Islamabad इस्लामाबाद: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में पाकिस्तान के संघीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने को मंजूरी दे दी। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कैबिनेट ने आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत टीएलपी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला पंजाब सरकार द्वारा इस धार्मिक समूह को गैरकानूनी
घोषित करने के प्रस्ताव के बाद लिया है।
यह फैसला गुरुवार को इस्लामाबाद में कानून-व्यवस्था और टीएलपी की हालिया गतिविधियों की समीक्षा के लिए आयोजित कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक के दौरान, कैबिनेट सदस्यों को टीएलपी पर प्रतिबंध लगाने की पंजाब सरकार की सिफारिश से अवगत कराया गया। पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्रालय ने टीएलपी की गतिविधियों के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की और बाद में आवश्यक कानूनी कदम उठाने के लिए औपचारिक निर्देश जारी किए।
बैठक के दौरान, कैबिनेट सदस्यों ने पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति की भी समीक्षा की और अफगानिस्तान के साथ हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते के बाद के घटनाक्रमों पर चर्चा की। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान के साथ हुए समझौते के बारे में जानकारी साझा की।
पिछले हफ़्ते, पंजाब सरकार ने संघीय सरकार से टीएलपी पर प्रतिबंध लगाने की सिफ़ारिश की थी, जिसके गाज़ा मार्च को 13 अक्टूबर को मुरीदके में अधिकारियों ने बलपूर्वक तितर-बितर कर दिया था। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ की अध्यक्षता में हुई बैठक में फ़ैसला लिया गया कि पुलिसकर्मियों की मौत और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने में शामिल टीएलपी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर आतंकवाद-रोधी अदालतों (एटीसी) में मुकदमा चलाया जाएगा।
पंजाब पुलिस ने दावा किया कि टीएलपी प्रदर्शनकारियों ने मुरीदके में हिंसा की, जिसमें एक थाना प्रभारी (एसएचओ) की मौत हो गई। झड़पों में 48 पुलिसकर्मी और रेंजर्स के जवान घायल हुए, जिनमें से 17 गोलीबारी में घायल हुए। तीन टीएलपी कार्यकर्ता और एक राहगीर भी मारे गए, जबकि कम से कम 30 लोग घायल हुए।
टीएलपी ने फ़िलिस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अमेरिकी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन करने हेतु इस्लामाबाद तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी। टीएलपी पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान के सबसे प्रमुख धार्मिक-राजनीतिक आंदोलनों में से एक है। टीएलपी के संस्थापक खादिम हुसैन रिज़वी ने पाकिस्तान के ईशनिंदा क़ानूनों की रक्षा के मुख्य उद्देश्य से इस पार्टी का गठन किया था।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं और सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए मुरीदके में छह घंटे तक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ हुईं। टीएलपी ने कई कार्यकर्ताओं की मौत का दावा किया। हिंसा को देखते हुए, बैठक में टीएलपी नेतृत्व को आतंकवाद विरोधी अधिनियम (एटीए), 1997 की चौथी अनुसूची के तहत रखने का निर्णय लिया गया।
अब टीएलपी की संपत्तियों और परिसंपत्तियों को औकाफ विभाग को सौंपने और उसके पोस्टरों, बैनरों और विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, टीएलपी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाएँगे और उसके सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कर दिए जाएँगे। लाउडस्पीकर अधिनियम के उल्लंघन की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Tags: