भारतीय फुटबॉल में इस समय रंजीत बजाज का नाम एक बार फिर चर्चा में है। मिनर्वा अकादमी के संस्थापक और प्रमुख के रूप में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने वाले बजाज ने AIFF से भारत की U-15 टीम की जिम्मेदारी देने की मांग की है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने AIFF का कोई औपचारिक ऑफर ठुकरा दिया और अब उसी पद को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में तस्वीर इससे थोड़ी अलग है।
रंजीत बजाज ने AIFF से क्या कहा?
बजाज ने AIFF अध्यक्ष कल्याण चौबे से भारत की U-15 टीम की कमान सौंपने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर उन्हें काम करने की पूरी स्वतंत्रता दी जाए और अपनी टीम व सिस्टम के हिसाब से फैसले लेने का अधिकार मिले, तो वह भारतीय युवा फुटबॉल को नई दिशा दे सकते हैं।
उनका जोर सिर्फ किसी एक टूर्नामेंट पर नहीं, बल्कि लंबे समय की खिलाड़ी विकास योजना पर है। बजाज का लक्ष्य 2034 विश्व कप और उसके बाद के बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए मजबूत भारतीय पीढ़ी तैयार करना है।
मिनर्वा की लिवरपूल पर 6-0 की जीत ने बढ़ाई चर्चा
बजाज के दावे को मजबूती उस समय मिली जब मिनर्वा अकादमी की U-15 टीम ने स्पेन में Mediterranean International Cup में Liverpool U-15 को 6-0 से हरा दिया। यह भारतीय ग्रासरूट फुटबॉल के लिए बेहद चर्चित नतीजा रहा।
इस प्रदर्शन के बाद यूरोप के क्लबों के स्काउट्स ने भी मिनर्वा के खिलाड़ियों में दिलचस्पी दिखाई। बजाज ने बताया था कि स्पेन और इंग्लैंड के शीर्ष डिविजन क्लबों के स्काउट्स ने खिलाड़ियों के CV और वीडियो फुटेज मांगे।
'हार मानना खून में नहीं है'
बजाज की सार्वजनिक छवि एक ऐसे फुटबॉल प्रशासक की रही है जो युवा खिलाड़ियों के विकास को लेकर बेहद आक्रामक और महत्वाकांक्षी रवैया अपनाते हैं। मिनर्वा की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, अकादमी ने 250 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए हैं और उसका फोकस अनुशासन, चरित्र निर्माण और युवा विकास पर है।
यही वजह है कि बजाज अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपने मॉडल को लागू करने की बात कर रहे हैं।
लेकिन क्या वह U-15 टीम के कोच बनेंगे?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। बजाज ने खुद को भारत की U-15 व्यवस्था की जिम्मेदारी देने की मांग की है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि AIFF ने उन्हें औपचारिक रूप से नियुक्त कर दिया है।
AIFF ने U-15 टीम के मुख्य कोच के पद के लिए आवेदन भी आमंत्रित किए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों और चर्चाओं से यह संकेत मिलता है कि बजाज की भूमिका को लेकर 'मैनेजर/प्रोजेक्ट लीडर' और 'मुख्य कोच' के बीच अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है।
आगे क्या होगा?
बजाज की दावेदारी का सबसे मजबूत पक्ष उनका ग्रासरूट और U-15 स्तर पर काम करने का अनुभव है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी के लिए AIFF को कोचिंग लाइसेंस, तकनीकी विशेषज्ञता और राष्ट्रीय टीम के मौजूदा ढांचे जैसे पहलुओं पर भी विचार करना होगा।
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