वॉशिंगटन: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान को लेकर सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं फिर बढ़ गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई है। ट्रंप ने बातचीत की पुष्टि करते हुए बताया कि इसमें ईरान का मुद्दा शामिल था। हालांकि, उन्होंने चर्चा का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। फिलहाल दोनों नेताओं के बीच हमले की किसी अंतिम ‘डील’ की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। 
मीडिया रिपोर्टों में बातचीत के दौरान सैन्य कार्रवाई के समय और कूटनीतिक प्रयासों को लेकर अलग-अलग प्राथमिकताएं सामने आने का दावा किया गया है। चैनल 12 की रिपोर्ट के हवाले से टाइम्स ऑफ इजरायल ने बताया कि नेतन्याहू अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य अभियान शुरू करने के पक्ष में हैं। दूसरी ओर, ट्रंप फिलहाल तेहरान के साथ बातचीत को अधिक समय देना चाहते हैं। यह विवरण बातचीत से परिचित सूत्रों पर आधारित है। 
इसीलिए पूरे घटनाक्रम को किसी तय समझौते या हमले की अंतिम मंजूरी के रूप में पेश करना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध रिपोर्टों से इतना स्पष्ट होता है कि सैन्य विकल्प पर चर्चा जारी है, लेकिन कूटनीतिक रास्ता भी खुला रखा गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक, ट्रंप ने आगे हमले करने का फैसला नहीं लिया है और वह कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं। 
इससे पहले 22 अक्टूबर को एबीसी न्यूज ने दो इजरायली सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान पर संयुक्त हमले दोबारा शुरू करने की योजनाएं तैयार की हैं। रिपोर्ट में संभावित कार्रवाई का समय अमेरिकी चुनाव के बाद बताया गया था। सूत्रों ने इसके पीछे चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में तेल बाजार में और अस्थिरता पैदा करने से ट्रंप की हिचक का उल्लेख किया था। हालांकि, सैन्य योजना तैयार होने और उसे लागू करने की मंजूरी मिलने में अंतर है। अमेरिका मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। संभावित सैन्य योजनाओं पर सवाल के जवाब में प्रशासन के एक अधिकारी ने संवेदनशील तैयारियों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। पेंटागन ने भी टिप्पणी नहीं की। इससे चुनाव के बाद की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है; चुनाव से पहले कार्रवाई नहीं करने का बयान, चुनाव के तुरंत बाद हमले की घोषणा नहीं है।  कूटनीतिक स्तर पर कतर की मध्यस्थता में प्रयास जारी रहने की खबरें भी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कतरी मध्यस्थ ईरानी अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं और अमेरिकी पक्ष के साथ भी समन्वय कर रहे हैं। नेतन्याहू की कथित चिंता यह है कि लंबी बातचीत से ईरान पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, इस बातचीत से जुड़ी रिपोर्ट पर व्हाइट हाउस और इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने टिप्पणी करने से इनकार किया है। 
एनपीआर ने भी अक्टूबर में एक जानकार सूत्र के हवाले से संभावित हमले की तैयारियों की जानकारी दी थी। उसी रिपोर्ट में यह संभावना रखी गई थी कि सैन्य तैयारी ईरान को कूटनीतिक समझौते के लिए दबाव में लाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। ऐसे में क्षेत्र में सैन्य क्षमता बढ़ाने को केवल आसन्न हमले का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। ईरान की ओर से भी बातचीत और जवाबी कार्रवाई, दोनों को लेकर संदेश दिए गए हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि उनका देश कूटनीति और युद्ध, दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार है। ईरानी सरकारी मीडिया ने एक सुरक्षा सूत्र के हवाले से चेतावनी दी थी कि अधिकारियों या नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला होने की स्थिति में क्षेत्र में अमेरिकी हितों तथा युद्ध में शामिल देशों की संपत्तियों को निशाना बनाया जा सकता है। यह संभावित जवाबी कार्रवाई की चेतावनी है। 
अब नजर अमेरिकी चुनाव के बाद ट्रंप प्रशासन के आधिकारिक रुख और मध्यस्थता के प्रयासों पर है। हमले की संभावना पर कई रिपोर्टें मौजूद हैं, लेकिन कार्रवाई की निश्चित तारीख, अंतिम आदेश या ट्रंप-नेतन्याहू के बीच किसी घोषित सैन्य समझौते की पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए मौजूदा स्थिति को सैन्य विकल्प की तैयारी और जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच अनिश्चित दौर के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।
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