हवा में उड़ने वाले सांप के पंख तो नहीं होते, फिर कैसे उड़ते हैं?शोधकर्ताओं ने बताई ये बात
शोधकर्ताओं ने बताया
Flying Snakes Interesting Facts in Hindi: दुनियाभर में सांप की ढाई से तीन हजार प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से एक प्रजाति उड़ने वाला सांपों की भी होती है. क्या आपने कभी उड़ने वाले सांपों को देखा है? इन सांपों से आपका वास्ता न भी पड़ा हो तो हो सकता है कि आपने यूट्यूब वीडियो, डिस्कवरी चैनल या फिर फिल्मों में उड़ने वाले सांपों को देखा होगा.
आमतौर पर उड़ने वाले सांप (Flying snake) बहुत कम दिखते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये बहुत ज्यादा जहरीले नहीं होते हैं, लेकिन उड़ने के कारण इनका खौफ बहुत ज्यादा होता है. आप ही सोचिए न कि आप किसी पेड़ के नीचे खड़े हों और एक सांप उड़ते हुए आपके पास या आपके शरीर पर आ गिरे तो क्या हालत होगी आपकी!
डर के मारे आप सहम जाएंगे… है कि नहीं? अच्छा! क्या आपने कभी सोचा है कि ये सांप उड़ते कैसे हैं? कीड़ों से लेकर पक्षियों तक… धरती पर जितने भी उड़ने वाले जीव हैं, उनके तो पंख होते हैं और इन्हीं पंखों के सहारे वे उड़ते हैं. फिर बिना पंख वाले ये सांप आखिर कैसे उड़ते हैं?
उड़ने वाले सांपों की प्रजाति पर रिसर्च
पंख न होने के बावजूद ये सांप कैसे उड़ते हैं, इसका पता वैज्ञानिकों ने लगा लिया है. करीब 9 महीने पहले हुए एक शोध के मुताबिक उड़ने वाली प्रजाति पर वैज्ञानिकों ने हाई स्पीड कैमरों की मदद से इसका पता लगाया है. सबसे पहले आपको यह बता दें कि हवा में उड़ने वाली सांपों की जिस प्रजाति पर अध्ययन किया गया, उसका नाम पैराडाइस ट्री स्नेक या क्रिसोपेलिया पाराडिसी है.
यह उड़ने वाले सांपों में सबसे छोटी प्रजाति है. इसकी लंबाई करीब 3 फीट तक होती है. काले रंग के इस सांप पर हरी धारियां होती हैं. ये सांप पेड़ की एक शाखा से दूसरे शाखा तक उड़ते हैं और कई बार उड़ कर जमीन और दीवारों पर भी आ जाते हैं.
आखिर कैसे उड़ते हैं सांप?
'अड्यूलेशन एनएबल्स ग्लाइडिंग इन फ्लाइंग स्नेक्स' शीर्षक से नेचर फिजिक्स जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, उड़ने वाले सांप उड़ने के लिए खास तरीके से हिलते हुए हवा में तैरते हैं और हवा में अंग्रेजी भाषा के अक्षर 'S' का आकार बनाते हैं. इस प्रक्रिया को अनड्यूलेशन कहा जाता है. शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि इन सांपो के शरीर का पीछे का हिस्सा एक तरह के ऊपर नीचे होने वाली मुड़ने की गतिविधि करता है. शरीर को फेंकने की यही गतिविधि उसे उड़ने वाला सांप बना देती है. इसी कारण उन्हें ग्लाइडिंग स्नेक (Gliding snake) भी कहा जाता है.
इस शोध अध्ययन में शामिल बायोकैमिकल इंजीनियरिंग एंड मैकेनिक्स के प्रोफेसर जैक सोचा के मुताबिक, अपने शरीर को सीधा करना और लहराने वाली गतिविधि के कारण सांप हवा में तैरते दिखाई देते हैं. पानी में तैरने के दौरान भी ऐसी ही गतिविधि होती है. इस अध्ययन के मुताबिक सांप 2 तरह की लहराने वाली गतिविधि करते हैं.
काफी तेज होती है गतिविधि
सांप एक बड़े आयाम (Amplitude) वाली चौड़ाई वाली लहर (Horizontal wave) बनाते हैं और इसके साथ ही एक छोटे आयाम (Amplitude) वाली लंबी लहर (Vertical wave) भी बनाते हैं. ये दोनों गतिविधि एक साथ सिर से लेकर पूंछ के सिरे तक कोऑर्डिनेशन के साथ होती हैं और इसी वजह से वे उड़ पाते हैं.
जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के इंजीनियर इसाक येटोन के मुताबिक, यह गतिविधि इतनी तेजी से होती है कि सामान्य आंखों से देख पाना संभव नहीं. इसलिए शोध के लिए हाई स्पीड मोशन कैमरे की जरूरत पड़ी थी.
भारत से क्या है कनेक्शन?
आम तौर पर क्रिसोपेलिया प्रजाति को उड़ने वाला सांप कहा जाता है. ये सांप दक्षिण-पूर्व एशिया के अलावा श्रीलंका, दक्षिण चीन और फिलीपींस में पाए जाते हैं. इसके साथ ही ये सांप भारत में भी पाए जाते हैं. ये सांप उतने जहरीले नहीं होते कि किसी इंसान की जान ले सकें. हालांकि इनके काटने का असर जरूर होता है. छिपकली, चूहे, चमगादड़, पक्षी वगैरह इनका भोजन होते हैं, जिनका वे शिकार करते हैं.