नई दिल्ली: एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन लोगों, पूंजी और रणनीतिक टेक्नोलॉजी के आने-जाने पर नियंत्रण बढ़ा रहा है। 15 सितंबर से लागू होने वाले नए नियमों के तहत अधिकारियों को उन नागरिकों को देश छोड़ने से रोकने का अधिकार होगा, जिनके मामले में औद्योगिक और तकनीकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
'नेपाल आज़ा' (Nepal Aaja) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम बीजिंग की उन कोशिशों का विस्तार है, जिनका मकसद संवेदनशील टेक्नोलॉजी, डेटा और टैलेंट को विदेश जाने से रोकना है।
ये नए उपाय ऐसे समय में किए गए हैं जब बीजिंग में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और कुशल कर्मचारियों के विदेशी बाजारों में चले जाने को लेकर चिंता बढ़ रही है। मेटा (Meta) द्वारा चीनी AI स्टार्टअप 'मैनस' (Manus) के प्रस्तावित 2 अरब डॉलर के अधिग्रहण में सरकार का दखल, चीनी AI क्षमताओं के विदेश जाने के प्रति बढ़ते संवेदनशील रवैये का एक बड़ा उदाहरण है। चीन ने अप्रैल में इस सौदे को रोक दिया था और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर इसे रद्द करने का आदेश दिया था।
नए नियमों के तहत, अगर चीनी नागरिक टेक्नोलॉजी के आयात या निर्यात से जुड़े नियंत्रणों का उल्लंघन करते हैं, जिससे औद्योगिक या तकनीकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है, तो उन्हें देश छोड़ने से रोका जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जो लोग विदेश में ऐसे अपराध करते हैं जिनसे चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा या हितों को नुकसान पहुंचता है, उन्हें देश लौटने के बाद छह महीने से तीन साल तक देश छोड़ने पर रोक का सामना करना पड़ सकता है।
ये प्रतिबंध बीजिंग की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद पूंजी और रणनीतिक संपत्तियों को चीन से बाहर जाने से रोकना है। चीनी अधिकारी लंबे समय से देश से बाहर जाने वाली पूंजी पर नियंत्रण बनाए हुए हैं, जिसमें व्यक्तियों के लिए सालाना 50,000 डॉलर की विदेशी मुद्रा खरीद की सीमा भी शामिल है। हाल ही में, रेगुलेटर्स ने विदेशी निवेश की जांच-पड़ताल तेज कर दी है क्योंकि विदेशी संपत्तियों के लिए चीनी निवेशकों की मांग बढ़ी है।
चीन के बाहरी वित्तीय प्रवाह के पैमाने ने भी इन चिंताओं को बढ़ाया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कंपनियों, व्यक्तियों और सरकारी कर्जदाताओं ने 2025 में देश के रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष (trade surplus) से काफी विदेशी संपत्तियां जमा कीं, जिसमें से अधिकांश पैसा विदेशी प्रतिभूतियों (securities) और व्यावसायिक निवेश में चला गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल चीन का व्यापार अधिशेष लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया था।
साथ ही, बीजिंग ने विदेशी निवेश पर निगरानी भी कड़ी कर दी है। जून में चीन की स्टेट काउंसिल द्वारा जारी नियमों में निवेशकों को विदेशी निवेश के जरिए प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी, जानकारी (know-how), डेटा और अन्य नियंत्रित वस्तुओं या सेवाओं का निर्यात करने से रोका गया है। इन नियमों में जुर्माना, वीजा प्रतिबंध और इंडस्ट्री ब्लैकलिस्टिंग जैसी सजा का भी प्रावधान है।