प्राग। चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में आयोजित 30वें फोरम 2000 सम्मेलन में तिब्बत की धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के प्रमुख पेनपा त्सेरिंग ने चीन पर तिब्बती संस्कृति को कमजोर करने, बौद्ध धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करने और पर्यावरण संबंधी नीतियों से क्षेत्रीय जल सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप लगाए।सीटीए की रिपोर्ट के अनुसार, त्सेरिंग ने सम्मेलन के दौरान तिब्बती समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बत की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्वतंत्रता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने का आग्रह किया।
प्राग सम्मेलन में तिब्बत का मुद्दा उठाया
प्राग कांग्रेस सेंटर में 12 अक्टूबर को आयोजित सम्मेलन के दूसरे दिन पेनपा त्सेरिंग ने शुरुआती पूर्ण सत्र में हिस्सा लिया।इसके बाद उन्होंने 'वाक्लाव हावेल का कमजोरों का साहस' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लिया। इस दौरान लोकतंत्र, मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।त्सेरिंग ने जर्मनी की संसद बुंडेस्टाग के सदस्य रोडेरिच कीसेवेटर और जापान की प्रतिनिधि सभा के सदस्य युया मिनेशिमा के साथ अलग-अलग बैठकें भी कीं।इन मुलाकातों में तिब्बत की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संबंधी चिंताओं पर चर्चा हुई।
तिब्बती संस्कृति को कमजोर करने का आरोप
पेनपा त्सेरिंग ने चीन की जातीय एकता संबंधी नीतियों और बोर्डिंग स्कूलों की व्यवस्था की आलोचना की।उन्होंने आरोप लगाया कि इन नीतियों के जरिए तिब्बत की नई पीढ़ी को अपनी भाषा, सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक पहचान से दूर किया जा रहा है।त्सेरिंग के अनुसार, तिब्बती बच्चों को बोर्डिंग स्कूलों में शिक्षा देने की व्यवस्था उनकी पारंपरिक पहचान को प्रभावित कर सकती है।उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे कदमों का दीर्घकालिक असर तिब्बती समाज की सांस्कृतिक निरंतरता पर पड़ सकता है।
दलाई लामा के पुनर्जन्म पर चीन को चुनौती
तिब्बती नेता ने दलाई लामा के अगले उत्तराधिकारी के चयन से संबंधित चीन के दावों पर भी सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया तिब्बती बौद्ध धर्म की धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है।त्सेरिंग ने सवाल किया कि धार्मिक आस्था को स्वीकार नहीं करने वाली राजनीतिक व्यवस्था बौद्ध धर्म की आध्यात्मिक उत्तराधिकार प्रक्रिया को कैसे नियंत्रित कर सकती है।उन्होंने कहा कि इस विषय में धार्मिक परंपराओं और तिब्बती समुदाय की मान्यताओं का सम्मान किया जाना चाहिए।चीन की सरकार दलाई लामा के उत्तराधिकार की प्रक्रिया पर अपना अधिकार जताती रही है, जबकि तिब्बती नेतृत्व इसका विरोध करता है।
चीनी बांधों से जल सुरक्षा को खतरे की आशंका
सम्मेलन के दौरान त्सेरिंग ने तिब्बती पठार पर चीन की बांध निर्माण परियोजनाओं और पर्यावरण संबंधी नीतियों को लेकर भी चिंता जताई।उन्होंने तिब्बत को 'एशिया का जल मीनार' बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र की नदियां एशिया के विभिन्न देशों में रहने वाली बड़ी आबादी के लिए महत्वपूर्ण हैं।त्सेरिंग ने आरोप लगाया कि चीन जल प्रवाह और अन्य जलविज्ञान संबंधी आंकड़ों को पर्याप्त रूप से साझा नहीं कर उनके अनुसार, इससे नदियों के निचले क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की जल उपलब्धता, कृषि और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।हालांकि, इन परियोजनाओं के वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन वैज्ञानिक आंकड़ों और विस्तृत अध्ययन के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
पश्चिमी देशों को आर्थिक निर्भरता पर चेतावनी
पेनपा त्सेरिंग ने पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों को चीन पर अत्यधिक आर्थिक निर्भरता से बचने की सलाह भी दी।उन्होंने आशंका जताई कि बीजिंग अपनी निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण की तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने का प्रयास कर सकता है।त्सेरिंग के अनुसार, लोकतांत्रिक देशों को व्यापारिक संबंधों के साथ मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए।उन्होंने तिब्बत की स्थिति को केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय विषय बताया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिब्बत की आवाज
फोरम 2000 सम्मेलन लोकतंत्र, मानवाधिकार और वैश्विक चुनौतियों पर संवाद का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है।इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के राजनीतिक प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक समाज से जुड़े लोग भाग लेते हैं।पेनपा त्सेरिंग ने सम्मेलन के जरिए तिब्बत से संबंधित मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने रखा। उन्होंने तिब्बती समुदाय की पहचान और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।फिलहाल तिब्बती प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों पर चीन की ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।
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