कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली बॉक्सर्स की प्रेरणादायक कहानी
कॉमनवेल्थ गोल्ड के पीछे की मेहनत और सोच का खुलासा
भारतीय महिला बॉक्सिंग की स्टार खिलाड़ी जैस्मिन लंबोरिया और अरुंधति चौधरी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के अपने लक्ष्य और तैयारी को लेकर अपनी सोच साझा की है। दोनों मुक्केबाजों का कहना है कि बड़े टूर्नामेंट में सफलता के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक मजबूती भी बेहद जरूरी होती है।
जैस्मिन लंबोरिया ने कहा कि किसी भी बड़े मुकाबले में आत्मविश्वास और दबाव को संभालने की क्षमता खिलाड़ी को आगे ले जाती है। उनका फोकस हर मुकाबले को गंभीरता से लेने और अपनी रणनीति के अनुसार प्रदर्शन करने पर है। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने के सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।
वहीं अरुंधति चौधरी का मानना है कि सफलता के लिए निरंतर मेहनत और खुद पर भरोसा सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि खेल में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और सही तैयारी से खिलाड़ी अपनी वापसी कर सकता है।
दोनों खिलाड़ियों ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंच पर मुकाबला सिर्फ विरोधी खिलाड़ी से नहीं बल्कि खुद की उम्मीदों और दबाव से भी होता है। इसलिए वे तकनीक, फिटनेस और मानसिक तैयारी पर बराबर ध्यान दे रही हैं।
भारतीय बॉक्सिंग में जैस्मिन और अरुंधति से बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं। दोनों का लक्ष्य सिर्फ प्रतियोगिता में हिस्सा लेना नहीं बल्कि पोडियम के सबसे ऊंचे स्थान पर पहुंचकर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।
उनकी मेहनत और सकारात्मक सोच आने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय दल को इन दोनों मुक्केबाजों से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है।