बेंगलुरु। टीम इंडिया के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। दलीप ट्रॉफी 2026 में शमी के साथ खेल रहे ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने उनकी फिटनेस, मेहनत और भारतीय टीम में वापसी की इच्छा को लेकर बड़ा बयान दिया है। किशन का कहना है कि शमी की उम्र को देखकर उनके भविष्य का फैसला नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उनमें अभी भी भारत के लिए खेलने और टीम के लिए योगदान देने की जबरदस्त भूख दिखाई देती है।
36 साल के शमी फिलहाल दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। खास बात यह है कि साउथ जोन के खिलाफ फाइनल मुकाबला उनके फर्स्ट-क्लास करियर का 100वां मैच होगा। भारतीय टीम से बाहर चल रहे शमी के लिए यह मुकाबला केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि चयनकर्ताओं के सामने अपनी दावेदारी मजबूत करने का भी मौका माना जा रहा है।
शमी पर क्या बोले ईशान किशन?
ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी फाइनल से पहले शमी की जमकर तारीफ की।
किशन ने कहा कि उनके लिए उम्र केवल एक संख्या है। अगर कोई खिलाड़ी लगातार मेहनत कर रहा है और अच्छा प्रदर्शन कर रहा है तो उसकी उम्र से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका खेल और फिटनेस होती है।
ईशान ने शमी के मौजूदा सीजन की ऊर्जा और इंटेंसिटी की भी तारीफ की। उनका मानना है कि अनुभवी तेज गेंदबाज का टीम में होना बाकी खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ाता है।
शमी ऐसे गेंदबाज हैं जो जरूरत के समय विकेट निकालने की क्षमता रखते हैं और वर्षों के अंतरराष्ट्रीय अनुभव की वजह से टीम के युवा गेंदबाजों की भी मदद कर सकते हैं।
अभी भी भारत के लिए खेलने की भूख’
ईशान किशन के बयान की सबसे महत्वपूर्ण बात शमी की भारतीय टीम में वापसी की इच्छा को लेकर रही।
उन्होंने कहा कि शमी जिस तरह अभ्यास करते हैं और मैच में पूरी ऊर्जा के साथ गेंदबाजी करते हैं उससे साफ नजर आता है कि उनमें अभी भी भारत के लिए खेलने की भूख मौजूद है।
किशन के मुताबिक उम्र को लेकर बहुत ज्यादा चर्चा करने की जरूरत नहीं है। अगर खिलाड़ी फिट है, मेहनत कर रहा है और मैदान पर प्रदर्शन कर रहा है तो उसे अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिलता रहना चाहिए।
शमी के लिए भी घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन भारतीय टीम के दरवाजे दोबारा खोल सकता है।
दलीप ट्रॉफी में दिखा रहे दम
मोहम्मद शमी भारतीय टीम से बाहर रहने के बावजूद घरेलू क्रिकेट में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए उन्होंने दूसरी पारी में तीन विकेट लिए थे। उनकी गेंदबाजी ने सेंट्रल जोन को दबाव में डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ईस्ट जोन ने सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। इस मुकाबले में शमी के अलावा कप्तान ईशान किशन ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
अब फाइनल में ईस्ट जोन का सामना मजबूत साउथ जोन से होना है और एक बार फिर सभी की नजरें शमी की गेंदबाजी पर रहेंगी।
100वां फर्स्ट-क्लास मैच खेलेंगे शमी
दलीप ट्रॉफी का फाइनल मोहम्मद शमी के करियर के लिए बेहद खास होने वाला है।
यह उनके फर्स्ट-क्लास करियर का 100वां मुकाबला होगा। लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के साथ घरेलू क्रिकेट में भी शमी ने अपनी अलग पहचान बनाई है।
फाइनल से पहले उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शमी 99 फर्स्ट-क्लास मैचों में 382 विकेट ले चुके हैं।
100 फर्स्ट-क्लास मैच खेलना किसी तेज गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि है। तेज गेंदबाजी में शरीर पर लगातार दबाव पड़ता है और लंबे समय तक फिटनेस बनाए रखना आसान नहीं होता।
ऐसे में शमी का इस मुकाम तक पहुंचना उनके लंबे क्रिकेट करियर और निरंतरता को दिखाता है।
आखिरी बार 2025 में भारत के लिए खेले थे शमी
मोहम्मद शमी ने भारत के लिए अपना पिछला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान खेला था।
इसके बाद वह भारतीय टीम की योजनाओं से बाहर होते गए। फिटनेस और टीम कॉम्बिनेशन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
विशेष रूप से टेस्ट क्रिकेट में उनकी वापसी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
लेकिन शमी ने घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा और अब दलीप ट्रॉफी जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में अपनी फिटनेस और गेंदबाजी क्षमता दिखा रहे हैं।
उनकी कोशिश साफ है कि मैदान पर प्रदर्शन के जरिए चयनकर्ताओं का ध्यान दोबारा अपनी ओर खींचा जाए।
उम्र बनेगी सबसे बड़ी चुनौती?
36 साल की उम्र में किसी तेज गेंदबाज के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी आसान नहीं होती।
तेज गेंदबाजी में फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण होती है। गेंदबाज को लगातार रन-अप लेना पड़ता है और लंबे स्पेल डालने होते हैं। खासकर टेस्ट क्रिकेट में एक दिन में कई ओवर गेंदबाजी करनी पड़ सकती है।
यही कारण है कि चयनकर्ता अनुभवी तेज गेंदबाजों की फिटनेस और वर्कलोड पर विशेष नजर रखते हैं।
लेकिन ईशान किशन का मानना है कि केवल उम्र देखकर शमी को नजरअंदाज करना सही पैमाना नहीं होगा।
अगर वह फिट हैं और लगातार विकेट ले रहे हैं तो प्रदर्शन को महत्व मिलना चाहिए।
अनुभव है शमी की सबसे बड़ी ताकत
मोहम्मद शमी की सबसे बड़ी ताकत उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव है।
वह भारत के लिए टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों में खेल चुके हैं और कई बड़े ICC टूर्नामेंट का हिस्सा रहे हैं।
नई गेंद से सीम मूवमेंट हासिल करने के साथ पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग कराने की क्षमता ने उन्हें लंबे समय तक भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए रखा।
शमी की सीम पोजिशन को क्रिकेट जगत में विशेष रूप से सराहा जाता रहा है।
अगर वह पूरी फिटनेस हासिल करते हैं तो उनका अनुभव किसी भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
युवा गेंदबाजों को भी मिलता है फायदा
ईशान किशन ने शमी की मौजूदगी से टीम को मिलने वाले आत्मविश्वास की ओर भी इशारा किया।
अनुभवी खिलाड़ी केवल अपने प्रदर्शन से योगदान नहीं देते बल्कि ड्रेसिंग रूम में युवा खिलाड़ियों को भी मार्गदर्शन देते हैं।
शमी जैसे गेंदबाज युवा पेसर्स को लाइन-लेंथ, परिस्थितियों के मुताबिक गेंदबाजी और बल्लेबाज को पढ़ने के तरीके के बारे में महत्वपूर्ण सलाह दे सकते हैं।
दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के लिए उनकी मौजूदगी इसी कारण और महत्वपूर्ण हो जाती है।
चयनकर्ताओं को देना होगा मजबूत संदेश
भारतीय टीम में तेज गेंदबाजी के कई विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में शमी के लिए वापसी का रास्ता आसान नहीं होगा।
उन्हें केवल फिट रहना ही नहीं बल्कि घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट लेकर यह साबित करना होगा कि वह अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौती के लिए तैयार हैं।
दलीप ट्रॉफी फाइनल ऐसा ही एक बड़ा मंच है।
अगर शमी साउथ जोन के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करते हैं तो उनकी वापसी की चर्चा और तेज हो सकती है।
हालांकि अंतिम फैसला भारतीय चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को करना है।
2027 वर्ल्ड कप पर भी नजर
मोहम्मद शमी के भविष्य को लेकर चर्चा में 2027 वनडे वर्ल्ड कप का सवाल भी बार-बार सामने आता है।
टूर्नामेंट तक उनकी उम्र और बढ़ जाएगी। ऐसे में टीम मैनेजमेंट यह देखेगा कि वह उस समय तक फिटनेस और प्रदर्शन का स्तर बनाए रख सकते हैं या नहीं।
शमी का ICC टूर्नामेंट में शानदार रिकॉर्ड रहा है। इसलिए अगर वह घरेलू क्रिकेट और उपलब्ध अवसरों में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो चयन की बहस जारी रह सकती है।
लेकिन फिलहाल 2027 वर्ल्ड कप की टीम में उनकी जगह को लेकर कोई निश्चित दावा करना जल्दबाजी होगी।
शमी को खुद प्रदर्शन से बनाना होगा रास्ता
भारतीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। युवा तेज गेंदबाज घरेलू क्रिकेट और IPL के जरिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
ऐसे में किसी भी सीनियर खिलाड़ी के लिए केवल पुराने रिकॉर्ड के आधार पर टीम में वापसी करना मुश्किल है।
शमी भी इस बात से अच्छी तरह परिचित हैं। इसलिए उनके लिए सबसे मजबूत जवाब मैदान पर प्रदर्शन ही होगा।
दलीप ट्रॉफी में लंबे स्पेल डालना और लगातार विकेट लेना उनकी फिटनेस को लेकर मौजूद सवालों का जवाब देने में मदद कर सकता है।
ईशान किशन का बयान क्यों है अहम?
ईशान किशन इस समय केवल शमी के साथी खिलाड़ी नहीं बल्कि ईस्ट जोन के कप्तान भी हैं।
एक कप्तान के रूप में वह शमी को अभ्यास और मैच दोनों परिस्थितियों में करीब से देख रहे हैं।
इसी कारण शमी की ऊर्जा और मेहनत को लेकर उनका बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किशन ने साफ तौर पर यह संकेत दिया है कि मैदान पर शमी की प्रतिबद्धता में उन्हें किसी तरह की कमी दिखाई नहीं दे रही।
उनका कहना है कि शमी जिस तरह मेहनत कर रहे हैं उससे भारतीय टीम में वापसी की उनकी इच्छा साफ दिखाई देती है।
तिलक वर्मा ने भी की तारीफ
शमी की तारीफ केवल ईशान किशन ने नहीं की है। दलीप ट्रॉफी फाइनल से पहले तिलक वर्मा ने भी अनुभवी तेज गेंदबाज की गुणवत्ता की सराहना की।
शमी के पास वर्षों का अनुभव है और घरेलू क्रिकेट में उनकी मौजूदगी युवा खिलाड़ियों के लिए सीखने का अवसर भी है।
दलीप ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट का एक बड़ा उद्देश्य यही है कि देश के शीर्ष घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एक साथ खेलें और चयनकर्ताओं को अपनी क्षमता दिखाएं।
साउथ जोन के खिलाफ होगी बड़ी परीक्षा
फाइनल में ईस्ट जोन के सामने साउथ जोन की मजबूत टीम होगी।
ऐसे में शमी की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। नई गेंद से शुरुआती विकेट निकालना ईस्ट जोन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
अगर पिच तेज गेंदबाजों को मदद देती है तो शमी अपनी सीम और स्विंग से बल्लेबाजों के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं।
वहीं परिस्थितियां बल्लेबाजी के अनुकूल हुईं तो उनकी फिटनेस और लंबे स्पेल डालने की क्षमता की असली परीक्षा होगी।
टीम इंडिया में वापसी अभी चयनकर्ताओं के हाथ
ईशान किशन के समर्थन के बावजूद यह स्पष्ट है कि मोहम्मद शमी की भारतीय टीम में वापसी की कोई गारंटी नहीं है।
टीम चयन प्रदर्शन, फिटनेस, भविष्य की योजनाओं और उपलब्ध विकल्पों जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।
लेकिन शमी के पक्ष में सबसे बड़ी बात उनका अनुभव और विकेट लेने की क्षमता है।
अगर वह घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो चयनकर्ताओं के लिए उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करना मुश्किल हो सकता है।
शमी के लिए हर मैच महत्वपूर्ण
करियर के इस पड़ाव पर शमी के लिए घरेलू क्रिकेट का हर मुकाबला महत्वपूर्ण है।
100वें फर्स्ट-क्लास मैच का मौका उनके लिए भावनात्मक उपलब्धि तो होगा ही लेकिन उससे ज्यादा महत्वपूर्ण मैदान पर उनका प्रदर्शन होगा।
फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में अगर वह निर्णायक भूमिका निभाते हैं तो टीम इंडिया में वापसी की उनकी दावेदारी को नई ताकत मिल सकती है।
इसके उलट फिटनेस से जुड़ी कोई परेशानी या लगातार कमजोर प्रदर्शन उनकी राह मुश्किल कर सकता है।
उम्र सिर्फ एक नंबर’
ईशान किशन का पूरा संदेश आखिरकार इसी बात के आसपास है कि खिलाड़ी को केवल उसकी उम्र से नहीं आंका जाना चाहिए।
शमी 36 साल के हैं लेकिन किशन के मुताबिक उनकी मेहनत और ऊर्जा अभी भी उल्लेखनीय है।
वह भारतीय टीम में वापस आने के लिए मेहनत कर रहे हैं और उनके अंदर देश के लिए दोबारा खेलने की भूख दिखाई देती है।
अब शमी के पास अपने 100वें फर्स्ट-क्लास मुकाबले में इस भरोसे को मैदान पर प्रदर्शन में बदलने का मौका होगा।
भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए भी यह मुकाबला खास रहेगा। एक तरफ शमी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करेंगे तो दूसरी तरफ हर स्पेल के साथ उनकी संभावित इंडिया वापसी पर बहस तेज होगी।
अंतिम फैसला चयनकर्ताओं को करना है लेकिन ईशान किशन के बयान ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि ईस्ट जोन के कप्तान की नजर में शमी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।