नई दिल्ली। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को भारत की बिना हाथों वाली स्टार तीरंदाज शीतल देवी ने अद्भुत प्रदर्शन करते हुए दो घंटे से भी कम समय में दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने पहले तोमन कुमार के साथ मिलकर कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया और इसके कुछ देर बाद महिला व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ शीतल ने एक बार फिर दुनिया को अपनी प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और मानसिक मजबूती का परिचय दिया। वहीं एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदकों की झड़ी लगा दी। गुरुवार के मुकाबलों के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 88 हो गई, जिनमें 21 स्वर्ण, 26 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल हैं।
तोमन कुमार के साथ मिलकर जीता पहला स्वर्ण
शीतल देवी ने गुरुवार को अपने शानदार अभियान की शुरुआत कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा से की।इस मुकाबले में उन्होंने भारतीय तीरंदाज तोमन कुमार के साथ जोड़ी बनाई। फाइनल में भारतीय टीम का सामना इंडोनेशिया के तेओदोरा ऑडी आयुदिया फेरेली और केन स्वागुमिलांग की जोड़ी से हुआ।
मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। दोनों टीमों ने शुरुआत से ही शानदार निशाने लगाए और एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी।हालांकि, महत्वपूर्ण मौकों पर शीतल और तोमन ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए इंडोनेशियाई जोड़ी को 151-148 के अंतर से हरा दिया।इस जीत के साथ भारतीय जोड़ी ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया और एशियाई पैरा खेलों में अपना खिताब बरकरार रखा।
दो घंटे के भीतर दूसरा गोल्ड जीतकर रचा इतिहास
मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के बाद शीतल देवी के सामने एक और बड़ी चुनौती थी।उन्हें महिला व्यक्तिगत कंपाउंड तीरंदाजी के फाइनल में सिंगापुर की अनुभवी खिलाड़ी नूर स्याहिदाह अलीम से मुकाबला करना था।शीतल ने बिना थके एक बार फिर मैदान में उतरकर शानदार निशानेबाजी की।फाइनल मुकाबले में उन्होंने सिंगापुर की खिलाड़ी को 142-139 से हराकर दूसरा स्वर्ण पदक जीत लिया।इस तरह दो घंटे से भी कम समय में शीतल देवी ने दो अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया।
चार अंकों से पिछड़ने के बाद की शानदार वापसी
महिला व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा का फाइनल शीतल देवी के लिए आसान नहीं था।
पहले दौर के बाद दोनों खिलाड़ियों का स्कोर 29-29 से बराबर था। लेकिन दूसरे दौर में सिंगापुर की नूर स्याहिदाह अलीम ने बढ़त बना ली।दूसरे दौर के अंत में शीतल 55-59 से पीछे चल रही थीं। ऐसे में उनके सामने चार अंकों की कमी पूरी करने की चुनौती थी।इसके बाद भारतीय तीरंदाज ने शानदार वापसी करते हुए लगातार छह बार दस अंक हासिल किए।तीसरे दौर के बाद स्कोर 85-86 हो गया। चौथे दौर में शीतल ने एक बार फिर बेहतरीन प्रदर्शन किया और 115-113 की बढ़त बना ली।आखिरी दौर में उन्होंने दबाव के बावजूद संयम बनाए रखा और 142-139 से जीत हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
शीतल देवी ने तीन पदकों के साथ खत्म किया अभियान
शीतल देवी ने मौजूदा एशियाई पैरा खेलों में कुल तीन पदक हासिल किए हैं।उन्होंने महिला व्यक्तिगत कंपाउंड और मिश्रित टीम कंपाउंड स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक जीते।इसके अलावा बुधवार को उन्होंने पायल नाग के साथ महिला कंपाउंड युगल स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया था।फाइनल में भारतीय जोड़ी को चीन की शू शुएकिंग और झाओ जिंग से 141-150 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।इस तरह शीतल ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक के साथ अपना अभियान समाप्त किया।
बिना हाथों के तीरंदाजी कर दुनिया में बनाई पहचान
जम्मू-कश्मीर की रहने वाली शीतल देवी जन्म से ही दोनों हाथों के बिना हैं।इसके बावजूद उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को कभी सफलता की राह में बाधा नहीं बनने दिया।शीतल अपने पैरों और विशेष तकनीक की सहायता से धनुष चलाती हैं। निशाना लगाते समय वह पैरों, कंधों और जबड़े के सहयोग से तीर छोड़ती हैं।सटीक निशानेबाजी और लगातार अभ्यास ने उन्हें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाजों में शामिल कर दिया है।
वह विश्व चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।शीतल ने 2024 पेरिस पैरालंपिक में भी मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था।एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का जलवातीरंदाजी के साथ एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में भारत ने तीनों पदक अपने नाम किए।शैलेश कुमार ने गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि वरुण भाटी को रजत और राहुल को कांस्य पदक मिला।
इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में क्लीन स्वीप किया।
महिला डिस्कस थ्रो एफ54 स्पर्धा में सुवर्णा राज ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।इसके अलावा 400 मीटर टी47 स्पर्धा में अंजना बेन और दिलीप गावित ने स्वर्ण पदक हासिल किए।लंबी कूद में धर्मराज ने बनाया एशियाई रिकॉर्ड
भारतीय पैरा एथलीट धर्मराज सोलैराज ने भी गुरुवार को बेहतरीन प्रदर्शन किया।उन्होंने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 7.15 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक हासिल किया।इस प्रदर्शन के साथ धर्मराज ने नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया।उनकी इस उपलब्धि ने एथलेटिक्स में भारत के पदकों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।भारतीय खिलाड़ियों के लगातार अच्छे प्रदर्शन से एशियाई पैरा खेलों में देश की स्थिति मजबूत हुई है।
स्वाति चौधरी ने भी रचा इतिहास
तीरंदाजी में शीतल देवी के अलावा भारतीय खिलाड़ी स्वाति चौधरी ने भी शानदार प्रदर्शन किया।स्वाति ने महिला डब्ल्यू1 व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया।फाइनल में उन्हें चीन की चेन मेंगकान के खिलाफ 4-6 से हार का सामना करना पड़ा।हालांकि, इस रजत पदक के साथ स्वाति भारत की ओर से एशियाई पैरा खेलों की डब्ल्यू1 श्रेणी में पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं।
88 पदकों के साथ भारत का शानदार प्रदर्शन
गुरुवार के मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 26 पदक हासिल किए, जिनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे।इसके साथ भारत के पदकों की कुल संख्या 88 हो गई।भारत के खाते में अब तक 21 स्वर्ण, 26 रजत और 41 कांस्य पदक आए हैं।एथलेटिक्स भारतीय दल के लिए पदक जीतने वाला सबसे प्रमुख खेल बना हुआ है। तीरंदाजी, तैराकी और अन्य स्पर्धाओं में भी खिलाड़ियों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।भारतीय खिलाड़ियों की सफलता ने देश के खेलप्रेमियों को गर्व करने का अवसर दिया है।
देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं शीतल देवी
शीतल देवी की दोहरी स्वर्णिम सफलता भारतीय खेल इतिहास में विशेष स्थान रखती है।शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों को हराकर यह साबित किया है कि कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।उनकी सफलता केवल खेल जगत के लिए ही नहीं, बल्कि देश के उन लाखों युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों में अपने सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।
एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार देश को गौरवान्वित कर रहा है। शीतल देवी की यह दोहरी जीत इस अभियान की सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल हो गई है।
Tags: