लंदन, आइएएनएस। विज्ञानियों ने एक ऐसी तकनीक को विकसित किया है, जिससे भविष्य में इंसानों जैसे संवेदनशील रोबोट बनाने में मदद मिलेगी। दरअसल, यूनिवर्सिटी आफ ग्लासगो ने एक ऐसी ई-त्वचा विकसित की है, जो दर्द को महसूस कर सकती है। शोधकर्ताओं की इस टीम में एक भारतीय मूल के विज्ञानी भी हैं।
इस टीम ने कृत्रिम त्वचा को एक नए प्रकार की प्रणाली के साथ विकसित किया है, जो असिनेप्टिक प्रणाली पर आधारित है। यह प्रणाली सीखने के लिए मस्तिक के तंत्रिका मार्गो का उपयोग करती है। इलेक्ट्रानिक स्किन डाटा एकत्र करेगा और आगे प्रोसिस करने के लिए कम्प्यूटर को भेजेगा।
जर्नल साइंस रोबोटिक्स के मुताबिक, नई स्किन में त्वचा में निर्मित एक सर्किट एक कृत्रिम सिनैप्स के रूप में कार्य करता है, जो वोल्टेज को एक साधारण स्पाइक में कम करता है।
टीम ने उस वोल्टेज स्पाइक के अलग-अलग आउटपुट का इस्तेमाल त्वचा को नकली दर्द के लिए उपयुक्त प्रतिक्रिया सिखाने के लिए किया, जो प्रतिक्रिया करने के लिए रोबोट के हाथ को ट्रिगर करेगा।
यूनिवर्सिटी जेम्स वाट स्कूल आफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर रवींद्र दहिया ने कहा, हम इस प्रक्रिया के माध्यम से जो बनाने में सक्षम हैं, वो ई-त्वचा है। यह हार्डवेयर के जरिये सीखने में सक्षम हैं और जिसे कुछ भी करने से पहले संदेश को आगे और पीछे, कहीं भी भेजने की आवश्यकता नहीं होती। इसके अलावा, यह आवश्यक गणना की मात्रा को कम करके स्पर्श का जवाब बहुत तेजी से देती है।
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