Afghanistan : खुनी सत्ता संघर्ष, हक्कानी का नेतृत्व चाहता है पाकिस्तान
वहीं अमेरिका के वरिष्ठ सैन्य जनरल मार्क मिले ने अफगानिस्तान में गृह युद्ध छिड़ने की आशंका जताई है।
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के तीन हफ्ते बाद भी नई सरकार के गठन की घोषणा नहीं हो सकी है। सरकार में हिस्सेदारी को लेकर तालिबान के विभिन्न धड़ों के बीच संघर्ष छिड़ गया है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि शुक्रवार को तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के बीच गोलीबारी तक हो गई। इसमें तालिबान के सह-संस्थापक और भावी सरकार के मुखिया बताए जा रहे मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के घायल होने की बात भी कही गई थी। हालांकि तालिबान की तरफ से इस पर कोई बयान नहीं आया है। वहीं, बरादर ने रविवार को काबुल में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात भी की।
बीच बचाव करने पहुंचे आइएस प्रमुख
समाचार एजेंसी आइएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकी संगठनों में सत्ता के लिए चल रहे संघर्ष में बीच बचाव करने के लिए ही पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आइएसआइ प्रमुख फैज हामिद काबुल पहुंचे हैं।हालांकि पाकिस्तानी मीडिया का दावा है कि तालिबान के निमंत्रण पर ही वह काबुल पहुंचे हैं।
तालिबान में भी पड़ी फूट
वहीं पेंटागन के पूर्व अधिकारी रहे सुरक्षा मामलों के विशेष माइकल रुबिन के मुताबिक हक्कानी नेटवर्क समेत तालिबान के विभिन्न धड़ों ने हिबातुल्ला अखुंदजादा को अपना नेता मानने से भी इन्कार कर दिया है। जबकि, तालिबान ने दो दिन पहले ही कहा था कि अखुंदजादा इस्लामिक अमीरात के सर्वोच्च नेता होंगे और उनके मातहत ही नई सरकार काम करेगी।
आसान नहीं होगा मतभेद सुलझाना
माइकल रुबिन ने यह भी कहा कि इन मतभेदों को सुलझाना आइएसआइ प्रमुख के लिए भी आसान नहीं होगा, क्योंकि क्वेटा शूरा हक्कानी नेटवर्क से अलग है। बता दें कि हक्कानी नेटवर्क नार्दर्न तालिबान से अलग है। वहीं अमेरिका के वरिष्ठ सैन्य जनरल मार्क मिले ने अफगानिस्तान में गृह युद्ध छिड़ने की आशंका जताई है।