नई दिल्ली/फिजी। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को फिजी में आयोजित UNFCCC प्री-COP31 बैठक में वैश्विक समुदाय से जलवायु कार्रवाई में मौजूद कमियों को दूर करने, पहले से किए गए वादों को पूरा करने और पेरिस समझौते के क्रियान्वयन में तेजी लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले COP31 की सफलता का आकलन केवल नए लक्ष्यों या घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस परिणामों से किया जाना चाहिए।
भूपेंद्र यादव ने COP31 की प्राथमिकताओं पर आयोजित पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य पहले ही संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन और पेरिस समझौते के तहत तय किए जा चुके हैं। इनमें वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य भी शामिल है। उन्होंने कहा कि अब सबसे बड़ी जरूरत इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आवश्यक संसाधनों, तकनीक और वित्तीय सहयोग को प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने की है।
यादव ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित UNFCCC प्री-COP31 बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह बैठक 5 से 8 अक्टूबर तक फिजी में आयोजित की जा रही है और इसका उद्देश्य नवंबर में होने वाले COP31 से पहले प्रमुख जलवायु मुद्दों पर सहमति और संवाद को आगे बढ़ाना है। प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए समुद्र के बढ़ते स्तर, चरम मौसम और जलवायु वित्त इस बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल हैं।
अपने संबोधन की शुरुआत में भूपेंद्र यादव ने तुवालु के लोगों के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि तुवालु के लोग जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का बहादुरी से सामना कर रहे हैं और उन्होंने दुनिया के सामने एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है। यादव ने कहा कि तुवालु के प्रयास इस बात का भरोसा देते हैं कि सामूहिक इच्छाशक्ति और सहयोग से जलवायु संकट जैसी बड़ी चुनौती से भी निपटा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जलवायु कार्रवाई में केवल वित्तीय या तकनीकी अंतर ही नहीं, बल्कि समझ और क्रियान्वयन के स्तर पर भी कई खाइयां मौजूद हैं। विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान, नीतियों और जमीनी जरूरतों तथा उपलब्ध संसाधनों और वास्तविक मांगों के बीच अंतर को पहचानना जरूरी है। उनके मुताबिक, इन अंतरालों को दूर किए बिना वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्रभावी रूप से हासिल करना कठिन होगा।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि COP31 का जोर नए घोषणापत्र तैयार करने के बजाय पहले से मौजूद समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने पर होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जलवायु वित्त और तकनीकी सहायता उन देशों तथा समुदायों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। भारत का मानना है कि यदि पहले से मौजूद सफल मॉडलों को पर्याप्त संसाधन और समर्थन मिले तो जलवायु कार्रवाई की गति को काफी तेज किया जा सकता है।
इससे पहले प्री-COP31 बैठक में भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अनुकूलन, उत्सर्जन में कमी और क्रियान्वयन के साधनों को समान महत्व देने की बात भी कही थी। यादव ने कहा था कि सभी देशों पर एक जैसा मॉडल लागू नहीं किया जा सकता। अलग-अलग देशों की विकास जरूरतों, क्षमताओं और ऐतिहासिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए जलवायु नीति तैयार की जानी चाहिए। भारत ने समानता और ‘कॉमन बट डिफरेंशिएटेड रिस्पॉन्सिबिलिटीज एंड रिस्पेक्टिव कैपेबिलिटीज’ के सिद्धांतों को बनाए रखने पर भी जोर दिया।
भारत ने प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ तटीय सुरक्षा और अंतरिक्ष आधारित तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने की इच्छा भी जताई है। समुद्र के बढ़ते स्तर और तटीय क्षरण से जूझ रहे छोटे द्वीपीय देशों के लिए ऐसी तकनीकें महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। भारत का कहना है कि जलवायु संकट का सामना करने के लिए विकासशील देशों के बीच तकनीकी सहयोग को बढ़ाना भी वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा होना चाहिए।
फिजी में आयोजित प्री-COP31 बैठक में 50 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। प्रशांत देशों ने इस मंच पर वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने, समुद्री पारिस्थितिकी की रक्षा करने और जलवायु वित्त बढ़ाने की जरूरत को प्रमुखता से उठाया है। इन देशों का कहना है कि समुद्र के बढ़ते स्तर और बदलते मौसम का असर उनकी आबादी पर सीधे दिखाई दे रहा है।
जलवायु वित्त भी बैठक का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। प्रशांत देशों की ओर से बनाए गए ‘पैसिफिक रेजिलिएंस फैसिलिटी’ के लिए नई आर्थिक प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं, हालांकि मौजूदा राशि अभी भी निर्धारित लक्ष्य से काफी कम है। इस कोष का उद्देश्य छोटे द्वीपीय देशों को जलवायु अनुकूलन और बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिए सीधे संसाधन उपलब्ध कराना है।
भूपेंद्र यादव के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए घोषणाओं और महत्वाकांक्षी लक्ष्यों से आगे बढ़कर उन्हें जमीन पर लागू करने की जरूरत है। भारत ने कहा कि COP31 तभी सार्थक होगा, जब मौजूदा प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन में तेजी आए, जरूरतमंद देशों तक वास्तविक सहयोग पहुंचे और प्रभावी समाधानों को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए।
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