काकामिगाहारा। एशियाई खेल 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल मुकाबले में जगह बना ली है। बुधवार को खेले गए सेमीफाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को 2-0 से हराया। कड़े मुकाबले में पहले हाफ तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं, लेकिन तीसरे और चौथे क्वार्टर में भारत ने लगातार दो गोल दागकर मैच अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है। फाइनल में अब उसका सामना 2 अक्टूबर को चीन से होगा।
भारतीय टीम ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। पहले क्वार्टर में भारत ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और दक्षिण कोरिया के सर्कल में कई बार प्रवेश किया। शुरुआती मिनटों में ही भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन दक्षिण कोरिया की गोलकीपर और डिफेंस ने सभी प्रयास नाकाम कर दिए।
पहले क्वार्टर में नवनीत कौर के पास भी गोल करने का मौका आया, लेकिन उनका प्रयास सफल नहीं हो सका। भारतीय टीम लगातार दबाव बनाती रही, जबकि दक्षिण कोरिया ने मजबूत रक्षात्मक खेल दिखाया। पहले 15 मिनट के बाद स्कोर 0-0 रहा।
दूसरे क्वार्टर में भी भारत ने हमले जारी रखे। टीम को कई पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदला जा सका। पहले हाफ तक भारत ने आठ पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए और दक्षिण कोरिया की तुलना में ज्यादा बार सर्कल में प्रवेश किया, इसके बावजूद स्कोरलाइन गोलरहित रही।
दक्षिण कोरिया की टीम ने दूसरे क्वार्टर में धीरे-धीरे मुकाबले में वापसी करने की कोशिश की। उसने भारतीय खिलाड़ियों को सर्कल के अंदर आसानी से जगह नहीं दी। खासतौर पर कोरियाई गोलकीपर ने कई महत्वपूर्ण बचाव किए, जिसके कारण भारतीय टीम को बढ़त हासिल करने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा।
हाफ टाइम के बाद भारत नई रणनीति और तेज रफ्तार के साथ मैदान में उतरा। लगातार कोशिशों का फायदा तीसरे क्वार्टर के अंतिम हिस्से में मिला। 43वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला और इस बार टीम ने मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। सीधे ड्रैग फ्लिक की बजाय पास के जरिए बनाई गई रणनीति पर इशिका ने गेंद को गोल में पहुंचाकर भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी।
इशिका के गोल के साथ ही भारतीय खेमे में उत्साह बढ़ गया। पूरे मैच में दक्षिण कोरिया की मजबूत रक्षा के कारण गोल के लिए संघर्ष कर रही टीम इंडिया को आखिरकार जरूरी सफलता मिल गई। तीसरे क्वार्टर की समाप्ति तक भारत ने अपनी एक गोल की बढ़त कायम रखी। मैच के लाइव रिकॉर्ड में भी इशिका को भारत के पहले गोल का स्कोरर दर्ज किया गया।
चौथे क्वार्टर की शुरुआत में ही भारतीय टीम ने दक्षिण कोरिया पर एक और हमला किया। 47वें मिनट में कप्तान सलीमा टेटे ने शानदार तेजी दिखाते हुए सर्कल में गेंद पहुंचाई। उनकी ओर से भेजी गई गेंद डिफेंस के बीच से निकलते हुए गोल में चली गई और भारत की बढ़त 2-0 हो गई। शुरुआत में इस गोल को लेकर स्कोरर के नाम में बदलाव हुआ, लेकिन बाद में इसे सलीमा टेटे के नाम दर्ज किया गया।
दो गोल से पिछड़ने के बाद दक्षिण कोरिया ने अपनी रणनीति बदलते हुए भारतीय गोलपोस्ट पर दबाव बढ़ाया। अंतिम मिनटों में कोरिया को लगातार पेनल्टी कॉर्नर भी मिले, लेकिन भारतीय डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन किया और विपक्षी टीम को खाता नहीं खोलने दिया।
भारतीय गोलकीपर और डिफेंडरों ने अंतिम समय में धैर्य बनाए रखा। दक्षिण कोरिया ने गोल अंतर कम करने की पूरी कोशिश की, लेकिन भारत ने 2-0 की बढ़त को अंतिम सीटी तक कायम रखा। मैच समाप्त होते ही भारतीय खिलाड़ियों ने फाइनल में प्रवेश का जश्न मनाया।
भारत का इस एशियाई खेल में प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है। टीम ने पूल चरण के अपने सभी पांच मुकाबले जीतते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया था। भारत ने उज्बेकिस्तान को 19-0, इंडोनेशिया को 17-1, थाईलैंड को 20-1, मेजबान जापान को 3-1 और सिंगापुर को 7-0 से हराया था। पूल चरण में टीम का गोल अंतर भी बेहद मजबूत रहा।
कप्तान सलीमा टेटे की अगुवाई में भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में अब तक अजेय रही है। दीपिका, नवनीत कौर, रुतुजा पिसाल, लालरेमसियामी और इशिका समेत कई खिलाड़ियों ने अलग-अलग मुकाबलों में गोल कर टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती फाइनल में चीन के खिलाफ होगी। चीन ने दूसरे सेमीफाइनल में मेजबान जापान को शूटआउट में हराकर गोल्ड मेडल मुकाबले में जगह बनाई। भारत और चीन के बीच फाइनल 2 अक्टूबर को खेला जाएगा।
यह मुकाबला भारतीय महिला हॉकी के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। भारत ने एशियाई खेलों में महिला हॉकी का अपना एकमात्र गोल्ड मेडल 1982 में जीता था। इसके बाद टीम 2002 और 2018 में सिल्वर मेडल तक पहुंची, जबकि 1986, 2014 और 2023 में ब्रॉन्ज हासिल किया। अब भारतीय टीम 44 साल बाद एक बार फिर एशियाई खेलों का गोल्ड जीतने से सिर्फ एक मुकाबला दूर है।
गोल्ड मेडल का महत्व इस बार और भी ज्यादा है क्योंकि एशियाई खेलों की महिला हॉकी विजेता टीम को लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन भी मिलेगा। ऐसे में चीन के खिलाफ होने वाला फाइनल सिर्फ स्वर्ण पदक ही नहीं, बल्कि ओलंपिक टिकट के लिहाज से भी बेहद अहम होगा।
दक्षिण कोरिया के खिलाफ सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने दिखाया कि दबाव के बावजूद वह धैर्य बनाए रख सकती है। पहले हाफ में लगातार मौके गंवाने के बाद भी खिलाड़ियों ने जल्दबाजी नहीं की और तीसरे क्वार्टर में इशिका के गोल ने मुकाबले की तस्वीर बदल दी। इसके बाद कप्तान सलीमा टेटे के गोल ने भारत की जीत सुनिश्चित कर दी।
अब भारतीय महिला हॉकी टीम की नजर 2 अक्टूबर को चीन के खिलाफ होने वाले निर्णायक मुकाबले पर है। गोल्ड मेडल जीतने पर भारत न केवल 44 साल का इंतजार खत्म करेगा, बल्कि लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए भी अपना स्थान पक्का कर लेगा।
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