क्या मंगल ग्रह भी था पृथ्वी जैसा? जानें क्या कहते हैं वैज्ञानिक

हमारे सौरमंडल के ग्रह एक प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क से बने थे

Update: 2021-10-18 15:35 GMT

हमारे सौरमंडल के ग्रह एक प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क से बने थे. इनमें भी पथरीले ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल भी एक ही तरह से बने जबकि गुरु, यूरेनस और नेप्च्यून जैसे गैसीय ग्रह अलग तरह से. फिर भी आंतरिक चार ग्रहों में समानताएं बहुत कम हैं. इनसे संबंधित एक सवाल यह है कि क्या कभी मंगल ग्रह (Mars) बिलकुल पृथ्वी (Earth) की तरह था. इस सवाल का जवाब अब नासा (NASA) की एक वैज्ञानिक ने दिया है. एक वीडियो इंटरव्यू में नासा के खगोलजीवविज्ञानी डॉ. बेकी मैकॉले रेंच का कहना है कि लाल ग्रह हमेशा आज के जितना सूखा नहीं था.

नासा (NASA) की खुद की वैबसाइट के मुताबिक मंगल (Mars) पर पृथ्वी (Earth) की तरह मौसम होते है, ध्रुवों पर बर्फ की चादर है, ज्वालामुखी हैं, घाटियां हैं. यहां पर ऐसे निशान मिले है जिनसे पता चलता है कि कभी यहा बाढ़ आया करती थी. इसके अलावा ऐसे प्रमाण भी हैं कि यहां तरल नमकीन पानी भी हुआ करता था. ये प्रमाण मंगल के पहाड़ी इलाकों में मिले हैं. इन सबसे साफ होता है कि हमारे पड़ोसी लाल ग्रह और हमारे अपने ग्रह में बहुत समानताएं हैं.
नासा (NASA) ने यह इंटरव्यू पिछले महीने ही साझा किया है. इसमें रेंच से सीधा और सरल सवाल पूछा गया था. क्या मंगल (Mars) कभी पृथ्वी (Earth) की तरह दिखाई देता था. रेंच ने भी सीधा जवाब देते हुए कहा, हां हमें लगता है वह पहले पृथ्वी की तरह ही दिखाई देता था. इसके बाद रेंच ने बताया कि मंगल पहले गीला और गर्म रहा होगा, बिलकुल वैसे ही जैसे हमारा अपना नीला ग्रह है. आमतौर पर पृथ्वी से केवल शुक्र ग्रह की तुलना की जाती रही है. लेकिन मंगल से बहुत कम होती है.
अपनी बात को समझाते हुए इस इंटरव्यू में रेंच ने कहा कि 4 अरब साल पहले जब भी सौरमंडल (Solar System) बना था, तब पृथ्वी (Earth) और मंगल (Mars) एक तरह की सामग्री से बने थे इसीलिए वे इतने समान दिखाई भी देते हैं. उन्होंने बताया कि आज जब भी हम मंगल को देखते हैं तो हमें एक बहुत ही सूखा ग्रह दिखाई देता है जो नीले कंचे की तरह दिखने वाली पृथ्वी से बिलकुल उलट है. 
रेंच का कहना है कि उनका विश्वास कि कभी मंगल (Mars) पृथ्वी (Earth) की तरह रहा होगा मंगल पर मिलने वाले प्रमाण हैं जो बताते हैं कि मंगल पर कभी बहुत सारी नदी नाले (Ancient Streams on Mars) बहा करते रहे होंगे. ऐसा भी हो सकता है कि मंगल पर उथला उत्तरी महासागर रहा हो. लेकिन दोनों ही ग्रहों ने अलग रास्ते अख्तियार कर लिए और आज ये बिलकुल अलग अलग नजर आते हैं जिससे यकीन ही नहीं होता कि कभी वे एक से भी रहे होंगे. 
दोनों ग्रह के अलग अलग होने के बारे में रेंच ने बताया कि जहां पृथ्वी (Earth) पर जीवन पनपने लगा, मंगल (Mars) पर भूगर्भीय गतिविधि कम होने लगी. वहां पानी नहीं रहा और वह एक बहुत ही सूखी जगह हो गई. इसीलिए यह अध्ययन करने के लिहाज से इतना दिलचस्प ग्रह (Planet) है. इसके अध्ययन से इसके इतिहास के बारे में तो पता चलेगा ही, यह भी समझ में आएगा कि सौरमंडल में पृथ्वी और ग्रहों का निर्माण कैसे होता है. लेकिन मंगल बहुत ही ज्यादा लंबे समय पहले पृथ्वी की तरह दिखता था.
नासा (NASA) का कहना है कि मंगल (Mars) एक ठंडे रेगिस्तान का संसार है जो आकार में पृथ्वी से आधा है. इसे लाल ग्रह इसलिए कहा जाता है कि इसकी जमीन जंग वाले लोहे की है. नासा का मानना है कि मंगल पर पुराने समय की बाढ़ के निशान हैं, लेकिन अब वहां पानी (Water on Mars) केवल बर्फीली धूल और पतले बादलों के रूप में ही है. वैज्ञानिक यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि क्या इस लाल ग्रह पर कभी किसी प्रकार का जीवन था या नहीं. इस पड़ताल में मंगल के वर्तमान अभियान काम कर रहे हैं.


Tags:    

Similar News