Sarvam Edge: बिना इंटरनेट के AI सुविधा फोन और लैपटॉप पर उपलब्ध

Update: 2026-02-19 12:27 GMT
Technology टेक्नोलॉजी: भारत की AI कंपनी Sarvam AI ने Sarvam Edge नाम से नया ऑन डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पेश किया है। कंपनी के मुताबिक यह सिस्टम स्मार्टफोन और लैपटॉप पर सीधे रन करता है और इसे क्लाउड सर्वर या इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं होती। Sarvam AI का कहना है कि इसका मकसद AI को तेज, ज्यादा प्राइवेट और रोजमर्रा के डिवाइस पर आसानी से इस्तेमाल करने लायक बनाना है।
कंपनी के अनुसार Sarvam Edge इस सोच पर आधारित है कि आज के मॉडर्न डिवाइस में इतना कंप्यूटिंग पावर मौजूद है कि वे एडवांस मॉडल्स को लोकली हैंडल कर सकें। इनफेरेंस को डिवाइस पर शिफ्ट करने से नेटवर्क डिले खत्म होता है, कमजोर कनेक्टिविटी की समस्या नहीं आती और यूजर डेटा पूरी तरह ऑफलाइन रहता है। इससे डेटा प्राइवेसी मजबूत करने का दावा किया गया है।
Sarvam AI में मल्टीलिंगुअल स्पीच रिकग्निशन, स्पीच सिंथेसिस और ट्रांसलेशन मॉडल शामिल हैं, जिन्हें खास तौर पर एज डिप्लॉयमेंट के लिए डिजाइन किया गया है। प्लेटफॉर्म का कहना है कि एक सिंगल स्पीच रिकग्निशन मॉडल 10 प्रमुख भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है और ऑटोमैटिक लैंग्वेज डिटेक्शन फीचर के साथ आता है, जिससे यूजर को भाषा चुनने की जरूरत नहीं पड़ती।
टेक्स्ट टू स्पीच सिस्टम भी इन्हीं भाषाओं में काम करता है और एक कॉम्पैक्ट यूनिफाइड मॉडल पर आधारित है। वहीं ट्रांसलेशन सिस्टम 11 भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिनमें अंग्रेजी भी शामिल है, और 110 लैंग्वेज पेयर्स में टू डायरेक्शनल ट्रांसलेशन संभव बताया गया है। कंपनी का कहना है कि ये सभी फीचर्स बिना क्लाउड कनेक्टिविटी के काम करते हैं।
Sarvam AI के अनुसार लोकल प्रोसेसिंग से प्रति क्वेरी लागत खत्म हो जाती है और कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों में भी परफॉर्मेंस स्थिर रहती है। कंपनी का दावा है कि रियल टाइम ट्रांसक्रिप्शन लाइव ऑडियो से भी तेज प्रोसेस कर सकता है, जबकि ट्रांसलेशन लगभग तुरंत रिजल्ट देता है, जिससे इंटरैक्टिव एप्लिकेशन में उपयोग संभव है।
कंपनी ने यह भी कहा कि Sarvam Edge मॉडल्स को मौजूदा मोबाइल प्रोसेसर और लैपटॉप हार्डवेयर के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है, जिससे बिना विशेष हार्डवेयर या ज्यादा स्टोरेज के फुल ऑफलाइन AI फंक्शनलिटी मिल सके। Sarvam AI का मानना है कि यह प्लेटफॉर्म वॉइस ड्रिवन ऐप्स, रियल टाइम ट्रांसलेशन टूल्स, असिस्टिव टेक्नोलॉजी और एजुकेशन, फाइनेंस व प्रोडक्टिविटी जैसे सेक्टर्स में नए उपयोग के रास्ते खोल सकता है।
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