ रहे हैं। पराग्वे के एक समाचार संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना के लिए बिजली आपूर्ति से जुड़े अनुबंध की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अब आगे क्या होगा?
ब्राजील सरकार फिलहाल अपने दूतावास के आकलन का इंतजार कर रही है। इसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकार समझौते को लेकर क्या रुख अपनाती है और क्या इस मामले में पराग्वे के साथ कूटनीतिक चर्चा की जरूरत महसूस की जाती है।फिलहाल यह मामला AI उद्योग के विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच संतुलन से जुड़ा है। आने वाले समय में बिजली आपूर्ति की शर्तें और दोनों पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया इस परियोजना की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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