नई दिल्ली। फीफा (FIFA) के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के लिए दोबारा चुनाव जीतने की राह आसान नजर नहीं आ रही है। वर्ल्ड कप से जुड़े कमर्शियल राइट्स को लेकर सामने आए विवाद ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन्फेंटिनो द्वारा वर्ल्ड कप की हिस्सेदारी बेचने और नई कमर्शियल राइट्स बॉडी के जरिए बड़ी रकम जुटाने की योजना ने फुटबॉल प्रशासन में असंतोष पैदा कर दिया है।
बताया जा रहा है कि इन्फेंटिनो ने अपनी इस योजना से शुक्रवार देर रात कदम पीछे खींच लिए। यह फैसला तब आया जब सॉकर प्रशासन की दुनिया में कई दिनों तक इस प्रस्ताव को लेकर गहन बहस और विरोध देखने को मिला। प्रस्तावित योजना के तहत फीफा एक नई कमर्शियल राइट्स इकाई बनाकर करीब 4.2 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी में था।
इस योजना का उद्देश्य फीफा के राजस्व स्रोतों को और मजबूत करना था, लेकिन इसे लेकर कई क्षेत्रीय फुटबॉल कॉन्फेडरेशन ने चिंता जताई। आलोचकों का मानना था कि इस तरह के बड़े फैसले पारदर्शिता और सभी हितधारकों की सहमति के बिना नहीं लिए जाने चाहिए।
तीन क्षेत्रीय कॉन्फेडरेशन की नाराजगी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फीफा से जुड़े तीन क्षेत्रीय कॉन्फेडरेशन इस प्रस्ताव से खुश नहीं थे। इन संगठनों की आपत्ति थी कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के व्यावसायिक अधिकारों को लेकर फैसले लेने में उन्हें पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया।
फुटबॉल प्रशासन में क्षेत्रीय कॉन्फेडरेशन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फुटबॉल गतिविधियों का संचालन इन्हीं संगठनों के माध्यम से होता है। ऐसे में उनके विरोध को इन्फेंटिनो के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
चुनावी भविष्य पर असर
जियानी इन्फेंटिनो ने 2016 में फीफा अध्यक्ष का पद संभाला था। इसके बाद उन्होंने संगठन में कई बदलावों का दावा किया और फीफा के वित्तीय मॉडल को मजबूत करने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में वर्ल्ड कप के विस्तार और नए टूर्नामेंट प्रारूपों को लेकर भी कई बड़े फैसले लिए गए।
हालांकि, हालिया विवाद ने उनके नेतृत्व शैली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फीफा अध्यक्ष पद के लिए दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे इन्फेंटिनो के लिए अब क्षेत्रीय समर्थन जुटाना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फीफा अध्यक्ष के चुनाव में विभिन्न सदस्य संघों का समर्थन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में कॉन्फेडरेशन स्तर पर पैदा हुई नाराजगी इन्फेंटिनो की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती है।
4.2 अरब डॉलर की योजना क्यों बनी विवाद का कारण?
इन्फेंटिनो की योजना के अनुसार, नई कमर्शियल राइट्स बॉडी फीफा के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने का काम करती। इससे वर्ल्ड कप और अन्य प्रतियोगिताओं से मिलने वाली कमाई को बढ़ाने की उम्मीद थी।
लेकिन आलोचकों ने सवाल उठाया कि इतने बड़े वित्तीय फैसले के लिए प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी। कुछ लोगों ने चिंता जताई कि इससे फीफा के भीतर सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ सकता है और क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका कमजोर हो सकती है।
लगातार तीन दिनों तक चले विवाद के बाद इन्फेंटिनो ने योजना से पीछे हटने का फैसला किया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में फीफा इस तरह के किसी नए व्यावसायिक मॉडल पर दोबारा विचार करेगा या नहीं।
फीफा में बढ़ता राजनीतिक दबाव
फीफा दुनिया के सबसे प्रभावशाली खेल संगठनों में से एक है, लेकिन इसके फैसले अक्सर राजनीतिक और आर्थिक बहस का विषय बनते रहे हैं। अध्यक्ष पद पर बैठे व्यक्ति को खेल के विकास के साथ-साथ विभिन्न सदस्य देशों और क्षेत्रीय संगठनों के हितों में संतुलन बनाना पड़ता है।
इन्फेंटिनो ने अपने कार्यकाल में फीफा की वित्तीय स्थिति सुधारने और संगठन की वैश्विक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया है। लेकिन हालिया विवाद ने दिखाया है कि बड़े आर्थिक फैसलों को लेकर सहमति बनाना कितना मुश्किल हो सकता है।
आगे की चुनौती
अब इन्फेंटिनो के सामने सबसे बड़ी चुनौती फीफा के भीतर भरोसा बनाए रखना और क्षेत्रीय संगठनों के साथ संबंध मजबूत करना होगी। चुनाव से पहले उन्हें यह साबित करना होगा कि उनकी योजनाएं सभी सदस्य संघों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।
वर्ल्ड कप कमर्शियल राइट्स योजना से पीछे हटना फिलहाल विवाद को शांत करने का प्रयास माना जा रहा है, लेकिन इसका राजनीतिक असर आने वाले समय में देखने को मिल सकता है।
फीफा अध्यक्ष के लिए आगामी चुनाव केवल नेतृत्व का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह इस बात का संकेत भी देगा कि फुटबॉल प्रशासन में सदस्य संघ किस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।