Washington वॉशिंगटन: कांग्रेसनल बजट ऑफिस के अनुसार, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान पर पेंटागन का जुलाई तक लगभग 38 अरब डॉलर खर्च हुआ और हर महीने 2 से 3 अरब डॉलर और खर्च हो सकते हैं। इस निष्पक्ष एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी कि इस संघर्ष के कारण मिसाइल-डिफेंस स्टॉक कम हो गए हैं, ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई भी बढ़ी है। CBO ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' से जुड़े ऑपरेशनल, लॉजिस्टिकल और आर्थिक खर्चों की जांच की, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था।
इसका शुरुआती चरण 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने तक चला। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों पर हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 जुलाई को युद्धविराम खत्म होने की घोषणा की। 38 अरब डॉलर के अनुमान में मिसाइल और अन्य हथियारों को बदलने के लिए 21.7 अरब डॉलर शामिल हैं। इसमें अतिरिक्त उड़ान घंटों के लिए 10.4 अरब डॉलर, सैन्य ईंधन की अधिक लागत के लिए 2.7 अरब डॉलर, लड़ाई में खोए उपकरणों के लिए 1.9 अरब डॉलर और अन्य ऑपरेशनल खर्चों के लिए 1.5 अरब डॉलर भी शामिल हैं। इस्तेमाल किए गए हथियारों को बदलना सबसे बड़ा खर्च था। कुल खर्च में मिसाइल-डिफेंस इंटरसेप्टर के लिए 13.1 अरब डॉलर और ज़मीन पर हमला करने वाली क्रूज़ मिसाइलों के लिए 7.3 अरब डॉलर शामिल थे।
इस अनुमान में ईरानी हमलों से क्षतिग्रस्त अमेरिकी सैन्य सुविधाओं की मरम्मत या पुनर्निर्माण की लागत शामिल नहीं है। इसमें राजनयिक अभियान, विदेशी सहायता और घायल सैनिकों व पूर्व सैनिकों के लिए चिकित्सा देखभाल और विकलांगता मुआवजे की दीर्घकालिक लागत भी शामिल नहीं है। CBO ने कहा कि पेंटागन ने मांगी गई जानकारी नहीं दी। इसके बजाय एजेंसी ने सरकारी डेटाबेस और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों पर भरोसा किया, जिससे इसके निष्कर्षों में "काफी अनिश्चितता" बनी हुई है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका ने जून 2025 से अपने मिसाइल-डिफेंस इंटरसेप्टर स्टॉक का आधा से दो-तिहाई हिस्सा इस्तेमाल कर लिया होगा। CBO ने कहा, "हालांकि DoD (रक्षा विभाग) अपने पास मौजूद हथियारों की संख्या का खुलासा नहीं करता है, लेकिन मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर पर बताए गए खर्च और DoD द्वारा अब तक खरीदे गए कुल नंबरों की तुलना से पता चलता है कि अमेरिका ने जून 2025 से उन हथियारों के अपने स्टॉक का आधा से दो-तिहाई हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है।" स्टॉक को फिर से बनाने में कम से कम पांच साल लग सकते हैं, भले ही पेंटागन खरीद की गति बढ़ा दे। रिपोर्ट में कहा गया है, "अगर किसी ऐसे दुश्मन से टकराव होता है जिसके पास बड़ी संख्या में बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलें हैं, तो यह कमी बहुत बड़ी समस्या बन सकती है।"
CBO ने खास तौर पर चीन का ज़िक्र किया, जिसके पास ऐसे हथियार हैं जो ताइवान से जुड़े किसी भी सैन्य टकराव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इस टकराव की वजह से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई और लाल सागर (Red Sea) से होने वाली शिपिंग भी बाधित हुई है। CBO ने कहा कि इसके चलते ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिससे 2026 की दूसरी तिमाही में सालाना महंगाई दर में 2.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई। एजेंसी का अनुमान है कि 2027 की पहली तिमाही में महंगाई दर, युद्ध से पहले किए गए अनुमान के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक ज़्यादा होगी। महंगाई बढ़ने से अमेरिकी ट्रेज़री सिक्योरिटीज़ पर ब्याज दरें भी बढ़ने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जुलाई में कांग्रेस को बताया था कि ईरान के खिलाफ़ अभियानों पर सितंबर तक 37.5 अरब डॉलर का खर्च आएगा। व्हाइट हाउस ने 87.6 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है, जिसमें पेंटागन के लिए 67.1 अरब डॉलर शामिल हैं। CBO ने कहा कि पेंटागन की मांग का लगभग 42.3 अरब डॉलर का हिस्सा सीधे तौर पर इस टकराव से जुड़ा हुआ लगता है।