Bengaluru बेंगलुरु: कर्नाटक में 17 अप्रैल को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में होने वाली विशेष कैबिनेट बैठक में जातिगत जनगणना रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी। इस रिपोर्ट को लेकर विभिन्न समुदायों में असंतोष और विरोध सामने आया है। वोक्कालिगा समुदाय के संगठन अध्यक्ष बी. केंचप्पा गौड़ा ने रिपोर्ट को पूरी तरह से गलत बताया और कहा कि यह 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार की गई है, जो अब अप्रासंगिक है।
जगदिका लिंगायत महासभा के महासचिव और पूर्व IAS अधिकारी एस.एम. जमदार ने इसे अवैध बताते हुए कहा कि भारत में केवल केंद्र सरकार को जनगणना कराने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस राज्य-स्तरीय सर्वे में 25-30% आबादी को शामिल नहीं किया गया, जिससे इसके आंकड़े त्रुटिपूर्ण हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने अपने बच्चों को आरक्षण दिलाने के लिए जाति में हेरफेर की है। लिंगायत समुदाय के प्रमुख स्वामीजी ने कहा कि वे सार्वजनिक सिफारिशों का इंतजार करेंगे।
यह सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण कुल 50 खंडों में फैला है और इस पर 165 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। डेटा प्रबंधन के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ 43 करोड़ रुपये का करार किया गया है। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।