अफगानिस्तान की पहली महिला मेयर जरीफा गफारी स्विट्जरलैंड में बस सकती हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, तालिबान के नियंत्रण में आने के बाद पिछले महीने काबुल से भागी राजनीतिक कार्यकर्ता के लिए एक विशेष परमिट दिलाने की कोशिश की जा रही है। स्विस मीडिया ने बताया कि गफरी कई सांसदों के सामने अपने मामले की पैरवी करने के लिए बर्न की यात्रा पर जाने वाली हैं। अफगानिस्तान के नए शासकों के बारे में स्थानीय मीडिया के साथ एक साक्षात्कार में 29 वर्षीय मयदान शहर की मेयर गफरी ने कहा कि यह मेरी सरकार नहीं है।

तालिबान के प्रवक्ता ने मंगलवार को अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात की नई सरकार के मंत्रियों की एक सूची जारी की, जिसमें हजारा अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य समेत सभी पुरुष ही हैं। इसमें एक भी महिला को शामिल नहीं किया गया है। इसके साथ ही महिला मंत्रालय का भी नाम बदल दिया गया है। गफरी ने आगे कहा कि दशकों से हिंसा की सबसे बड़ी शिकार महिलाएं रही हैं, लेकिन हम 20 साल पहले की महिलाएं नहीं हैं। तालिबान आधे देश के बिना शासन नहीं कर पाएगा।
कुछ हफ्ते पहले पाकिस्तान के रास्ते जर्मनी पहुंचने के बाद से गफरी ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में अफगान महिलाओं के अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। जिनेवा स्थित वर्ल्ड आर्गनाइजेशन अगेंस्ट टार्चर (OMCT) सहित संयुक्त राष्ट्र और गैर सरकारी संगठनों ने तालिबान के एक महीने पहले सत्ता में आने के बाद से मानवाधिकारों के उल्लंघन की निंदा की है। इस्लामी अमीरात के वादों के बावजूद महिलाओं के अधिकारों, विशेष रूप से शिक्षा में कटौती की गई है।
पूर्व मेयर की सक्रियता भी जल्द ही स्विट्जरलैंड से अधिक स्थायी हो सकती है। जर्मनी ने जरीफा गफारी को शरणार्थी का दर्जा दिया है, लेकिन वह काम करने और स्वतंत्र रूप से बोलने में सक्षम होना चाहती है। गुरुवार को, वह कई सांसदों के सामने अपने मामले की पैरवी करने के लिए अपने स्विस दल के साथ बर्न जा रही हैं।


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