वर्ल्ड | बांग्लादेश में इस साल राष्ट्रीय दिवस के मौके पर सैन्य परेड आयोजित नहीं की जाएगी, जिससे देश में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह निर्णय तख्तापलट की अफवाहों के बीच सामने आया है, जिससे देश की राजनीति में एक नई हलचल पैदा हो गई है। विपक्षी नेता यूनुस ने प्रधानमंत्री शेख हसीना पर तीखा हमला करते हुए इस कदम को "देश के लोकतंत्र के लिए खतरे" के रूप में देखा है।
हाल के दिनों में बांग्लादेश में तख्तापलट की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं, जिससे सरकार की सुरक्षा और सत्ता पर पकड़ को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि शेख हसीना की सरकार लगातार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और सेना का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है। सैन्य परेड को रद्द करने के इस फैसले ने इन अफवाहों को और हवा दी है।
यूनुस का हमला और विपक्ष की प्रतिक्रिया
यूनुस ने कहा, "यह कदम इस बात का संकेत है कि हसीना सरकार अपने सशस्त्र बलों के खिलाफ विश्वास खो चुकी है और इस तरह के कदम से देश में अस्थिरता पैदा हो सकती है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए सेना को अप्रत्यक्ष रूप से दबाव में डाल रही है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि सैन्य परेड का रद्द होना, सरकार के अंदर की राजनीति में खटास का संकेत है।
इस फैसले के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि यह बांग्लादेश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक सैन्य परेड आमतौर पर किसी देश की सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रतीक होती है, और जब इसे रद्द किया जाता है, तो यह संकेत देता है कि देश में कुछ गलत हो सकता है। इसके साथ ही, राजनीतिक हिंसा और असहमति की संभावना को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।
आगे की स्थिति
बांग्लादेश की राजनीति में यह संकट और गहरा सकता है, क्योंकि प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व पर बढ़ते सवालों के बीच विपक्षी दलों ने सड़कों पर उतरने की धमकी दी है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या हसीना सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाती है या देश और भी गहरे राजनीतिक संकट में फंसता है।