नई दिल्ली। भारत में पहली बार आयोजित हो रही BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में जहां घरेलू खिलाड़ियों को दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है और खेल के प्रति देश का उत्साह दिखाई दे रहा है, वहीं कुछ खिलाड़ियों के लिए यह टूर्नामेंट भावनाओं और संघर्ष की एक अलग कहानी भी लेकर आया है। यूक्रेन की बैडमिंटन खिलाड़ी पोलिना बुह्रोवा और येवहेनिया कान्तेमिर के लिए यह मंच केवल खेल का नहीं, बल्कि अपने संघर्षों और मुश्किल दौर को याद करने का भी अवसर है।

दोनों खिलाड़ी करीब चार साल से अपने घर नहीं लौट पाई हैं। रूस के बड़े हमले ने उनके जीवन, परिवार और खेल करियर को गहरा प्रभावित किया। युद्ध की परिस्थितियों के कारण उन्हें यूक्रेन छोड़ना पड़ा और तब से वे लगातार अपने देश से दूर रहकर खेल और जीवन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

दुनिया के अलग-अलग देशों में यात्रा करना खिलाड़ियों के जीवन का हिस्सा होता है। टूर्नामेंट के लिए विदेश जाना, नए माहौल में रहना और लगातार यात्रा करना खेल करियर का सामान्य हिस्सा माना जाता है। लेकिन बुह्रोवा और कान्तेमिर के लिए घर से दूरी किसी पेशेवर मजबूरी से ज्यादा युद्ध की देन है।

खारकीव की रहने वाली पोलिना बुह्रोवा ने युद्ध के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि किस तरह उनके लिए सामान्य जिंदगी अचानक बदल गई थी। उन्होंने कहा कि हमले की शुरुआत के समय वह यूक्रेन में ही थीं और उस दौरान ट्रेनिंग करना बेहद मुश्किल हो गया था।

बुह्रोवा ने बताया कि उन्हें कई बार एयर-रेड अलर्ट के बीच अपनी प्रैक्टिस रोकनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग के दौरान अचानक सायरन बजता था और खिलाड़ियों को तुरंत कोर्ट छोड़कर सुरक्षित जगहों या अंडरग्राउंड शेल्टर की ओर जाना पड़ता था।

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, “मैं बमबारी के बीच प्रैक्टिस कर रही थी। बस एक अलार्म बजता था और आपको सब कुछ छोड़कर शेल्टर या अंडरग्राउंड जगह की ओर भागना पड़ता था।” उनके इस बयान से उस भयावह स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है, जिसमें उन्होंने खेल जारी रखने की कोशिश की।

युद्ध के बीच खेल पर ध्यान केंद्रित करना उनके लिए आसान नहीं था। जहां आम खिलाड़ी प्रतियोगिता और प्रदर्शन को लेकर दबाव महसूस करते हैं, वहीं यूक्रेनी खिलाड़ियों के सामने सुरक्षा और भविष्य की चिंता भी थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने खेल को जारी रखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूक्रेन का प्रतिनिधित्व करती रहीं।

बुह्रोवा और कान्तेमिर के लिए बैडमिंटन केवल करियर नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में उम्मीद बनाए रखने का माध्यम भी रहा है। उन्होंने खेल के जरिए खुद को मजबूत बनाए रखा और दुनिया के अलग-अलग टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया।

BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े मंच पर खेलना उनके लिए खास अनुभव है। हालांकि, भारत में उन्हें मिले समर्थन और माहौल ने उन्हें प्रभावित किया है। उन्होंने माना कि खेल लोगों को जोड़ने का काम करता है और ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को अपनी कहानियां साझा करने का अवसर देते हैं।

यूक्रेनी खिलाड़ियों की कहानी यह भी दिखाती है कि खेल केवल जीत और हार तक सीमित नहीं होता। कई खिलाड़ी अपने साथ व्यक्तिगत संघर्ष, भावनाएं और चुनौतियां लेकर मैदान पर उतरते हैं। उनके लिए हर मुकाबला केवल पदक जीतने की कोशिश नहीं, बल्कि अपने हौसले को साबित करने का मौका होता है।

युद्ध के कारण लाखों यूक्रेनी नागरिकों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। खिलाड़ियों के लिए भी यह स्थिति बेहद कठिन रही है। उन्हें प्रशिक्षण की जगह, यात्रा, मानसिक दबाव और परिवार से दूरी जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

इसके बावजूद बुह्रोवा और कान्तेमिर ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने देश का प्रतिनिधित्व जारी रखा और खेल के जरिए यूक्रेन की पहचान को दुनिया के सामने बनाए रखा।

भारत में आयोजित BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप उनके लिए एक और अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां वे अपने खेल के साथ-साथ अपनी संघर्ष की कहानी भी लेकर आई हैं। दर्शकों के उत्साह और खेल भावना के बीच उनकी मौजूदगी यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और उम्मीद को जिंदा रखा जा सकता है।

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