काठमांडू। नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 579 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में देरी हो रही है। इसके चलते कई इलाकों में शव तेजी से सड़ने लगे हैं और उनसे निकल रही दुर्गंध ने स्वास्थ्य संकट की आशंका बढ़ा दी है।
प्रभावित क्षेत्रों में अब महामारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शवों की पहचान, सुरक्षित निपटान और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना बनी हुई है।
पहचान नहीं होने से अंतिम संस्कार में परेशानी
अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के बाद बरामद हुए कई शवों की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। परिवारों के अपने प्रियजनों की तलाश में लगे होने के कारण प्रशासन भी पहचान प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रहा है।
लेकिन लगातार बढ़ते तापमान और खराब परिस्थितियों के कारण शवों के सड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है। कई प्रभावित इलाकों में दुर्गंध फैलने लगी है, जिससे स्थानीय लोगों और राहतकर्मियों के लिए भी परेशानी बढ़ गई है।
प्रशासन का कहना है कि शवों का जल्द से जल्द सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार करना जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी खतरे को कम किया जा सके।
नेपाल सरकार का बड़ा फैसला
बढ़ते स्वास्थ्य खतरे को देखते हुए नेपाल सरकार ने बिना पहचान वाले शवों का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया है। अधिकारियों ने बताया कि जिन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उनका अंतिम संस्कार निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
सरकार ने यह भी फैसला किया है कि प्रत्येक अज्ञात शव का डीएनए नमूना सुरक्षित रखा जाएगा। इससे भविष्य में यदि कोई परिवार अपने लापता सदस्य की पहचान करना चाहे तो डीएनए जांच के माध्यम से सहायता मिल सकेगी।
यह कदम मानवीय और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राहत और बचाव अभियान जारी
फ्लैश फ्लड से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी हैं। सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार मलबे और प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं।
कई स्थानों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद बचाव दल प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
बाढ़ के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए नेपाल के स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को आशंका है कि लंबे समय तक पड़े शवों और दूषित पानी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के बाद साफ पानी की कमी, गंदगी और सड़ते जैविक पदार्थों के कारण डायरिया, त्वचा संक्रमण और अन्य बीमारियां फैल सकती हैं।
इसलिए प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
परिवार कर रहे अपनों की तलाश
बाढ़ में लापता हुए लोगों के परिजन अब भी अपने प्रियजनों की तलाश में जुटे हुए हैं। कई परिवार राहत शिविरों और अस्पतालों में जाकर जानकारी जुटा रहे हैं।
प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि कई शवों की हालत खराब होने के कारण उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में डीएनए नमूने सुरक्षित रखना भविष्य में परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिली मदद
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मदद की पेशकश की है। राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और बचाव उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
नेपाल सरकार का कहना है कि इस कठिन समय में प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना और संक्रमण के खतरे को नियंत्रित करना है।
बड़ी चुनौती बनी आपदा के बाद की स्थिति
फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल अब दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ हजारों प्रभावित लोगों के पुनर्वास और राहत की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर शवों के निपटान और स्वास्थ्य संकट को रोकना भी जरूरी है।
सरकार और राहत एजेंसियां स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हैं। बिना पहचान वाले शवों के डीएनए नमूने सुरक्षित रखने और उनका अंतिम संस्कार करने का फैसला आपदा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फिलहाल नेपाल में राहत अभियान जारी है और प्रशासन की कोशिश है कि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल की जा सके।