Zwolle, ज़्वोल्ले : बलूच नेशनल मूवमेंट ( बीएनएम ) नीदरलैंड चैप्टर ने रविवार को बलूचिस्तान में चल रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर करने के लिए ज़्वोल्ले में एक फोटो प्रदर्शनी और जागरूकता अभियान का आयोजन किया । प्रदर्शनी में बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा जबरन गायब किए जाने, न्यायेतर हत्याओं और अन्य कथित अत्याचारों को दर्शाने वाली तस्वीरों की एक श्रृंखला प्रदर्शित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य डच जनता और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को क्षेत्र की स्थिति के बारे में सूचित करना था।
बीएनएम कार्यकर्ताओं ने निवासियों के साथ मिलकर पर्चे, ब्रोशर और अन्य सूचनात्मक सामग्री वितरित की। उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि कैसे पाकिस्तान के सरकारी संस्थान बलूच लोगों की आवाज़ दबा रहे हैं और उन्हें बुनियादी मानवाधिकारों और स्वतंत्रता से वंचित कर रहे हैं। स्थानीय लोगों और विभिन्न पृष्ठभूमियों से आये आगंतुकों ने प्रदर्शनी में रुचि दिखाई और बलूचिस्तान में चल रहे संकट के बारे में बीएनएम प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की । ज़्वोल्ले में जागरूकता अभियान के अलावा, बीएनएम ने 1998 में बलूचिस्तान के चगाई जिले में पाकिस्तान द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण की वर्षगांठ मनाने के लिए 28 मई, 2025 को हेग में एक रैली और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की।
आयोजकों के अनुसार, रैली दोपहर 12:30 बजे हेग सेंट्रल स्टेशन से शुरू होगी और पाकिस्तान दूतावास तक जाएगी । इस प्रदर्शन का उद्देश्य परमाणु परीक्षणों के कारण होने वाले पर्यावरण विनाश और मानवीय पीड़ा की ओर ध्यान आकर्षित करना है। बीएनएम ने आम जनता, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और बलूच समर्थकों से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और बलूचिस्तान के लोगों के साथ एकजुटता दिखाने का आग्रह किया । समूह ने न्याय, जवाबदेही और बलूच राष्ट्र के अधिकारों और सम्मान के लिए अपनी मांग दोहराई।
इस बीच, पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर फरहतुल्लाह बाबर ने बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलूच या उनके संगठन को बिना सबूत या मुकदमे के "आतंकवादी" करार देने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने ऐसे बयानों को "बेहद समस्याग्रस्त" बताया और चेतावनी दी कि ये "उल्टा पड़ सकता है।" बाबर ने शुक्रवार को इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (डीजी आईएसपीआर) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जवाब में यह टिप्पणी की। सैन्य प्रवक्ता ने महरंग बलूच की आलोचना की थी, उन्हें "आतंकवादी नेटवर्क" से जोड़ा था और मीडिया आउटलेट्स से बीवाईसी के "भयावह चेहरे" को उजागर करने का आह्वान किया था।
महरंग बलोच ने भी जेल से रिहा होकर अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक बयान जारी कर आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने सेना के आरोपों को "निराधार" बताया और कहा कि यह बलूचिस्तान में आवाज़ों को दबाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है । (एएनआई)