ऊना: हिमाचल प्रदेश के पैरा एथलीट निषाद कुमार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। बचपन में एक हादसे में एक हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए निषाद ने ऊंची कूद में अपनी अलग पहचान बनाई और लगातार दो पैरालिंपिक खेलों में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। अब उनकी नजर जापान में होने वाली अगली बड़ी अंतरराष्ट्रीय चुनौती पर है।
निषाद कुमार हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से ताल्लुक रखते हैं। बचपन में चारा काटने वाली मशीन की चपेट में आने से उनका एक हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसे काटना पड़ा। उस समय उनकी उम्र काफी कम थी, लेकिन परिवार के सहयोग और अपने मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने इस हादसे को अपनी जिंदगी पर हावी नहीं होने दिया।
खेलों के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था। उन्होंने स्कूल स्तर से एथलेटिक्स शुरू किया और धीरे-धीरे ऊंची कूद को अपना मुख्य खेल बनाया। कठिन अभ्यास और लगातार बेहतर प्रदर्शन की बदौलत वह राष्ट्रीय स्तर से होते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचे।
निषाद ने टोक्यो पैरालिंपिक 2020 में पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता था। उन्होंने 2.06 मीटर की छलांग लगाकर एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी भी की थी। इस उपलब्धि के बाद वह देश के प्रमुख पैरा एथलीटों में शामिल हो गए।
इसके बाद पेरिस पैरालिंपिक 2024 में भी निषाद ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और एक बार फिर रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। लगातार दो पैरालिंपिक में पदक जीतना उनकी निरंतरता और मेहनत का बड़ा प्रमाण माना गया।
निषाद की सफलता के पीछे लंबे समय का अभ्यास, अनुशासन और परिवार का मजबूत सहयोग रहा है। साधारण किसान परिवार से आने वाले निषाद ने सीमित संसाधनों के बावजूद खेल में अपनी जगह बनाई। उनकी कहानी यह दिखाती है कि शारीरिक चुनौती किसी खिलाड़ी के सपनों को रोक नहीं सकती।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता मिलने के बाद निषाद पर उम्मीदें भी बढ़ी हैं। वह हर प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन को बेहतर करने और देश के लिए पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरते हैं। उनका फोकस तकनीक, फिटनेस और जंप की ऊंचाई में लगातार सुधार पर रहता है।
जापान में होने वाली आगामी प्रतियोगिता उनके लिए एक और बड़ा मंच होगी। पिछले प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय खेल प्रेमियों की निगाहें एक बार फिर निषाद पर रहेंगी। हालांकि हर प्रतियोगिता में चुनौती अलग होती है और दुनिया के शीर्ष पैरा एथलीटों के बीच मुकाबला काफी कड़ा रहता है।
निषाद कुमार की यात्रा केवल पदकों तक सीमित नहीं है। एक हादसे में हाथ गंवाने के बाद जिस तरह उन्होंने खुद को संभाला और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे, वह हजारों खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणा है।
अब जापान में निषाद एक बार फिर भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने उतरेंगे। टोक्यो और पेरिस पैरालिंपिक में रजत पदक जीत चुके हिमाचल के इस खिलाड़ी से देश को एक और दमदार प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
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