नई दिल्ली: 26 जून 2026... करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रशंसक टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन का इंतजार कर रहे थे. वजह सिर्फ आयरलैंड के खिलाफ पहला टी20 नहीं था, बल्कि 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का संभावित डेब्यू था. लेकिन जैसे ही टीम शीट सामने आई, उत्साह एक सवाल में बदल गया- वैभव आखिर हैं कहां?
भारतीय क्रिकेट में एक नई बहस जन्म ले चुकी है. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू क्यों नहीं मिला.सवाल इससे कहीं बड़ा है- क्या हर खिलाड़ी का मूल्यांकन एक ही पैमाने पर होना चाहिए या फिर असाधारण प्रतिभाओं के लिए अपवाद भी होने चाहिए?
15 साल की उम्र में कोई बल्लेबाज आईपीएल में 776 रन बना देता है. 72 छक्के उड़ाता है. दुनिया के कई नामी गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाजी करता है. इसके बाद श्रीलंका में 11 गेंदों पर लिस्ट-ए क्रिकेट का सबसे तेज अर्धशतक जड़ देता है. अंडर-19 स्तर पर भारत समेत सात देशों में शतक लगा चुका होता है.
इसके बावजूद अगर उसे सिर्फ बेंच पर बैठकर इंतजार करना पड़े, तो सवाल उठना लाजिमी है- आखिर टीम इंडिया की जर्सी पहन कर पिच पर उतरने के लिए अब और क्या करना होगा? भारतीय क्रिकेट बदल चुका है. अब चयन सिर्फ प्रतिभा या मौजूदा फॉर्म पर नहीं होता. अब समीकरण में कई चीजें जुड़ चुकी हैं- टीम बैलेंस, भूमिका, मौजूदा खिलाड़ी की फॉर्म, फिटनेस, ड्रेसिंग रूम की निरंतरता और सही समय.
यही वजह है कि अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे स्थापित ओपनरों के रहते वैभव सूर्यवंशी के लिए प्लेइंग इलेवन का रास्ता आसान नहीं है. ईमानदारी से देखें तो टीम मैनेजमेंट की दलील भी कमजोर नहीं है, जिसने टीम के लिए प्रदर्शन किया है, उसे सिर्फ इसलिए बाहर नहीं किया जा सकता कि बाहर कोई नया खिलाड़ी जोरदार फॉर्म में है.
भारत के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर टीम मैनेजमेंट का रुख लगभग साफ कर दिया है. उनका कहना है कि सिर्फ किसी नए खिलाड़ी को मौका देने के लिए उस बल्लेबाज को बाहर करना उचित नहीं होगा, जो लगातार रन बना रहा है.