जकार्ता। इंडोनेशिया में एक बार फिर ज्वालामुखी ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। देश के प्रसिद्ध **अनाक क्राकाटोआ (Anak Krakatau) ज्वालामुखी** में जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे आसमान में राख का विशाल गुबार फैल गया। महज करीब **30 सेकंड तक चले विस्फोट** के बाद राख का धुआं करीब **50 हजार फीट (लगभग 15 किलोमीटर)** की ऊंचाई तक पहुंच गया। घटना के बाद इलाके में अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
अनाक क्राकाटोआ के इस विस्फोट ने आसपास के इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। ज्वालामुखी से निकली राख ने हवाई यातायात को प्रभावित किया और कई उड़ानों पर असर पड़ा। अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
अचानक फटा ज्वालामुखी और आसमान में छा गया राख का बादल
रिपोर्ट के अनुसार, अनाक क्राकाटोआ में यह विस्फोट रविवार तड़के हुआ। ज्वालामुखी से निकलती राख और धुएं का गुबार तेजी से ऊपर उठा और आसपास के क्षेत्रों में फैल गया। निगरानी एजेंसियों के मुताबिक, राख का फैलाव इंडोनेशिया के पश्चिमी हिस्सों तक देखा गया।
ज्वालामुखी के फटने के बाद सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो सामने आए, जिनमें आसमान में उठता हुआ काला धुआं और राख का विशाल बादल दिखाई दिया।
हवाई सेवाओं पर पड़ा बड़ा असर
ज्वालामुखी से निकली राख के कारण विमान संचालन प्रभावित हुआ। इंडोनेशिया के जकार्ता स्थित **सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे** समेत कई एयरपोर्ट पर उड़ानों को रोकना पड़ा। सैकड़ों उड़ानों पर इसका असर पड़ा और हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वालामुखीय राख विमानों के इंजन और उड़ान सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इसी वजह से एहतियात के तौर पर उड़ानों को रोका गया।
स्कूल और मछली पकड़ने की गतिविधियां भी प्रभावित
ज्वालामुखी की राख गिरने के कारण कुछ इलाकों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने लोगों को मास्क पहनने और बाहर निकलने से बचने की सलाह दी।
कुछ क्षेत्रों में स्कूल गतिविधियों और मछली पकड़ने के काम पर भी असर पड़ा। अधिकारियों ने राख से बचाव के लिए सावधानी बरतने को कहा है।
अभी तक कोई मौत या बड़े नुकसान की खबर नहीं
राहत की बात यह है कि इस विस्फोट में अब तक किसी मौत या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। प्रशासन ने किसी बड़े पैमाने पर निकासी का आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन लोगों को ज्वालामुखी के आसपास जाने से रोक दिया गया है।
विशेषज्ञ लगातार ज्वालामुखी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि अनाक क्राकाटोआ का इतिहास काफी खतरनाक रहा है।
2018 में भी मचा चुका है भारी तबाही
अनाक क्राकाटोआ वही ज्वालामुखी है, जिसने साल 2018 में भीषण तबाही मचाई थी। उस समय ज्वालामुखी के हिस्से के समुद्र में गिरने से सुनामी पैदा हुई थी, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
इसी वजह से जब भी इस ज्वालामुखी में गतिविधि बढ़ती है तो वैज्ञानिक और प्रशासन विशेष सतर्कता बरतते हैं।
इंडोनेशिया में क्यों फटते हैं इतने ज्वालामुखी?
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे ज्यादा ज्वालामुखीय गतिविधि वाले देशों में शामिल है। यह क्षेत्र **‘रिंग ऑफ फायर’** में आता है, जहां धरती की टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं होती रहती हैं।
देश में 120 से ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं, जिसके कारण यहां रहने वाले लोगों को हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के बीच रहना पड़ता है।
प्रशासन की नजर आगे की गतिविधियों पर
फिलहाल इंडोनेशियाई अधिकारी अनाक क्राकाटोआ की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में ज्वालामुखी की गतिविधि के आधार पर खतरे का स्तर तय किया जाएगा।